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रिपोर्ट में दावा: इंटरनेट की परेशानी से दुनिया भर में सरकारी वेबसाइटें ठप हुईं, तकनीक में गंभीर खामियां उजागर

Thu, 22 Oct 2026 12:09 AM IST
शिवम गर्ग वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवम गर्ग Updated Thu, 22 Oct 2026 12:09 AM IST
सार

दुनिया भर में सरकारी वेबसाइटें इंटरनेट के 70% हिस्से को चलाने वाली तकनीक में गंभीर कमियां मिलने से ठप पड़ गईं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को दुनिया में कई वेबसाइट्स ऑफलाइन हो गईं, क्योंकि डेवलपर्स ने दो गंभीर कमियों को उजागर किया। कई साइबर-सुरक्षा एजेंसियों ने उन संगठनों से अपनी वेबसाइटें बंद करने को कहा है जो समय रहते इन कमियों को ठीक नहीं कर सकते।

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Government Websites Go Offline After AI Discovers Critical PHP Security Flaws
कई देशों की सरकारी वेबसाइटें बंद - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से एक लोकप्रिय प्रोग्रामिंग भाषा में गंभीर सुरक्षा खामियों का पता चलने के बाद दुनिया भर में साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। खतरे से बचने के लिए यूरोप समेत कई देशों में सरकारी और सार्वजनिक वेबसाइटों को एहतियातन ऑफलाइन कर दिया गया। सॉफ्टवेयर डेवलपर्स ने इन खामियों को दूर करने के लिए नए सुरक्षा अपडेट जारी किए हैं और सभी यूजर्स से जल्द से जल्द इन्हें इंस्टॉल करने की अपील की है।

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रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, PHP प्रोग्रामिंग भाषा में ये खामियां कई वर्षों से मौजूद थीं। साइबर सुरक्षा कंपनी विज (Wiz) ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से इन कमजोरियों का पता लगाया गया। कुछ तकनीकी कंपनियों ने चेतावनी दी है कि हैकर इन खामियों का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में सुरक्षा अपडेट लागू होने से पहले वेबसाइटों पर हमले का खतरा बढ़ गया है।

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क्या है PHP और क्यों बढ़ी चिंता?

PHP एक प्रोग्रामिंग भाषा है, जिसका इस्तेमाल वेबसाइटों को चलाने और उनके पेज तैयार करने में किया जाता है। इसकी शुरुआत 1990 के दशक में हुई थी। आज भी इंटरनेट पर बड़ी संख्या में वेबसाइटें इस तकनीक का इस्तेमाल करती हैं।

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वर्डप्रेस, ड्रूपल, जूमला और मैगेंटो जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म भी PHP पर आधारित हैं। वेब टेक्नोलॉजी ट्रैकर W3Techs के अनुसार, जिन वेबसाइटों की प्रोग्रामिंग भाषा की पहचान की जा सकती है, उनमें लगभग 75 प्रतिशत वेबसाइटें PHP का इस्तेमाल करती हैं।

इस व्यापक इस्तेमाल के कारण PHP में मिली गंभीर खामी का असर बड़ी संख्या में वेबसाइटों पर पड़ सकता है। ड्रूपल एसोसिएशन की अंतरिम मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिफनी फैरिस ने कहा कि पिछले करीब 20 वर्षों में जारी PHP के संस्करणों का इस्तेमाल करने वाले सर्वर इस समस्या से प्रभावित हो सकते हैं।

AI की मदद से कैसे सामने आई खामी?

साइबर सुरक्षा कंपनी विज ने अपने ब्लॉग में बताया कि उसकी AI आधारित तकनीक की मदद से PHP के कोड में मौजूद कमजोरियों का पता चला। कंपनी के मुताबिक, ये खामियां एक दशक से भी अधिक समय से मौजूद थीं और पारंपरिक तरीकों से इनका पता लगाना तथा इनका फायदा उठाना काफी मुश्किल हो सकता था।

विज ने इस रिसर्च में अपने AI टूल विज एटलस के साथ गूगल के जेमिनी 4 आर्गन और ओपनएआई के GPT-5.6 सोल का इस्तेमाल करने की जानकारी दी। कंपनी ने PHP डेवलपर्स, ओपनएआई और साइबर सुरक्षा कंपनी कैलिफ के साथ मिलकर खामी की पहचान और सुरक्षा पैच की जांच की।

विशेषज्ञों का कहना है कि AI की मदद से सॉफ्टवेयर की कमजोरियों को पहचानना आसान हो सकता है। लेकिन यही तकनीक हैकरों को भी कमजोरियों को समझने और उनका फायदा उठाने में मदद दे सकती है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ कोस्टिन रायउ ने इसे कमजोरियों का फायदा उठाने की होड़ बताया।

नीदरलैंड, फिनलैंड और फ्रांस में भी वेबसाइटें बंद

सुरक्षा जोखिम को देखते हुए कई देशों और संगठनों ने अपनी वेबसाइटों तथा ऑनलाइन सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद कर दिया।

  • नीदरलैंड: राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा केंद्र के अलावा रॉटरडैम बंदरगाह, सरकारी पोर्टल Overheid.nl, फुटबॉल संघ KNVB और कई अस्पतालों की वेबसाइटें भी ऑफलाइन की गईं।
  • फिनलैंड: सरकारी आईटी सेवा प्रदाता वाल्टोरी ने एहतियात के तौर पर सरकारी सार्वजनिक नेटवर्क सेवाएं बंद कर दीं।
  • फ्रांस: गृह मंत्रालय ने अपनी सभी वेबसाइटों को एहतियाती रखरखाव के लिए डाल दिया।
  • डेनमार्क: आईटी कंपनी कॉम्बिट ने राष्ट्रीय स्कूल संचार प्लेटफॉर्म समेत कई सेवाएं बंद कीं।
  • जापान: क्लाउड सेवा प्रदाता साकुरा इंटरनेट ने अपने एक डेटाबेस उपकरण की सुविधा अस्थायी रूप से निलंबित कर दी।

इसके अलावा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान और यूरोपीय देशों की साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने PHP का इस्तेमाल करने वालों को तुरंत सुरक्षा अपडेट लागू करने या अपडेट होने तक वेबसाइटों को ऑफलाइन रखने की सलाह दी।

छोटे वेबसाइट संचालकों पर ज्यादा खतरा

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, छोटे व्यवसायों, व्यक्तिगत वेबसाइटों और सीमित तकनीकी संसाधनों वाले संगठनों के लिए जोखिम ज्यादा हो सकता है। साझा होस्टिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले कई वेबसाइट संचालकों के पास अपने सर्वर का सीधा नियंत्रण नहीं होता। ऐसे में सुरक्षा पैच लागू करने में देरी हो सकती है और वेबसाइटें लंबे समय तक जोखिम में रह सकती हैं।

विशेषज्ञ लुकास ओलेजनिक ने चेतावनी दी कि AI की मदद से इन कमजोरियों का फायदा बड़े पैमाने पर और तेजी से उठाया जा सकता है। हालांकि, सभी प्रभावित वेबसाइटों पर हमले होने की पुष्टि नहीं हुई है।

व्हाइट हाउस ने भी दी प्रतिक्रिया

व्हाइट हाउस ने कहा कि उसे इस सुरक्षा खामी के बारे में शुक्रवार को जानकारी दी गई थी। बयान में कहा गया कि यह खोज दिखाती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए AI के क्षेत्र में अमेरिकी नेतृत्व क्यों महत्वपूर्ण है। फिलहाल PHP डेवलपर्स ने सुरक्षा अपडेट जारी कर दिए हैं। वेबसाइट संचालकों को सलाह दी गई है कि वे अपने PHP संस्करण की जांच करें, उपलब्ध पैच लागू करें और तब तक जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाएं, जब तक उनके सिस्टम सुरक्षित नहीं हो जाते।

ऑस्ट्रेलिया और जापान भी सतर्क

ऑस्ट्रेलिया के साइबर सुरक्षा केंद्र ने इस खतरे को गंभीर श्रेणी में रखा। उसने वेबसाइट संचालकों और संगठनों से पीएचपी के इस्तेमाल का पता लगाने, आधिकारिक अपडेट पर नजर रखने और सुरक्षा सुधार उपलब्ध होते ही लागू करने को कहा। हालांकि, एजेंसी ने उस समय कहा था कि उसे इन कमजोरियों के सक्रिय दुरुपयोग की जानकारी नहीं थी। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने सोशल मीडिया पर वेबसाइट संचालकों से यह जांचने को कहा कि उनकी वेबसाइट पीएचपी पर चलती है या नहीं। जापानी कंपनी साकुरा इंटरनेट ने भी अपनी क्लाउड सेवा के एक फीचर को अस्थायी रूप से निलंबित किया।

हैकर कैसे उठा सकते हैं फायदा

सुरक्षा कमजोरियों का फायदा उठाकर हमलावर कुछ प्रभावित सर्वरों पर बिना लॉगिन किए नुकसान पहुंचाने वाला कोड चला सकते हैं। इससे वेबसाइट की सामग्री बदलने, सर्वर पर नियंत्रण हासिल करने या उसमें मौजूद जानकारी तक पहुंचने का खतरा पैदा हो सकता है। हालांकि, खामी सामने आने का मतलब यह नहीं है कि सभी प्रभावित वेबसाइटों को हैक कर लिया गया है या उनका डाटा चोरी हुआ है।

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