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ह्यूमनॉइड रोबोट ने रचा इतिहास: पहली बार की जीवित मरीज की सफल सर्जरी, सुरक्षित निकाला गॉलब्लैडर

Mon, 13 Jul 2026 05:07 PM IST
नीतीश कुमार टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Mon, 13 Jul 2026 05:07 PM IST
सार

Humanoid Robot Surgery: मेडिकल साइंस में यह पहली बार हुआ है कि ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने सफल सर्जरी की है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि एक पूरी सर्जरी में किसी इंसानी डॉक्टर ने मदद नहीं की। मात्र 19 लाख रुपये के इन रोबोट्स ने भविष्य के एडवांस रोबोटिक सर्जरी का नया रास्ता खोल दिया है।

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ह्यूमनॉइड रोबोट ने सफलतापूर्वक की सर्जरी - फोटो : साइबर रोबो

विस्तार

रोबोटिक्स और मेडिकल साइंस ने एक नया इतिहास रच दिया है। पहली बार दो ह्यूमनॉइड रोबोट ने मिलकर एक जीवित सूअर की सफल सर्जरी की और उसके पेट से गॉलब्लेडर (पित्ताशय) को सुरक्षित बाहर निकाला। हालांकि यह ऑपरेशन पूरी तरह स्वायत्त नहीं था। दोनों रोबोट को अनुभवी मानव सर्जनों ने रिमोट कंट्रोल के जरिए संचालित किया। इसके बावजूद विशेषज्ञ इसे चिकित्सा तकनीक के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं।
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इस ऑपरेशन को एक शोद के तौर पर यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन डिएगो की मेडिकल टीम और विश्वविद्यालय की एडवांस्ड रोबोटिक्स लैब ARClab ने मिलकर किया। शोधकर्ताओं का उद्देश्य यह समझना था कि क्या भविष्य में ह्यूमनॉइड रोबोट उन जगहों पर भी सर्जरी कर सकते हैं, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर शारीरिक रूप से मौजूद नहीं होंगे। वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल इसका जवाब पूरी तरह "हां" नहीं है, लेकिन तकनीक तेजी से उस दिशा में बढ़ रही है।
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कोई करोड़ों की मशीन नहीं, मात्र 19 लाख के आम रोबोट्स
  • इस प्रयोग की सबसे दिलचस्प और क्रांतिकारी बात यह है कि इसके लिए किसी विशेष या बेहद महंगी मशीन का निर्माण नहीं किया गया था। टीम ने बाजार में उपलब्ध Unitree G1 ह्यूमनॉइड रोबोट का इस्तेमाल किया। इन रोबोट की ऊंचाई करीब 4 से 5 फीट, वजन लगभग 70 पाउंड (करीब 32 किलोग्राम) है और इनकी कीमत 20,000 डॉलर (लगभग 17 लाख रुपये) से भी कम है।
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  • इनमें Dex3 नाम के तीन उंगलियों वाले रोबोटिक हाथ लगे थे, जिनमें अंगूठा, तर्जनी और बीच की उंगली के साथ कई मूविंग जॉइंट्स हैं। इसके अलावा रोबोट में अतिरिक्त कलाई और कमर की मूवमेंट, 3D LiDAR और डेप्थ कैमरा जैसी तकनीकें भी मौजूद थीं, जिन्होंने सर्जरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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दो अलग-अलग तरीकों से की गई सर्जरी
  • पहली सर्जरी के दौरान एक ह्यूमनॉइड रोबोट मुख्य भूमिका (लीड रोल) में था और एक इंसानी सर्जन ने उसकी सहायता की।
  • दूसरे तरीके में इंसान की कोई मदद नहीं ली गई। इसमें दो ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने आपस में तालमेल बिठाकर पूरी सर्जरी को स्वतंत्र रूप से अंजाम दिया।

बिना बड़े चीरे के हुई जटिल 'लैप्रोस्कोपिक सर्जरी'
इन दोनों 'सर्जी' रोबोट्स ने मिलकर 'लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी' तकनीक के जरिए इस मुश्किल ऑपरेशन को अंजाम दिया। इसका मतलब है कि उन्होंने सूअर के पेट में कोई बड़ा चीरा नहीं लगाया। किसी अनुभवी और कुशल सर्जन की तरह ही इन रोबोट्स ने बेहद सावधानी से अंदर के टिश्यूज को हटाया, स्थिति की जांच की, नसों को क्लिप लगाकर बंद किया और आखिर में लिवर को बिना कोई नुकसान पहुंचाए गॉलब्लेडर को शरीर से बाहर निकाल लिया।

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दूरदराज के इलाकों में बदल सकती है स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर
  • शोधकर्ताओं का मानना है कि सामान्य उपयोग वाले ह्यूमनॉइड रोबोट भविष्य में अस्पतालों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं। ये रोबोट अस्पताल में इंसानों की तरह घूम सकते हैं, सामान्य उपकरणों का इस्तेमाल कर सकते हैं और कई तरह के शारीरिक कार्य संभाल सकते हैं।
  • दुनिया की लगभग आधी आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है जहां विशेषज्ञ सर्जनों की भारी कमी है। अमेरिका और कनाडा जैसे विकसित देशों के ग्रामीण इलाकों में भी मरीजों को सर्जरी के लिए कई घंटे दूर जाना पड़ता है। ऐसे में किसी विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा हजारों किलोमीटर दूर बैठकर रोबोट के जरिए सर्जरी करना स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव ला सकता है।
  • इतना ही नहीं, भविष्य में यह तकनीक अंटार्कटिका, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) या मंगल ग्रह मिशन जैसी जगहों पर भी बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, जहां डॉक्टरों की मौजूदगी संभव नहीं होती।

अगर आने वाले वर्षों में AI और रोबोटिक्स में इसी गति से प्रगति होती रही, तो संभव है कि भविष्य में रोबोट पहले से प्रशिक्षित AI मॉडल के आधार पर और अधिक स्वतंत्र रूप से सर्जरी कर सकें। इससे इलाज की लागत कम हो सकती है और दुनिया के दूरदराज इलाकों तक विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना आसान हो जाएगा।
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