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आईफोन यूजर्स सावधान: सिर्फ विज्ञापन देखने से भी हैक हो सकता है फोन, बिना क्लिक किए चोरी हो सकता है डेटा

Sun, 25 Oct 2026 05:33 PM IST
नीतीश कुमार टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Sun, 25 Oct 2026 05:33 PM IST
सार

आईफोन इस्तेमाल करने वालों के लिए साइबर सुरक्षा से जुड़ा एक नया खतरा सामने आया है। सिक्योरिटी रिसर्चर्स के मुताबिक, हजारों वेबसाइट्स के जरिए ऐसे मालवेयर और स्पायवेयर फैलाए जा रहे हैं, जिनसे कुछ मामलों में बिना किसी लिंक पर क्लिक किए भी फोन को निशाना बनाया जा सकता है। इन हमलों का मकसद लॉगिन जानकारी और क्रिप्टो वॉलेट से जुड़ा डेटा चुराना है। जानिए, इस खतरे से कैसे बचें।

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आईफोन यूजर्स पर मंडरा रहा नया खतरा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आईफोन को आमतौर पर सुरक्षित स्मार्टफोन माना जाता है, लेकिन साइबर अपराधियों ने इसे निशाना बनाने का एक नया तरीका खोज लिया है। अब कुछ मामलों में किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक किए बिना भी फोन पर हमला हो सकता है। सिक्योरिटी रिसर्चर्स के मुताबिक, हजारों असली वेबसाइट्स का इस्तेमाल मालवेयर फैलाने के लिए किया जा रहा है। कुछ वेबसाइट्स पर दिखने वाले विज्ञापनों के जरिए स्पायवेयर फोन तक पहुंच सकता है, जिसका मकसद लॉगिन जानकारी और क्रिप्टो वॉलेट से जुड़ा डेटा चुराना है।
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6,600 से ज्यादा वेबसाइट्स पर मिला मालवेयर का खतरा
  • 22 अक्टूबर 2026 को जारी जानकारी के मुताबिक, सिक्योरिटी कंपनियों iVerify और Report URI के रिसर्चर्स ने हजारों वेबसाइट्स पर संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाया है। रिपोर्ट में कम से कम 6,600 वास्तविक वेबसाइट्स का जिक्र है, जिनका इस्तेमाल उनकी जानकारी के बिना मालवेयर कोड लोड करने के लिए किया जा रहा था। इनमें से 248 वेबसाइट्स सीधे स्पायवेयर पहुंचाने से जुड़ी बताई गई हैं।
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  • इन वेबसाइट्स पर हर महीने करीब 90 लाख विजिट्स आने का अनुमान है। इसका मतलब यह है कि खतरा सिर्फ संदिग्ध या फर्जी वेबसाइट्स तक सीमित नहीं है। किसी सामान्य वेबसाइट पर मौजूद विज्ञापन या थर्ड-पार्टी टूल के जरिए भी यूजर तक नुकसान पहुंचाने वाला कोड पहुंच सकता है।
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  • हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि इन सभी वेबसाइट्स पर जाने वाला हर आईफोन यूजर संक्रमित हो जाएगा। खतरा डिवाइस के सॉफ्टवेयर, हमले में इस्तेमाल की गई कमजोरी और दूसरी परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

विज्ञापन देखते ही कैसे शुरू हो सकता है हमला?
  • iVerify के को-फाउंडर रॉकी कोल के मुताबिक, कुछ हमलों में यूजर को किसी लिंक पर क्लिक करने या कोई फाइल डाउनलोड करने की जरूरत नहीं होती। वह सामान्य तरीके से इंटरनेट इस्तेमाल कर रहा होता है या सोशल मीडिया पर स्क्रॉल कर रहा होता है, तभी विज्ञापन से जुड़ा दुर्भावनापूर्ण कोड हमले की शुरुआत कर सकता है।
  • रिपोर्ट में एक ऐसा मामला भी सामने आया, जिसमें एक वित्तीय कंपनी के कर्मचारी का आईफोन इंस्टाग्राम पर फुटबॉल से जुड़ा विज्ञापन देखते समय संक्रमित हो गया। बताया गया कि हमले के दौरान कोड ने पहले फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम की जांच की और फिर उसके मुताबिक हमला किया।
  • इसके बाद हमलावरों ने लॉगिन से जुड़ी जानकारी हासिल करने और क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट तलाशने की कोशिश की। इस तरह के हमले को समझना जरूरी है, क्योंकि इसमें यूजर की एक आम गतिविधि भी जोखिम का कारण बन सकती है। हालांकि, केवल विज्ञापन दिखने से हर बार फोन हैक नहीं होता। आम तौर पर ऐसे हमले किसी सॉफ्टवेयर कमजोरी का फायदा उठाते हैं।

एक्सपायर हो चुके डोमेन से हजारों वेबसाइट्स पर खतरा
  • Report URI ने एक दूसरे अभियान का पता लगाया। इसके तहत हमलावरों ने करीब 630 ऐसे डोमेन खरीदे, जिनका रजिस्ट्रेशन पहले खत्म हो चुका था। इन डोमेन का इस्तेमाल पहले कुछ वेबसाइट्स चैटबॉट और एनालिटिक्स जैसे टूल चलाने के लिए करती थीं।
  • रिपोर्ट के मुताबिक, इन डोमेन के दोबारा इस्तेमाल से करीब 8,000 वेबसाइट्स प्रभावित हुईं। जब किसी वेबसाइट पर पहले से इस्तेमाल हो रहा थर्ड-पार्टी टूल किसी पुराने डोमेन से जुड़ा हो और वह डोमेन बाद में किसी हमलावर के हाथ लग जाए, तो उस पर आने वाले ट्रैफिक का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • इस अभियान का मकसद भी आईफोन को स्पायवेयर की तरह इस्तेमाल करना और क्रिप्टो वॉलेट की जानकारी या दूसरे लॉगिन क्रेडेंशियल चुराना बताया गया है।

DeadTag ग्रुप पर क्या आरोप हैं?
  • Report URI के फाउंडर स्कॉट हेलमे के मुताबिक, DeadTag नाम का एक ग्रुप ऐसे हमलों के लिए इस्तेमाल होने वाले डोमेन और विज्ञापन दिखाने की जगहें उपलब्ध करा रहा है। उनके अनुसार, यह ग्रुप हर हफ्ते करीब 10 नए नुकसान पहुंचाने वाले डोमेन तैयार करता है।
  • रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हमलावर पुराने अटैक टूलकिट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें ऐसे टूल शामिल हैं, जो पहले सरकारी एजेंसियों के पास थे और बाद में लीक हो गए थे।
  • ऐसे टूल का इस्तेमाल उन डिवाइस को निशाना बनाने में किया जा सकता है, जिनमें सॉफ्टवेयर की पुरानी कमजोरियां अब भी मौजूद हैं। एप्पल ने पहले सामने आई कई कमजोरियों के लिए अपडेट जारी किए हैं, लेकिन जो यूजर फोन को समय पर अपडेट नहीं करते, उनके डिवाइस जोखिम में रह सकते हैं।
  • रिसर्चर्स ने हमलावरों के चीन से जुड़े होने की आशंका भी जताई है। यह आशंका कोड में चीनी भाषा के इस्तेमाल पर आधारित बताई गई है, लेकिन इससे हमलावरों की पहचान या उनके देश से संबंध की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं होती।

iPhone यूजर्स अपने फोन को कैसे सुरक्षित रखें?
इस तरह के हमलों से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाई जा सकती हैं।
- iOS अपडेट रखें: फोन में उपलब्ध नवीनतम सॉफ्टवेयर अपडेट इंस्टॉल करें। सुरक्षा अपडेट पुरानी कमजोरियों को दूर कर सकते हैं।
- संदिग्ध वेबसाइट्स से बचें: अनजान वेबसाइट्स पर जाने और संदिग्ध विज्ञापनों से जुड़ने में सावधानी बरतें।
- अनजान प्रोफाइल या ऐप इंस्टॉल न करें: किसी वेबसाइट के कहने पर अनजान कॉन्फिगरेशन प्रोफाइल या ऐप इंस्टॉल करने से बचें।
- अकाउंट की सुरक्षा मजबूत करें: अलग-अलग अकाउंट के लिए मजबूत पासवर्ड रखें और जहां संभव हो, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करें।
- असामान्य गतिविधियों पर ध्यान दें: अगर किसी अकाउंट में अनजान लॉगिन या क्रिप्टो वॉलेट में संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो तुरंत पासवर्ड बदलें और संबंधित सेवा से संपर्क करें।
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