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IRCTC : अब एआई रखेगा रेलवे के खाने पर नजर, रसोइयों की करेगा निगरानी, छोटी सी गलती पर भी होगा एक्शन
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Fri, 05 Jun 2026 05:49 PM IST
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सार
IRCTC AI Kitchen Monitoring: ट्रेन में मिलने वाले खाने की साफ-सफाई को लेकर हमेशा से यात्रियों के मन में शंका रही है। लेकिन अब आपकी यह चिंता दूर होने वाली है। अब आईआरसीटीसी ने एआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू कर दिया है, जो हजारों कैमरों की मदद से रसोइयों में हर गतिविधि पर नजर रखेगा। आइए जानते हैं कि यह तकनीकी यात्रियों के खाने को कितना सुरक्षा बना सकती है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
Indian Railways Food Quality: भारतीय रेलवे में सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए खाने की स्वच्छता और उसकी क्वालिटी हमेशा से एक गंभीर मुद्दा बना रहा है, लेकिन अब भारतीय रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) ने अपने बेस किचन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम लागू कर दिया है। इस नई व्यवस्था के जरिए देशभर में खाना बनाने की प्रक्रिया पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है, ताकि यात्रियों तक सुरक्षित और बेहतर गुणवत्ता वाला भोजन मिल सके।
800 से ज्यादा किचनों पर AI की पैनी नजर
IRCTC ने देशभर के करीब 800 से अधिक बेस रसाइयों को एआई आधारित निगरानी नेटवर्क से जोड़ दिया है। इसके लिए कुल 2,394 स्मार्ट कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मॉनिटरिंग दिल्ली स्थित सेंट्रल वॉर रूम से की जा रही है। यह सिस्टम रसाइयों में होने वाली हर गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है और स्वच्छता व उससे जुड़ी किसी भी गड़बड़ी का तुरंत पता लगा सकता है। इसका उद्देश्य खाने की गुणवत्ता बनाए रखना और हाइजीन से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है।
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800 से ज्यादा किचनों पर AI की पैनी नजर
IRCTC ने देशभर के करीब 800 से अधिक बेस रसाइयों को एआई आधारित निगरानी नेटवर्क से जोड़ दिया है। इसके लिए कुल 2,394 स्मार्ट कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मॉनिटरिंग दिल्ली स्थित सेंट्रल वॉर रूम से की जा रही है। यह सिस्टम रसाइयों में होने वाली हर गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है और स्वच्छता व उससे जुड़ी किसी भी गड़बड़ी का तुरंत पता लगा सकता है। इसका उद्देश्य खाने की गुणवत्ता बनाए रखना और हाइजीन से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एआई जनरेटेड
किन गड़बड़ियों को पहचानता है एआई सिस्टम?
एआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम कुल 9 प्रकार की गतिविधियों की पहचान करने में सक्षम है।
एआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम कुल 9 प्रकार की गतिविधियों की पहचान करने में सक्षम है।
- किचन स्टाफ की ओर से हेयरनेट न पहनना: सबसे पहले देखा जाएगा कि खाना बनाते समय बाल गिरने से रोकने के लिए कुक ने हेयरनेट पहन रखा है या नहीं।
- पारदर्शी ग्लव्स का इस्तेमाल : फूड हैंडलिंग के दौरान कर्मचारियों ने ग्लव्स पहने हैं या नहीं, सिस्टम इसका पता लगा रहा है।
- किचन की सफाई में लापरवाही: फर्श, काउंटर और कार्यस्थल की साफ-सफाई पर AI लगातार नजर रख रहा है।
- पोछा लगाने या सैनिटाइजेशन की कमी: नियमित सफाई और पोछा लगाने की गतिविधियों की भी मॉनिटरिंग की जा रही है।
- चूहों की मौजूदगी: किचन में किसी भी तरह के रोडेंट्स दिखाई देने पर सिस्टम तुरंत अलर्ट भेजता है।
- मक्खियों का दिखना: खाने के आसपास मक्खियों की मौजूदगी को एआई पहचान कर सकता है।
- तिलचट्टों (Cockroaches) का पता लगाना: किचन में कॉकरोच दिखने पर संबंधित अधिकारियों को तुरंत सूचना भेजी जाती है।
- अनहाइजीनिक गतिविधियों की पहचान: खाना तैयार करने या संभालने के दौरान स्वच्छता नियमों का उल्लंघन होने पर सिस्टम अलर्ट देता है।
- खाने की सुरक्षा को प्रभावित करने वाली अन्य अस्वच्छ स्थितियां: इसके अलावा AI कैमरे ऐसी छोटी-छोटी गड़बड़ियों को भी पहचा रहे हैं जो भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा पर असर डाल सकती हैं, यहां तक कि 7-8 मिमी आकार के कीड़ों तक को भी पकड़ सकते हैं।
- IRCTC अधिकारियों का कहना है कि यह तकनीक बेहद संवेदनशील है। AI सिस्टम 7 से 8 मिलीमीटर तक के छोटे कीड़ों की पहचान करने में सक्षम है। जैसे ही कोई गड़बड़ी या अस्वच्छ गतिविधि सामने आती है, संबंधित किचन मैनेजर को तुरंत अलर्ट भेज दिया जाता है।
- अगर मैनेजर ने समय रहते सुधार नहीं किया, तो फिर बात आगे वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी। आमतौर पर दो घंटे के भीतर संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एआई जनरेटेड
रोजाना मिल रहे सैकड़ों अलर्ट
IRCTC के अनुसार मौसम परिवर्तन का समय किचनों के लिए सबसे संवेदनशील माना जाता है। इसी दौरान खाने की गुणवत्ता प्रभावित होने और यात्रियों की शिकायतें बढ़ने की संभावना अधिक रहती है। हालांकि सिस्टम की ओर से जनरेट किए जाने वाले अलर्ट में करीब 10 प्रतिशत फॉल्स अलर्ट भी शामिल होते हैं, लेकिन इसके बावजूद यह निगरानी व्यवस्था लगातार सुधार और गुणवत्ता नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
हर दिन 18 लाख मील परोसे जा रहे
- आईआरसीटीसी के अनुसार इस मॉनिटरिंग सिस्टम को सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि इसपर काम भी किया जा रहा है। इसके जरिए प्रतिदिन औसतन 350 अलर्ट जनरेट होते हैं। पिछले एक महीने में कुल 13,550 अलर्ट रिकॉर्ड किए गए हैं।
- इनमें सबसे अधिक मामले नॉर्दर्न रीजन से सामने आए, जहां 4,123 अलर्ट दर्ज हुए। इसके बाद ईस्टर्न रीजन में 3,205 और वेस्टर्न रीजन में 2,687 अलर्ट प्राप्त हुए। अधिकारियों का कहना है कि सबसे आम हाइजीन उल्लंघन कर्मचारियों द्वारा हेयरनेट न पहनना पाया गया है।
IRCTC के अनुसार मौसम परिवर्तन का समय किचनों के लिए सबसे संवेदनशील माना जाता है। इसी दौरान खाने की गुणवत्ता प्रभावित होने और यात्रियों की शिकायतें बढ़ने की संभावना अधिक रहती है। हालांकि सिस्टम की ओर से जनरेट किए जाने वाले अलर्ट में करीब 10 प्रतिशत फॉल्स अलर्ट भी शामिल होते हैं, लेकिन इसके बावजूद यह निगरानी व्यवस्था लगातार सुधार और गुणवत्ता नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
हर दिन 18 लाख मील परोसे जा रहे
- भारतीय रेलवे के विशाल नेटवर्क में यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराना एक बड़ी जिम्मेदारी है। IRCTC के आंकड़ों के अनुसार रेलवे नेटवर्क पर हर साल लगभग 60 करोड़ भोजन यात्रियों को परोसे जाते हैं।
- मार्च 2026 तक जहां रोजाना लगभग 16 लाख मील सर्व किए जा रहे थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 18 लाख प्रतिदिन तक पहुंच गई है।
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- फोटो : एआई जनरेटेड
1,453 ट्रेनों में उपलब्ध है कैटरिंग सेवा
वर्तमान में IRCTC करीब 1,453 ट्रेनों में कैटरिंग सेवाएं संचालित कर रहा है। इनमें वंदे भारत, राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, तेजस और गतिमान जैसी प्रमुख प्रीमियम ट्रेनें भी शामिल हैं। इतने बड़े नेटवर्क में खाने की गुणवत्ता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है, जिसे अब AI तकनीक के सहारे और प्रभावी बनाया जा रहा है।
यात्रियों को मिलेगा सुरक्षित और बेहतर भोजन
IRCTC का लक्ष्य केवल निगरानी करना नहीं, बल्कि रियल-टाइम कंप्लायंस, बेहतर क्वालिटी कंट्रोल और त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करना भी है। एआई कैमरे की मदद से यह तकनीक रेलवे कैटरिंग सिस्टम को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में इसका सबसे बड़ा फायदा यात्रियों को मिलेगा, जिन्हें अधिक स्वच्छ और गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराया जा सकेगा।
वर्तमान में IRCTC करीब 1,453 ट्रेनों में कैटरिंग सेवाएं संचालित कर रहा है। इनमें वंदे भारत, राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, तेजस और गतिमान जैसी प्रमुख प्रीमियम ट्रेनें भी शामिल हैं। इतने बड़े नेटवर्क में खाने की गुणवत्ता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है, जिसे अब AI तकनीक के सहारे और प्रभावी बनाया जा रहा है।
यात्रियों को मिलेगा सुरक्षित और बेहतर भोजन
IRCTC का लक्ष्य केवल निगरानी करना नहीं, बल्कि रियल-टाइम कंप्लायंस, बेहतर क्वालिटी कंट्रोल और त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करना भी है। एआई कैमरे की मदद से यह तकनीक रेलवे कैटरिंग सिस्टम को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में इसका सबसे बड़ा फायदा यात्रियों को मिलेगा, जिन्हें अधिक स्वच्छ और गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराया जा सकेगा।