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मेटा पर नया आरोप: व्हिसलब्लोअर का दावा- कंपनी के आंकड़ों से 400 गुना ज्यादा किशोरों ने देखा हानिकारक कंटेंट
Wed, 19 Aug 2026 04:27 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Wed, 19 Aug 2026 04:27 PM IST
सार
मेटा पर बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को लेकर चल रहे अमेरिकी मुकदमे में नया दावा सामने आया है। व्हिसलब्लोअर आर्टुरो बेहार के मुताबिक, कंपनी की आंतरिक रिसर्च और सार्वजनिक आंकड़ों में बड़ा अंतर था। दावों के मुताबिक, कुछ नकारात्मक अनुभव आधिकारिक आंकड़ों से 100 गुना तक अधिक पाए गए हैं।
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मेटा पर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की बड़ी कार्रवाई
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिग्गज टेक कंपनी मेटा पर इन दिनों अमेरिकी अदालत में हानिकारक कंटेंट के मामले में कार्रवाई चल रही है। इसी बीच मेटा के ही पूर्व कर्मचारी ने कंपनी पर गंभीर आरोप लगा दिए हैं। कंपनी के ही एक पूर्व इंजीनियरिंग निदेशक और सलाहकार आर्टुरो बेजर ने एक ऐसा सनसनीखेज दावा किया है, जिसने टेक जगत में खलबली मचा दी है। बेजर के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर किशोरों ने जितना हानिकारक और आपत्तिजनक कंटेंट देखा, उसकी असली संख्या कंपनी द्वारा सार्वजनिक किए गए आंकड़ों से लगभग 400 गुना अधिक है। यह अहम खुलासा अमेरिका में मेटा पर चल रहे इस ऐतिहासिक मुकदमे का मुख्य आधार बन गया है।
आधिकारिक आंकड़ों और असलियत में बड़ा अंतर
आर्टुरो बेजर के मुताबिक, मेटा ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि किशोरों के ग्राफिक या हिंसक कंटेंट के संपर्क में आने का जोखिम 0.01% से 0.02% था। वहीं, कंपनी के आंतरिक सर्वेक्षण के नतीजों में यह आंकड़ा 100 से 400 गुना तक अधिक पाया गया। अपनी गवाही में बताया कि मेटा के आधिकारिक आंकड़े और यूजर्स के असली अनुभवों के बीच एक बहुत बड़ी खाई है। जब बेजर कंपनी में यूजर-सेफ्टी पर काम कर रहे थे, तब उनके आंतरिक शोध से पता चला था कि किशोरों को ऑनलाइन बदमाशी और उत्पीड़न जैसी नकारात्मक स्थितियों का सामना कहीं ज्यादा करना पड़ रहा था। मेटा का सिस्टम सिर्फ उन मामलों को गिनता था जो सीधे तौर पर उनकी नीतियों का उल्लंघन करते थे, लेकिन बेजर के शोध ने सीधे यूजर्स से उनके अनुभव पूछे। इससे यह बात सामने आई कि कोई भी कंटेंट किशोरों के लिए मानसिक रूप से परेशान करने वाला हो सकता है, भले ही वह मेटा की स्थापित नीतियों के खिलाफ न हो।
मुनाफे के लिए बच्चों की सुरक्षा को किया नजरअंदाज
इस गंभीर मामले में अमेरिका के 29 राज्य एकजुट होकर Meta के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी के अटॉर्नी जनरल के नेतृत्व में ऑकलैंड, कैलिफोर्निया की संघीय अदालत में यह मुकदमा चल रहा है। राज्यों का सीधा आरोप है कि कंपनी अच्छी तरह जानती थी कि उसके प्लेटफॉर्म युवाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं, लेकिन उसने अपने व्यावसायिक मुनाफे और यूजर्स एंगेजमेंट को प्राथमिकता दी। अंतहीन स्क्रॉलिंग, पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन और लगातार आने वाले नोटिफिकेशंस जैसे फीचर्स जानबूझकर ऐसे डिजाइन किए गए ताकि बच्चे फेसबुक और इंस्टाग्राम के आदी हो जाएं। इसके साथ ही, कंपनी पर बिना माता-पिता की अनुमति के 13 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा अवैध रूप से इकट्ठा करने का भी आरोप है।
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मेटा को भरना पढ़ सकता है 200 अरब डॉलर का हर्जाना
यह कानूनी लड़ाई इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाइयों में से एक मानी जा रही है। इस मुकदमे में 200 अरब डॉलर (13.4 लाख करोड़ रुपये) तक के हर्जाने की मांग की गई है। इसके अलावा, अदालत से अपील की गई है कि वह मेटा के प्लेटफॉर्म्स के डिजाइन और कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव करने का आदेश दे। इस पूरे प्रकरण की तुलना 1990 के दशक में तंबाकू उद्योग के खिलाफ चले मामलों से की जा रही है, जहां शक्तिशाली कंपनियों को अपने उत्पादों के नुकसान पता थे, फिर भी वे व्यवसाय करते रहे। आने वाले हफ्तों में इस मामले की सुनवाई के दौरान मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग और इंस्टाग्राम के प्रमुख एडम मोसेरी की गवाही भी होने की उम्मीद है।
आरोपों पर मेटा की सफाई
दूसरी ओर, मेटा ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी का तर्क है कि राज्यों द्वारा पेश किए गए सबूतों को गलत संदर्भ में लिया गया है। मेटा के अनुसार, उसने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाने के लिए भारी निवेश किया है और अपनी न्यूनतम आयु सीमा का पालन न करने वाले लाखों बच्चों के अकाउंट्स को डिलीट भी किया है। हालांकि, अगर अदालत का फैसला मेटा के खिलाफ जाता है, तो उसे सिर्फ भारी जुर्माना ही नहीं चुकाना पड़ेगा, बल्कि फेसबुक और इंस्टाग्राम के उन मुख्य फीचर्स को भी बदलना पड़ सकता है, जिन्होंने उन्हें दुनिया का सबसे लोकप्रिय सोशल नेटवर्क बनाया है।
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आधिकारिक आंकड़ों और असलियत में बड़ा अंतर
आर्टुरो बेजर के मुताबिक, मेटा ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि किशोरों के ग्राफिक या हिंसक कंटेंट के संपर्क में आने का जोखिम 0.01% से 0.02% था। वहीं, कंपनी के आंतरिक सर्वेक्षण के नतीजों में यह आंकड़ा 100 से 400 गुना तक अधिक पाया गया। अपनी गवाही में बताया कि मेटा के आधिकारिक आंकड़े और यूजर्स के असली अनुभवों के बीच एक बहुत बड़ी खाई है। जब बेजर कंपनी में यूजर-सेफ्टी पर काम कर रहे थे, तब उनके आंतरिक शोध से पता चला था कि किशोरों को ऑनलाइन बदमाशी और उत्पीड़न जैसी नकारात्मक स्थितियों का सामना कहीं ज्यादा करना पड़ रहा था। मेटा का सिस्टम सिर्फ उन मामलों को गिनता था जो सीधे तौर पर उनकी नीतियों का उल्लंघन करते थे, लेकिन बेजर के शोध ने सीधे यूजर्स से उनके अनुभव पूछे। इससे यह बात सामने आई कि कोई भी कंटेंट किशोरों के लिए मानसिक रूप से परेशान करने वाला हो सकता है, भले ही वह मेटा की स्थापित नीतियों के खिलाफ न हो।
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मुनाफे के लिए बच्चों की सुरक्षा को किया नजरअंदाज
इस गंभीर मामले में अमेरिका के 29 राज्य एकजुट होकर Meta के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी के अटॉर्नी जनरल के नेतृत्व में ऑकलैंड, कैलिफोर्निया की संघीय अदालत में यह मुकदमा चल रहा है। राज्यों का सीधा आरोप है कि कंपनी अच्छी तरह जानती थी कि उसके प्लेटफॉर्म युवाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं, लेकिन उसने अपने व्यावसायिक मुनाफे और यूजर्स एंगेजमेंट को प्राथमिकता दी। अंतहीन स्क्रॉलिंग, पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन और लगातार आने वाले नोटिफिकेशंस जैसे फीचर्स जानबूझकर ऐसे डिजाइन किए गए ताकि बच्चे फेसबुक और इंस्टाग्राम के आदी हो जाएं। इसके साथ ही, कंपनी पर बिना माता-पिता की अनुमति के 13 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा अवैध रूप से इकट्ठा करने का भी आरोप है।
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मेटा को भरना पढ़ सकता है 200 अरब डॉलर का हर्जाना
यह कानूनी लड़ाई इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाइयों में से एक मानी जा रही है। इस मुकदमे में 200 अरब डॉलर (13.4 लाख करोड़ रुपये) तक के हर्जाने की मांग की गई है। इसके अलावा, अदालत से अपील की गई है कि वह मेटा के प्लेटफॉर्म्स के डिजाइन और कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव करने का आदेश दे। इस पूरे प्रकरण की तुलना 1990 के दशक में तंबाकू उद्योग के खिलाफ चले मामलों से की जा रही है, जहां शक्तिशाली कंपनियों को अपने उत्पादों के नुकसान पता थे, फिर भी वे व्यवसाय करते रहे। आने वाले हफ्तों में इस मामले की सुनवाई के दौरान मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग और इंस्टाग्राम के प्रमुख एडम मोसेरी की गवाही भी होने की उम्मीद है।
आरोपों पर मेटा की सफाई
दूसरी ओर, मेटा ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी का तर्क है कि राज्यों द्वारा पेश किए गए सबूतों को गलत संदर्भ में लिया गया है। मेटा के अनुसार, उसने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाने के लिए भारी निवेश किया है और अपनी न्यूनतम आयु सीमा का पालन न करने वाले लाखों बच्चों के अकाउंट्स को डिलीट भी किया है। हालांकि, अगर अदालत का फैसला मेटा के खिलाफ जाता है, तो उसे सिर्फ भारी जुर्माना ही नहीं चुकाना पड़ेगा, बल्कि फेसबुक और इंस्टाग्राम के उन मुख्य फीचर्स को भी बदलना पड़ सकता है, जिन्होंने उन्हें दुनिया का सबसे लोकप्रिय सोशल नेटवर्क बनाया है।