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OpenAI का बड़ा कारनामा: इंसानों से आगे निकला AI? ओपनएआई के मॉडल ने खुद हल की 80 साल पुरानी गणित की समस्या

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Thu, 21 May 2026 11:54 PM IST
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सार

OpenAI AI Maths Problem: ओपनएआई के नए एआई मॉडल ने इतिहास रचते हुए 1946 की गणित की एक दशकों पुरानी और जटिल गुत्थी को बिना किसी इंसानी मदद के सुलझा लिया है। इस खोज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एआई ने जवाब को इंटरनेट से कॉपी करने के बजाय, अपनी तार्किक क्षमता का इस्तेमाल करके इसे हल करने का बिल्कुल नया तरीका खोजा है। यह बड़ी कामयाबी यह साबित करती है कि एआई अब सिर्फ एक 'असिस्टेंट' नहीं रहा, बल्कि वह खुद से ओरिजिनल आइडिया जेनरेट कर सकता है। आने वाले समय में एआई की यह क्षमता मेडिकल साइंस, बायोलॉजी और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों के लिए एक बहुत बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

OpenAI Claims Its AI Solved A Maths Problem Unsolved Since 1946 Without Human Help
ओपनएआई ने हल की 1946 से अनसुलझी गणित की गुत्थी - फोटो : एआई
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विस्तार

ओपनएआई ने दावा किया है कि उसके लेटेस्ट एआई मॉडल ने दशकों पुरानी गणित की एक ऐसी जटिल समस्या को सफलतापूर्वक सुलझा लिया है, जिस पर वैज्ञानिक वर्षों से माथापच्ची कर रहे थे। कंपनी के मुताबिक, उनके एआई ने 'प्लैनर यूनिट डिस्टेंस प्रॉब्लम' से जुड़े एक नए गणितीय प्रमाण की स्वतंत्र रूप से खोज की है। ज्यामिति की यह समस्या सबसे पहले 1946 में मशहूर गणितज्ञ पॉल एर्डोस के जरिए प्रस्तावित की गई थी।



टेक और रिसर्च की दुनिया में इस खबर ने इसलिए तहलका मचा दिया है क्योंकि ओपनएआई का कहना है कि एआई ने यह समाधान किसी इंटरनेट डेटाबेस या पुरानी रिसर्च से कॉपी नहीं किया। बल्कि खुद तार्किक क्षमता का उपयोग करते हुए इसे हल करने का बिल्कुल नया और मौलिक तरीका खोज निकाला है।

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आखिर क्या है गणित की यह समस्या?

प्लैनर यूनिट डिस्टेंस प्रॉब्लम सुनने में भले ही काफी जटिल लगे, लेकिन इसका मूल विचार समझना आसान है। दरअसल, यह समस्या एक सपाट सतह पर बिंदुओं को इस तरह से व्यवस्थित करने के बारे में है, ताकि एक-दूसरे से ठीक एक यूनिट की दूरी पर स्थित बिंदुओं के जोड़ों की संख्या अधिकतम हो सके। वर्षों से गणितज्ञों का यह मानना था कि बिंदुओं को एक ग्रिड के रूप में सजाना ही इस समस्या को सुलझाने का सबसे बेहतरीन तरीका है।

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हालांकि, ओपनएआई के अनुसार उनके एआई मॉडल ने बिंदुओं को व्यवस्थित करने का एक ऐसा नया तरीका खोज निकाला है। जो वैज्ञानिकों के दशकों पुराने उन सभी अनुमानों से कहीं ज्यादा प्रभावी और बेहतर है। इस अनूठी खोज के बाद, नोगा अलोन, मेलानी वुड और थॉमस ब्लूम जैसे प्रख्यात गणितज्ञों ने भी एआई के जरिए तैयार किए गए इस प्रमाण की बारीकी से जांच की और इसके नतीजों को पूरी तरह सही ठहराया है।


वैज्ञानिक इस पर इतना ध्यान क्यों दे रहे हैं?

यह खोज केवल गणितीय सफलता के कारण नहीं, बल्कि एआई की कार्यप्रणाली में आए बड़े बदलाव के कारण चर्चा का विषय बनी हुई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस समस्या को हल करने के लिए किसी विशेष मैथ टूल का उपयोग नहीं किया गया, बल्कि ओपनएआई के एक जनरल पर्पज रीजनिंग मॉडल ने इसे अंजाम दिया है। यह वही मॉडल है जो सामान्य कार्यों के लिए बनाया गया है, न कि विशेष रूप से गणितीय गणनाओं के लिए।

इतना ही नहीं, एआई ने बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के जटिल तार्किक कड़ियों को आपस में जोड़ा और गणित के विभिन्न सिद्धांतों को एक साथ लाकर समाधान खोजा। गणितीय प्रमाणों को हल करना लेख या कोड लिखने से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। क्योंकि इसमें एक छोटी सी गलती भी पूरी थ्योरी को गलत साबित कर सकती है।

इस कठिन प्रक्रिया में सटीकता के साथ सफल होना यह साबित करता है कि एआई अब केवल इंसानों की सहायता करने तक सीमित नहीं रह गया है। बल्कि यह अब खुद से नए और मौलिक विचार उत्पन्न करने में भी सक्षम है। इसीलिए इसे एआई के विकास में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।


सिर्फ गणित नहीं, और भी क्षेत्रों में होगा फायदा

इस सफलता का प्रभाव केवल ज्यामिति या गणित तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। ओपनएआई का मानना है कि जो एआई मॉडल जटिल और लंबी तार्किक समस्याओं को सुलझाने में सक्षम हैं, वे भविष्य में बायोलॉजी, फिजिक्स, इंजीनियरिंग और मेडिकल साइंस जैसे क्षेत्रों में वैज्ञानिकों के लिए एक शक्तिशाली टूल साबित होंगे। दरअसल, गंभीर बीमारियों के इलाज या विज्ञान की जटिल गुत्थियों को सुलझाने के लिए विशाल डेटा के विश्लेषण की आवश्यकता होती है, और यहीं ये रीजनिंग-फोकस्ड मॉडल गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।

हालांकि, वैज्ञानिक समुदाय अभी भी इन दावों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त होने के बजाय सावधानी बरत रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि अतीत में भी एआई की ऐसी कई बड़ी खोजों को लेकर दावे किए गए थे। इन्हें बाद में या तो सुधारना पड़ा या पूरी तरह खारिज करना पड़ा। लेकिन अगर इस बार का दावा पूरी तरह सत्य और सटीक साबित होता है तो यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक होगा।

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