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हाथ में मोबाइल और दूर होते रिश्ते: स्मार्टफोन कैसे बन रहा है सूने आंगनों की सबसे बड़ी वजह?
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Fri, 22 May 2026 12:10 PM IST
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सार
Smartphone Addiction: भारत सहित पूरी दुनिया में जन्म दर तेजी से गिर रही है। हमेशा से महंगाई और करियर की चिंताओं को इसकी मुख्य वजह माना जाता रहा है। लेकिन अब एक नया और चौंकाने वाला कारण सामने आया है। रिसर्च के अनुसार, हमारी जेब में रखा स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की लत भी परिवारों को छोटा कर रही है। जानिए कैसे।
स्मार्टफोन जन्म दर को कर रहा है प्रभावित
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
भारत की जनसंख्या की कहानी बहुत तेजी से बदल रही है। करीब तीन दशक पहले भारतीय महिलाएं औसतन 3.4 बच्चों को जन्म देती थीं। अब सरकारी डेटा बताता है कि यह आंकड़ा गिरकर 2.0 पर आ गया है। यह 2.1 के 'रिप्लेसमेंट लेवल' से भी नीचे है। रिप्लेसमेंट लेवल वह दर है जो किसी आबादी को बिना बाहरी पलायन के स्थिर रखने के लिए जरूरी होती है।
लेकिन ऐसा सिर्फ भारत में नहीं हो रहा है। पूरी दुनिया में जन्म दर में भारी गिरावट देखी जा रही है। कई देशों में तो यह दर दो से घटकर एक के करीब पहुंच गई है। कुछ जगहों पर तो लोग बिल्कुल भी बच्चे पैदा नहीं कर रहे हैं।
स्मार्टफोन और डिजिटल दुनिया का बढ़ता प्रभाव
वर्षों से विशेषज्ञ इस गिरावट के लिए कुछ जाने-पहचाने कारणों को जिम्मेदार मानते रहे हैं। इनमें बढ़ती महंगाई, महंगे घर, देर से शादी होना और करियर का भारी दबाव शामिल हैं। ये कारण आज भी बहुत मायने रखते हैं। लेकिन अब शोधकर्ता एक नए पहलू की गहराई से जांच कर रहे हैं। यह पहलू स्मार्टफोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ा है। कई नई रिसर्च यह बताती हैं कि तकनीक ने हमारे आपसी रिश्तों को पूरी तरह बदल दिया है। इसका सीधा असर लोगों के परिवार बढ़ाने के फैसलों पर भी पड़ रहा है।
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4जी इंटरनेट आने के बाद तेजी से गिरी जन्मदर
अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ सिनसिनाटी के शोधकर्ता नाथन हडसन और हर्नान मोस्कोसो-बोएडो ने अमेरिका और ब्रिटेन में जन्मदर और 4जी मोबाइल इंटरनेट के विस्तार का अध्ययन किया। शोध में पाया गया कि जिन इलाकों में तेज मोबाइल इंटरनेट पहले पहुंचा, वहां जन्मदर भी जल्दी और ज्यादा तेजी से गिरनी शुरू हुई।
यह भी पढ़ें: '60 दिन में नौकरी ढूंढें या अमेरिका छोड़ें': टेक कंपनियों में छंटनी से भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स संकट में
शोधकर्ताओं का मानना है कि स्मार्टफोन ने युवाओं के मिलने-जुलने का बुनियादी तरीका ही बदल दिया है। लोग ऑनलाइन ज्यादा समय बिता रहे हैं। वहीं आमने-सामने की मुलाकातें काफी कम हो गई हैं। मेलजोल की इस कमी ने प्रजनन दर को गिराने में बड़ी भूमिका निभाई है।
सिर्फ अमेरिका नहीं, कई देशों में दिखा यही पैटर्न
यह समस्या सिर्फ अमेरिका या ब्रिटेन तक सीमित नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक जिन देशों में स्मार्टफोन का चलन तेजी से बढ़ा, वहां जन्म दर अचानक गिरने लगी। साल 2007 के बाद अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में जन्म दर में भारी कमी आई। यही वह समय था जब स्मार्टफोन और मोबाइल एप हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बनने लगे थे। कम उम्र के युवा स्मार्टफोन का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इसलिए जन्म दर में सबसे ज्यादा गिरावट भी इसी युवा वर्ग में देखी गई।
विशेषज्ञों के अनुसार इसका असर सिर्फ कम मिलने-जुलने तक सीमित नहीं है। फिनलैंड की डेमोग्राफर अन्ना रोटकिर्च मानती हैं कि युवाओं में सोशल मीडिया का बहुत ज्यादा इस्तेमाल उनके निजी जीवन को प्रभावित कर रहा है। इसके कारण जोड़ों में यौन असंतोष और दूरियां बढ़ रही हैं।
सोशल मीडिया से बढ़ रही रिश्तों में दूरियां
फिनलैंड की जनसंख्या विशेषज्ञ अन्ना रोटकिर्च का कहना है कि सोशल मीडिया का असर सिर्फ समय की बर्बादी तक सीमित नहीं है। भारी सोशल मीडिया इस्तेमाल का संबंध कई कपल्स में यौन समस्याओं से भी जुड़ा पाया गया है।
यह भी पढ़ें: अब बोलकर बनाएं और एडिट करें वीडियो, गूगल ने लॉन्च किया नया एआई टूल
उनके मुताबिक सोशल मीडिया लंबी अवधि वाले रिश्तों को बनाए रखना कठिन बना रहा है। लोग लगातार दूसरों की चमकदार जिंदगी, आर्थिक दबाव और सामाजिक तुलना देखते रहते हैं। इससे असुरक्षा और अस्थिरता की भावना बढ़ती है।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पहले से मौजूद चिंताओं, जैसे नौकरी, पैसा और घर की समस्या को और ज्यादा बढ़ा देते हैं। इससे युवाओं को लगता है कि वे अभी माता-पिता बनने के लिए तैयार नहीं हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे संकेत
यह पहली बार नहीं है जब मीडिया और तकनीक को परिवार नियोजन से जोड़ा गया हो। पहले हुए कुछ अध्ययनों में पाया गया था कि छोटे परिवार दिखाने वाले टीवी धारावाहिकों का असर महिलाओं के फैसलों पर पड़ा। एक अन्य अध्ययन में यह भी सामने आया था कि टीवी रखने वाले दंपतियों में शारीरिक संबंधों की आवृत्ति कम देखी गई।
शोधकर्ताओं का कहना है कि स्मार्टफोन का असर टीवी से कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है। वजह यह है कि स्मार्टफोन ज्यादा निजी, ज्यादा आकर्षक और दिनभर साथ रहने वाला उपकरण बन चुका है। विशेषज्ञ यह जरूर मानते हैं कि गिरती जन्म दर की अकेली वजह तकनीक नहीं है। लेकिन स्मार्टफोन ने इस बदलाव की रफ्तार को खतरनाक हद तक तेज कर दिया है।
लेकिन ऐसा सिर्फ भारत में नहीं हो रहा है। पूरी दुनिया में जन्म दर में भारी गिरावट देखी जा रही है। कई देशों में तो यह दर दो से घटकर एक के करीब पहुंच गई है। कुछ जगहों पर तो लोग बिल्कुल भी बच्चे पैदा नहीं कर रहे हैं।
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स्मार्टफोन और डिजिटल दुनिया का बढ़ता प्रभाव
वर्षों से विशेषज्ञ इस गिरावट के लिए कुछ जाने-पहचाने कारणों को जिम्मेदार मानते रहे हैं। इनमें बढ़ती महंगाई, महंगे घर, देर से शादी होना और करियर का भारी दबाव शामिल हैं। ये कारण आज भी बहुत मायने रखते हैं। लेकिन अब शोधकर्ता एक नए पहलू की गहराई से जांच कर रहे हैं। यह पहलू स्मार्टफोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ा है। कई नई रिसर्च यह बताती हैं कि तकनीक ने हमारे आपसी रिश्तों को पूरी तरह बदल दिया है। इसका सीधा असर लोगों के परिवार बढ़ाने के फैसलों पर भी पड़ रहा है।
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अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ सिनसिनाटी के शोधकर्ता नाथन हडसन और हर्नान मोस्कोसो-बोएडो ने अमेरिका और ब्रिटेन में जन्मदर और 4जी मोबाइल इंटरनेट के विस्तार का अध्ययन किया। शोध में पाया गया कि जिन इलाकों में तेज मोबाइल इंटरनेट पहले पहुंचा, वहां जन्मदर भी जल्दी और ज्यादा तेजी से गिरनी शुरू हुई।
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शोधकर्ताओं का मानना है कि स्मार्टफोन ने युवाओं के मिलने-जुलने का बुनियादी तरीका ही बदल दिया है। लोग ऑनलाइन ज्यादा समय बिता रहे हैं। वहीं आमने-सामने की मुलाकातें काफी कम हो गई हैं। मेलजोल की इस कमी ने प्रजनन दर को गिराने में बड़ी भूमिका निभाई है।
सिर्फ अमेरिका नहीं, कई देशों में दिखा यही पैटर्न
यह समस्या सिर्फ अमेरिका या ब्रिटेन तक सीमित नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक जिन देशों में स्मार्टफोन का चलन तेजी से बढ़ा, वहां जन्म दर अचानक गिरने लगी। साल 2007 के बाद अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में जन्म दर में भारी कमी आई। यही वह समय था जब स्मार्टफोन और मोबाइल एप हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बनने लगे थे। कम उम्र के युवा स्मार्टफोन का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इसलिए जन्म दर में सबसे ज्यादा गिरावट भी इसी युवा वर्ग में देखी गई।
विशेषज्ञों के अनुसार इसका असर सिर्फ कम मिलने-जुलने तक सीमित नहीं है। फिनलैंड की डेमोग्राफर अन्ना रोटकिर्च मानती हैं कि युवाओं में सोशल मीडिया का बहुत ज्यादा इस्तेमाल उनके निजी जीवन को प्रभावित कर रहा है। इसके कारण जोड़ों में यौन असंतोष और दूरियां बढ़ रही हैं।
सोशल मीडिया से बढ़ रही रिश्तों में दूरियां
फिनलैंड की जनसंख्या विशेषज्ञ अन्ना रोटकिर्च का कहना है कि सोशल मीडिया का असर सिर्फ समय की बर्बादी तक सीमित नहीं है। भारी सोशल मीडिया इस्तेमाल का संबंध कई कपल्स में यौन समस्याओं से भी जुड़ा पाया गया है।
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उनके मुताबिक सोशल मीडिया लंबी अवधि वाले रिश्तों को बनाए रखना कठिन बना रहा है। लोग लगातार दूसरों की चमकदार जिंदगी, आर्थिक दबाव और सामाजिक तुलना देखते रहते हैं। इससे असुरक्षा और अस्थिरता की भावना बढ़ती है।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पहले से मौजूद चिंताओं, जैसे नौकरी, पैसा और घर की समस्या को और ज्यादा बढ़ा देते हैं। इससे युवाओं को लगता है कि वे अभी माता-पिता बनने के लिए तैयार नहीं हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे संकेत
यह पहली बार नहीं है जब मीडिया और तकनीक को परिवार नियोजन से जोड़ा गया हो। पहले हुए कुछ अध्ययनों में पाया गया था कि छोटे परिवार दिखाने वाले टीवी धारावाहिकों का असर महिलाओं के फैसलों पर पड़ा। एक अन्य अध्ययन में यह भी सामने आया था कि टीवी रखने वाले दंपतियों में शारीरिक संबंधों की आवृत्ति कम देखी गई।
शोधकर्ताओं का कहना है कि स्मार्टफोन का असर टीवी से कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है। वजह यह है कि स्मार्टफोन ज्यादा निजी, ज्यादा आकर्षक और दिनभर साथ रहने वाला उपकरण बन चुका है। विशेषज्ञ यह जरूर मानते हैं कि गिरती जन्म दर की अकेली वजह तकनीक नहीं है। लेकिन स्मार्टफोन ने इस बदलाव की रफ्तार को खतरनाक हद तक तेज कर दिया है।