मोबाइल सेफ्टी: चलाते-चलाते फोन से निकलने लगा धुआं, फिर लगी आग; अचानक से स्मार्टफोन क्यों बन जाते हैं खतरा?
ग्वालियर के एक आई क्लिनिक में मरीज अपनी बारी का इंतजार कर रहा था, तभी अचानक उसका स्मार्टफोन धुआं छोड़ने लगा और देखते ही देखते उसमें आग लग गई। इस घटना ने स्मार्टफोन की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई यूजर्स के मन में यह सवाल है कि आखिर फोन में अचानक आग क्यों लग जाती है और इससे बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? आइए जानते हैं उन पांच प्रमुख वजहों के बारे में, जिनसे आपका स्मार्टफोन आग का गोला बन सकता है।
विस्तार
आज हम पूरी तरह स्मार्टफोन पर निर्भर हो गए हैं। कॉल करने से लेकर वीडियो देखने और ऑनलाइन काम करने तक, दिनभर में न जानें कितनी बार फोन की जरूरत पड़ती है, लेकिन यही फोन कभी-कभी यूजर के लिए खतरा बन जाता है।
ग्वालियर के एक आई क्लिनिक में ऐसा ही मामला सामने आया, जहां वेटिंग एरिया में अपनी बारी का इंतजार कर रहे एक शख्स के मोबाइल से अचानक धुआं निकलने लगा और देखते ही देखते उसमें आग लग गई। घटना के बाद क्लिनिक में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, स्मार्टफोन में आग लगने की यह कोई पहली घटना नहीं है। अलग-अलग कंपनियों के फोन में इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं।
स्मार्टफोन में आग लगने की एक बड़ी वजह लिथियम-आयन बैटरी में होने वाली थर्मल रनअवे (Thermal Runaway) प्रक्रिया हो सकती है। आखिर यह प्रक्रिया क्या है, फोन में इसकी शुरुआत कैसे होती है और किन वजहों से स्मार्टफोन आग पकड़ सकता है? आइए समझते हैं।
थर्मल रनअवे क्या होता है ?
आईफोन हो या एंड्रॉयड, किसी भी स्मार्टफोन में आग लगने या उसके फटने की मुख्य वजह थर्मल रनअवे मानी जाती है। जो कि एक वैज्ञानिक प्रक्रिया होती है। यह तब होती है, जब फोन के अंदर लगी लिथियम-आयन बैटरी अत्यधिक गर्म हो जाती है या उसमें अचानक कोई इंटरनल शॉर्ट सर्किट हो जाता है। देखिए बैटरी का एक फिक्सिड टेम्परेचर यानी की निश्चित तापमान होता है और जब यह टेम्परेचर निश्चित सीमा पार कर जाता है, तो उसमें मौजूद केमिकल्स में अनियंत्रित चेन-रिएक्शन शुरू हो जाती है, जो धुएं, विस्फोट और भयंकर आग का रूप ले लेती है।
किन वजहों से स्मार्टफोन में लग सकती है आग?
हाथ में रखे एंड्रॉयड या आईफोन में ओवरहीटिंग और आग लगने के कई कारण होते हैं, जिनमें से पांच के बारे में नीचे जिक्र किया गया है...
1. लोकल या नकली चार्जर का इस्तेमाल
बिना प्रमाणित (नॉन-सर्टिफाइड) या घटिया क्वालिटी के चार्जर और केबल का उपयोग करना सबसे बड़ा खतरा हो सकता है। ये चार्जर वोल्टेज को सही तरीके से कंट्रोल नहीं कर पाते, जिससे फोन में ओवरचार्जिंग और शॉर्ट सर्किट का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
2. बैटरी में डैमेज
अक्सर स्मार्टफोन के हाथ से गिरने, दबे रहने या उसमें किसी नुकीली चीज के चुभने की वजह से बैटरी के अंदर लगा थिन सेपरेटर टूट जाता है। इसके टूटते ही दोनों इलेक्ट्रोड आपस में टकराते हैं और तुरंत शॉर्ट सर्किट होकर आग लग जाती है।
3. ओवरहीटिंग मुख्य कारण
यह एक आम वजह है, जिसके बारे में ज्यादातर लोगों को पता होता है। इसके बावजूद कई लोग रात में फोन को तकिए या बिस्तर के नीचे रखकर सो जाते हैं या उसे लंबे समय तक चार्जिंग पर लगा छोड़ देते हैं। ऐसा करने से फोन की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और उसका तापमान तेजी से बढ़ सकता है। बैटरी का तापमान सुरक्षित सीमा से ज्यादा होने पर यह स्थिति यूजर के लिए खतरा पैदा कर सकती है।
4. चार्जिंग के दौरान भारी काम
फोन को चार्जिंग पर लगाकर हाई-ग्राफिक्स वाले गेम खेलना, 4K वीडियो स्ट्रीम करना या घंटों रील देखना फोन के प्रोसेसर और बैटरी दोनों को एक साथ अत्यधिक गर्म कर देता है, जिससे ओवरहीटिंग की संभावना बढ़ जाती है।
6. मैन्युफैक्चरिंग या इंटरनल डिफेक्ट
बहुत ही दुर्लभ मामलों में कंपनी की असेंबली या बैटरी निर्माण के दौरान आई किसी तकनीकी खामी या स्पार्क के वजह से भी मोबाइल में आग लग सकती है।
सुरक्षा के लिए क्या करें?
ग्वालियर जैसे घटनाएं सबक देती हैं कि मोबाइल का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। एक्सपर्ट्स कहते हैं हमेशा ओरिजिनल चार्जर का ही उपयोग करें, फोन को अत्यधिक गर्म होने से बचाएं और अगर बैटरी फूली हुई या बहुत ज्यादा गर्म लगे, तो तुरंत अधिकृत सर्विस सेंटर पर जांच कराएं।