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मारपीट, सुसाइड और अब बैड टच: रोबोट क्यों करने लगे हैं इंसानों जैसी हरकत, जब मशीन अपराध करे तो कौन होगा दोषी?

Thu, 15 Oct 2026 03:07 PM IST
कुलदीप शर्मा टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुलदीप शर्मा Updated Thu, 15 Oct 2026 03:07 PM IST
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Robot Assaults Teen in Germany Who Holds Criminal Liability for Machine Misconduct
प्रतीकात्मक एआई जनरेटेड इमेज - फोटो : AI GENERATED

विस्तार

जर्मनी के कोलोन शहर से एक बेहद हैरान करने वाली और अनोखी घटना सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया में रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सुरक्षा पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। दरअसल जर्मन पुलिस ने एक ह्यूमेनॉइड रोबोट को अपने कब्जे ले लिया है. इस रोबोट पर एक सोलह साल की नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इस घटना के बाद से दुनिया भर के कानूनविदों, तकनीकी विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच यह बहस छिड़ गई है कि आखिर इस तरह के मामलों में कानूनी जिम्मेदारी किसकी बनती है। क्या कोई मशीन अपने किए गए कृत्यों के लिए खुद सजा पाने की हकदार हो सकती है, या फिर इसके लिए पूरी तरह से उस मशीन को संचालित करने वाला इंसान ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा?
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यह बात किसी से छिपी नहीं है कि आज की इस आधुनिक दुनिया में महिलाओं और बच्चियों के लिए सुरक्षित माहौल तेजी से खत्म होता जा रहा है। यूनिसेफ के आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर में लगभग 37-करोड़ से अधिक महिलाएं और बच्चियां अपने अठारह साल की उम्र पूरी होने से पहले ही बलात्कार या यौन हिंसा जैसी दर्दनाक और गंभीर घटनाओं का शिकार बन चुकी हैं। इन आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि बच्चों के खिलाफ होने वाले अधिकांश यौन अपराध उनकी किशोरावस्था के दौरान होते हैं जिसमें चौदह से सत्रह वर्ष की आयु के बीच का बहुत बड़ा आंकड़ा है। ऐसे समय में जब समाज पहले से ही लड़कियों के लिए काफी असुरक्षित बना हुआ है, तब इस तरह के आधुनिक रोबोट्स का समाज में आना और इस प्रकार की हरकतें करना स्थिति को और अधिक भयानक तथा चिंताजनक बना रहा है।
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क्या है जर्मनी का पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार यह पूरी घटना बीते रविवार यानी 11 अक्टूबर को रात के समय एक फास्ट-फूड रेस्टोरेंट के बाहर घटी थी। रोबोट ने कथित तौर पर सड़क पर खड़ी उस नाबालिग लड़की के पास जाकर न सिर्फ उसको गलत तरीके से छुआ बल्कि उसकी तरफ अश्लील इशारे और हरकतें भी कीं। जिस रोबोट पर यह आरोप लगा है वह चीन में निर्मित'यूनिट्री आर वन एयर'नाम का रोबोट है जिसकी ऊंचाई लगभग चार फीट है। घटना के वक्त रोबोट ने मशहूर मार्वल सुपरहीरो 'आयरन मैन' जैसी पोशाक पहन रखी थी। इस रोबोट की भारतीय बाजार के हिसाब से कीमत करीब 5 लाख 30 हजार रुपये बताई जा रही है. घटना के समय रोबोट का 16 साल का मालिक तथा उसका एक 19 साल का साथी भी वहीं मौजूद थे।
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इस अजीबोगरीब घटना के सामने आने के बाद जर्मन पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उस रोबोट को एक कार की डिग्गी से बरामद कर लिया और उसे अपने कब्जे में ले लिया है। इसके साथ ही मौके से दो मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। इस मामले की खास बात यह है कि इस पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया गया था और इसकी लाइव-स्ट्रीमिंग भी की जा रही थी। इसकी वजह से पुलिस के लिए सबूत जुटाना थोड़ा आसान हो गया। इस समय जर्मन पुलिस और जांच अधिकारी इस बात की गहराई से छानबीन कर रहे हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में इस रोबोट ने इस प्रकार की हरकतें कीं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस रोबोट को किसी इंसान द्वारा दूर से कंट्रोल किया जा रहा था, या फिर इसे पहले से ही इस तरह की हरकत करने के लिए कोड या प्रोग्राम किया गया था।

पहले कब-कब रोबोट हुए अनियंत्रित?

चिंता की बात यह है कि जर्मनी का ये मामला कोई पहला मौका नहीं है जब किसी रोबोट ने अपने तय दायरे से बाहर जाकर इंसानों के लिए खतरा पैदा किया हो या किसी को नुकसान पहुंचाया हो। पिछले कुछ वर्षों में रोबोटों के नियंत्रण से बाहर होने और इंसानों को शारीरिक नुकसान पहुंचाने के कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जिन्होंने समय-समय पर तकनीकी सुरक्षा और जवाबदेही पर गंभीर बहस छेड़ी है। 
  • जनवरी 2015: स्विट्जरलैंड में पुलिस ने 'रैंडम डार्कनेट शॉपर' नामक एक ऑटोमेटेड शॉपिंग बॉट को जब्त किया था, जिसने ऑनलाइन डार्क वेब मार्केटप्लेस से अवैध रूप से 10 एक्स्टसी टैबलेट खरीद ली थीं। यह बॉट एक आर्ट एग्जीबिशन का हिस्सा था जिसे बिटकॉइन का बजट देकर रैंडम चीजें खरीदने के लिए प्रोग्राम किया गया था. हालांकि बाद में आर्टिस्ट और बॉट पर कोई कानूनी चार्ज नहीं लगाया गया।
  • सितंबर 2016: अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक शॉपिंग मॉल के अंदर लगे सुरक्षा गार्ड रोबोट ने एक छोटे बच्चे को ठीक से पहचान न पाने की वजह से नीचे गिरा दिया था, जो कि जानबूझकर किए गए हमले के बजाय एक तकनीकी सेंसर की विफलता का मामला था।
  • मार्च 2024: सऊदी अरब की राजधानी रियाद में एक लाइव प्रेजेंटेशन के दौरान एक ह्यूमेनॉइड रोबोट ने एक महिला टीवी रिपोर्टर के साथ छेड़खानी करने की कोशिश की थी. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था और इसमें रोबोट का हाथ रिपोर्टर की पीठ या निचले हिस्से को छूता हुआ दिखाई दिया था।
  • दिसंबर 2025: रूस के मॉस्को में शतरंज खेलने वाले एक रोबोट ने मैच के दौरान एक छोटे बच्चे की उंगली पकड़कर तोड़ दी थी, जिसे रोबोट और इंसानों के बीच सीधे संपर्क के दौरान होने वाले शारीरिक नुकसान के एक बड़े उदाहरण के रूप में देखा गया था।




भविष्य को लेकर यूरोपोल ने क्या कहा?

भविष्य को लेकर यूरोपीय संघ की कानून प्रवर्तन एजेंसी 'यूरोपोल' ने अपनी एक रिपोर्ट में यह चेतावनी दी है कि साल 2035 तक रोबोटिक्स और मानवरहित प्रणालियां अपराध और पुलिसिंग के तरीकों को पूरी तरह से बदल सकती हैं। इस रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि भविष्य में अपराधी उन रोबोटों का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं जो आजकल बुजुर्गों या अन्य जरूरतमंद व कमजोर लोगों की देखभाल के लिए बनाए जा रहे हैं। ऐसे में ये रोबोट्स लोगों की बेहद निजी और गोपनीय जानकारियों को चुराकर लीक कर सकते हैं या फिर देखभाल पाने वाले सीधे उपभोक्ताओं को मानसिक रूप से प्रभावित या नियंत्रित कर सकते हैं। इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जांच एजेंसियों को भविष्य में ऐसे मामलों का सामना करना पड़ सकता है जहां किसी अपराध को अंजाम देने के लिए रोबोट का इस्तेमाल किया गया हो और पुलिस के लिए यह तय करना मुश्किल हो जाए कि वह मशीन रिमोट से संचालित थी, हैक की गई थी या अपने प्रोग्राम के तहत काम कर रही थी।



मशीनों के भविष्य पर शोधकर्ता का अनुमान

वैसे तो ये भविष्य की डरावनी संभावनाओं वाले सबसे खराब परिदृश्य हैं और यह भी मुमकिन है कि इनमें से कुछ बातें थोड़ी बढ़ा-चढ़ाकर कही गई हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि तकनीक पूरी तरह सुरक्षित है। साल 2016 में 'द वीक' पत्रिका में 'द फ्यूचर लैबोरेटरी' की शोधकर्ता ट्रेसी फॉलोस के एक अनुमान को छापा गया था, जिसमें यह कहा गया था कि आने वाले साल 2040 तक मशीनें इंसानों से भी ज्यादा अपराध कर सकती हैं। उस रिपोर्ट में यह संभावना जताई गई थी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का विकास रोबोट्स को खुद अपनी मर्जी से आपराधिक गतिविधियों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने में सक्षम बना सकता है। हालांकि यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स के कॉग्निटिव साइंस सेंटर के निदेशक रॉन क्रिसले ने इसका विरोध करते हुए तर्क दिया था कि रोबोट्स के पास वे असली इरादे, भावनाएं और उद्देश्य नहीं होते हैं, जिन्हें आमतौर पर इंसान अपने किसी भी काम के पीछे रखता है।

किसकी जिम्मेदारी होगी तय?

यदि इनमें से कोई भी वैज्ञानिक आकलन या भविष्यवाणी भविष्य में सच साबित होती है तो सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इसके गंभीर परिणामों और सजा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? रोबोटों की वजह से बढ़ती इन अजीब घटनाओं ने दुनिया भर के कानूनविदों के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या किसी रोबोट को किसी आपराधिक कृत्य के लिए सीधे तौर पर कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। खासकर तब जब उसकी शारीरिक हरकतें किसी संगीन यौन दुराचार या अपराध का रूप ले लें? वर्तमान समय की कानूनी प्रणालियों के अनुसार जब तक कोई मशीन इंसानों की तरह सोच-समझकर फैसला लेने में सक्षम नहीं बनती, तब तक उसके द्वारा किए गए किसी भी कार्य के लिए किसी न किसी इंसान को ही जवाबदेह मानना ही एकमात्र व्यावहारिक और तार्किक विकल्प बचता है।

कानून व्याख्याता ने क्या बताया?

इस विषय पर यूनिवर्सिटी ऑफ कम्ब्रिया में कानून की व्याख्याता रहीं एन थानाराज ने अपने एक लेख में बहुत स्पष्ट रूप से समझाया है कि कानूनी जिम्मेदारी हमेशा उन्हीं संस्थाओं पर डाली जाती है जिन्हें कानून की नजर में एक वैध व्यक्ति का दर्जा प्राप्त होता है। उनके अनुसार इंसानों को तो कानूनन व्यक्ति माना ही जाता है, इसके अलावा कुछ बड़ी कंपनियों और चुनिंदा संगठनों को भी कानूनी अधिकार और जिम्मेदारियां दी जाती हैं, ताकि गलती होने पर उन पर कानूनी कार्रवाई की जा सके। लेकिन इसके उलट वर्तमान कानूनों में रोबोट्स को किसी भी तरह से कानूनी व्यक्ति के रूप में मान्यता नहीं दी गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि कोई भी रोबोट सिर्फ इसलिए किसी अदालत में अपराधी घोषित करके सजा नहीं पा सकता क्योंकि उसने कोई ऐसा काम किया है जो इंसानों द्वारा किए जाने पर एक गंभीर अपराध माना जाता।


जानकार ने बताए कानून

इसके अलावा प्रसिद्ध कानूनी विद्वान डेविड युराटिच ने भी इस बात पर जोर दिया है कि आधुनिक आपराधिक कानून हमेशा दो सबसे महत्वपूर्ण तत्वों की मांग करता है, जिसमें पहला होता है 'निषेध कार्य' यानी गैरकानूनी काम और दूसरा होता है 'अपराध का दोषी मन' जिसे कानूनी भाषा में 'मेंस रिया' कहा जाता है। कानून के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को सजा देने से पहले यह साबित करना जरूरी होता है कि उसने जानबूझकर नुकसान पहुंचाया था या उसे अपने काम के बुरे परिणामों की पूरी जानकारी थी। चूंकि एक रोबोट सिर्फ प्रोग्राम किए गए निर्देशों के आधार पर फिजीकली रिएक्ट करता है इसलिए उसके अंदर इंसानों जैसी कोई आपराधिक मंशा या इरादा साबित करना असंभव है। जर्मनी की इस हालिया घटना में भी असली मकसद यही पता लगाना है कि क्या उस रोबोट को किसी इंसान ने जानबूझकर गलत काम के लिए उकसाया था. और अगर ऐसा साबित होता है तो सजा उस इंसान को ही मिलेगी न कि उस इंसानों द्वारा बनाई गई बेजान मशीन को.
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