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अब बिना ट्रूकॉलर होगी अनजान कॉल की पहचान: सरकार जल्द लाने जा रही नया सिस्टम, क्या है यह और कब से होगा लागू?
Thu, 15 Oct 2026 11:57 AM IST
जागृति शुक्ला
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जागृति शुक्ला
Updated Thu, 15 Oct 2026 11:57 AM IST
सार
रोज-रोज आने वाली अनजान कॉल्स, फर्जी स्पैम कॉल्स और ऑनलाइन फ्रॉड से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है। भारत सरकार ने देश की सभी टेलीकॉम कंपनियों को नवंबर 2026 से कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) यानी कॉलर आईडी सिस्टम लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत अनजान नंबर से कॉल आने पर भी फोन की स्क्रीन पर कॉल करने वाले का नाम और नंबर दिखाई देगा। आखिर क्या है यह सिस्टम और नवंबर से इसमें क्या बदलाव होने जा रहा है? आइए, सरकार के इस निर्देश के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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एक नवंबर से लागू होगा कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन सिस्टम
- फोटो : एआई जनरेटेड
विस्तार
फोन पर अनजान नंबर से कॉल आने पर सबसे पहले यही सवाल आता है कि आखिर फोन किसका है। कई बार जरूरी कॉल भी अनजान नंबर से आती है, तो कभी स्पैम या धोखाधड़ी वाली कॉल की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। अब इस परेशानी को कम करने के लिए भारत सरकार ने नया कदम उठाया है। सरकार ने टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स (TSPs) को एक नवंबर 2026 से कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) सेवा अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश दिया है। इसमें कॉल आने पर फोन की स्क्रीन पर कॉल करने वाले का नंबर और नाम दोनों डिफॉल्ट रूप से दिखेंगे। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अनजान नंबरों से कॉल आना बंद हो जाएगा। बल्कि इस सिस्टम का मकसद कॉल करने वाले की पहचान करना आसान बनाना है। यानी की जिस भी अनजान नंबर से कॉल आएगी, उस व्यक्ति की पहचान करना आसान हो सकता है।
एक नवंबर से कैसे बदलेगा कॉल करने का तरीका?
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एक नवंबर से कैसे बदलेगा कॉल करने का तरीका?
- जियो, एयरटेल और वीआई (Vi) जैसे प्रमुख टेलीकॉम ऑपरेटर्स के नेटवर्क्स पर कॉलिंग का अनुभव पूरी तरह बदलने जा रहा है। सरकार की ओर से तय किए गए कड़े नियमों के अनुपालन में, सभी टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को एक नवंबर से CNAP (Calling Name Presentation) सिस्टम को अपने नेटवर्क पर अनिवार्य रूप से लागू करना होगा।
- यहां यह समझना जरूरी है कि इस सिस्टम को सरकार खुद सीधे तौर पर लॉन्च नहीं कर रही है, बल्कि सरकार के दिशा-निर्देशों के बाद टेलीकॉम कंपनियों को अपने कॉल आइडेंटिफिकेशन सिस्टम में यह बड़ा बदलाव करना है। तकनीकी रूप से इसे सुचारू बनाने के लिए फिलहाल कंपनियों की ओर से इसे कुछ प्रमुख शहरों और टेलीकॉम सर्कल्स में चरणबद्ध तरीके से (सर्किल-वाइज) टेस्ट और लागू किया जा रहा है, ताकि एक नवंबर की समय-सीमा तक नियम अनिवार्य होने पर इसे देश भर में सफलता के साथ उतारा जा सके।
- अभी तक किसी ऐसे नंबर से कॉल आती है, जो आपके फोन में सेव नहीं है, तो स्क्रीन पर सिर्फ नंबर दिखाई देता है, जब तक आपके पास ट्र्रूकॉलर न हो। लेकिन अब आपको अनजान नंबर की पहचान करने के लिए किसी दूसरे एप की जरूरत नहीं पड़ेगी। सीएनएपी लागू होने के बाद इस व्यवस्था में बदलाव होगा। कॉल रिसीव करते समय फोन की स्क्रीन पर कॉल करने वाले का नंबर और उससे जुड़ा नाम दिखाया जाएगा। अगर नंबर आपके कॉन्टैक्ट्स में सेव है, तो आपके फोन में सेव नाम दिखाई देगा। वहीं, नंबर सेव नहीं होने पर घरेलू कॉल के लिए टेलीकॉम ऑपरेटर के रिकॉर्ड में दर्ज नाम दिखेगा।
- इससे यूजर्स को कॉल उठाने से पहले कॉलर की पहचान करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह बात जानना बेहद जरूरी है कि स्क्रीन पर नाम दिखाई देने की अपने आप में यह गारंटी नहीं होगी कि कॉल सुरक्षित है या कॉल करने वाला व्यक्ति भरोसेमंद है।
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सीएनएपी सिस्टम प्रक्रिया
- फोटो : एआई जनरेटेड
CNAP क्या है और कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
सीएनएपी का पूरा नाम कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन है। आसान तरीके से समझें तो यह एक ऐसी व्यवस्था होती है, जिसमें कॉल आने वाले का नाम भी दिखाया जाता है। फिर चाहे वह अपने आपके डिवाइस में सेव हो या नहीं।
यह सिस्टम खासतौर पर टेलीकॉम कंपनियों के सब्सक्राइबर डेटाबेस की मदद से काम करेगा। इसमें हर टेलीकॉम कंपनी को अपने ग्राहकों के नाम और मोबाइल नंबर का डेटाबेस बनाना, उसे चलाना और लगातार मेंटेन करना होगा। इसके बाद जब कोई व्यक्ति कॉल करेगा, तो कॉल रिसीव करने वाला टेलीकॉम ऑपरेटर संबंधित डेटाबेस से नाम हासिल करके उसे फोन की स्क्रीन पर दिखाएगा।
यह कुछ इस तरह से काम करेगा...
कैसे हो रहा है इसका विस्तार ?
अब तक किसी भी अनजान कॉलर का नाम जानने के लिए हमें ट्रूकॉलर या किसी अन्य थर्ड-पार्टी एप्स का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन अब टेलीकॉम कंपनियों के जरिए यह सुविधा सीधे नेटवर्क पर मिलेगी। नेटवर्क पर लोड और डेटाबेस की सटीकता परखने के लिए ऑपरेटर्स ने चुनिंदा सर्कल्स में इसके पायलट रन और शुरुआती चरण की शुरुआत कर दी है, जिसे नियम अनिवार्य होने पर जल्द ही पैन-इंडिया स्तर पर फैलाया जाएगा।
नेटवर्क लेवल पर पहचान: जब भी आपको कॉल आएगी, तो टेलीकॉम ऑपरेटर का सिस्टम बैकएंड डेटाबेस से मिलान करके तुरंत स्क्रीन पर कॉलर का असली नाम फ्लैश कर देगा।
थर्ड-पार्टी एप की छुट्टी: चूंकि यह बदलाव सीधे टेलीकॉम कंपनियों के नेटवर्क्स पर हो रहा है, इसलिए यूजर्स को किसी बाहरी एप पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। यह पूरी तरह सिम खरीदते वक्त दिए गए आधिकारिक केवाईसी डेटा पर आधारित होगा।
क्यों जरूरी है यह कदम?
आम आदमी को देखते हुए बात करें तो यह नियम कुछ इसलिए जरूरी हो सकता है...
CNAP लागू करने का फैसला क्यों लिया गया?
CNAP को लागू करने का निर्देश पिछले कुछ महीनों में 4G और 5G नेटवर्क पर किए गए ट्रायल्स के बाद आया है। इसके पीछे टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) की सिफारिशें भी अहम रही हैं।
ट्राई ने फरवरी 2024 में इस व्यवस्था को लेकर सिफारिशें दी थीं। इसके बाद अक्तूबर 2025 में ट्राई ने दूरसंचार विभाग (DoT) के उस प्रस्ताव पर सहमति जताई, जिसमें CNAP को डिफॉल्ट रूप से उपलब्ध कराने की बात कही गई थी।
अब सरकार ने टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को एक नवंबर 2026 से इसे अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश दिया है।
सीएनएपी का पूरा नाम कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन है। आसान तरीके से समझें तो यह एक ऐसी व्यवस्था होती है, जिसमें कॉल आने वाले का नाम भी दिखाया जाता है। फिर चाहे वह अपने आपके डिवाइस में सेव हो या नहीं।
यह सिस्टम खासतौर पर टेलीकॉम कंपनियों के सब्सक्राइबर डेटाबेस की मदद से काम करेगा। इसमें हर टेलीकॉम कंपनी को अपने ग्राहकों के नाम और मोबाइल नंबर का डेटाबेस बनाना, उसे चलाना और लगातार मेंटेन करना होगा। इसके बाद जब कोई व्यक्ति कॉल करेगा, तो कॉल रिसीव करने वाला टेलीकॉम ऑपरेटर संबंधित डेटाबेस से नाम हासिल करके उसे फोन की स्क्रीन पर दिखाएगा।
यह कुछ इस तरह से काम करेगा...
- डिफॉल्ट रूप से दिखेगा नाम: जब भी कोई आपको कॉल करेगा, तो टेलीकॉम ऑपरेटर्स का सिस्टम बैकएंड में मौजूद आपके और कॉलर के डेटाबेस से मिलान करके तुरंत स्क्रीन पर असली नाम फ्लैश कर देगा। केवल 4G और 5G नेटवर्क के लिए है। कॉल आने पर बाय डिफॉल्ट एक्टिव हो जाएगा और केवाईसी आधारित असली नाम दिखेगा। अगर कोई यूजर इस सेवा का लाभ नहीं उठाना चाहता है, तो उसे टेलीकॉम ऑपरेटर के जरिए इसे बंद कराने का विकल्प भी मिल सकता है।
- थर्ड-पार्टी एप्स का झंझट खत्म: इसके लिए आपको अपने फोन में कोई भी बाहर काएपप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि यह सीधे आपके टेलीकॉम ऑपरेटर (जैसे जियो, एयरटेल, वोडा) के जरिए काम करेगा।
- सटीक पहचान: चूंकि यह सिस्टम मोबाइल कनेक्शन लेते वक्त दिए गए आधिकारिक दस्तावेजों (KYC) पर आधारित होगा, इसलिए कॉलर की पहचान पूरी तरह पुख्ता और भरोसेमंद होगी।
- अंतरराष्ट्रीय कॉल पर: इतना ही नहीं, अगर देश के बाहर से किसी का फाेन आता है, तो स्क्रीन पर कॉलर के नाम की जगह International Call लिखा दिखाई देगा।
कैसे हो रहा है इसका विस्तार ?
अब तक किसी भी अनजान कॉलर का नाम जानने के लिए हमें ट्रूकॉलर या किसी अन्य थर्ड-पार्टी एप्स का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन अब टेलीकॉम कंपनियों के जरिए यह सुविधा सीधे नेटवर्क पर मिलेगी। नेटवर्क पर लोड और डेटाबेस की सटीकता परखने के लिए ऑपरेटर्स ने चुनिंदा सर्कल्स में इसके पायलट रन और शुरुआती चरण की शुरुआत कर दी है, जिसे नियम अनिवार्य होने पर जल्द ही पैन-इंडिया स्तर पर फैलाया जाएगा।
नेटवर्क लेवल पर पहचान: जब भी आपको कॉल आएगी, तो टेलीकॉम ऑपरेटर का सिस्टम बैकएंड डेटाबेस से मिलान करके तुरंत स्क्रीन पर कॉलर का असली नाम फ्लैश कर देगा।
थर्ड-पार्टी एप की छुट्टी: चूंकि यह बदलाव सीधे टेलीकॉम कंपनियों के नेटवर्क्स पर हो रहा है, इसलिए यूजर्स को किसी बाहरी एप पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। यह पूरी तरह सिम खरीदते वक्त दिए गए आधिकारिक केवाईसी डेटा पर आधारित होगा।
क्यों जरूरी है यह कदम?
आम आदमी को देखते हुए बात करें तो यह नियम कुछ इसलिए जरूरी हो सकता है...
- फर्जी कॉल्स पर लगाम: सर्किल-वाइज टेस्टिंग के बाद जब यह पैन-इंडिया स्तर पर पूरी तरह लागू होगा, तो बैंक अधिकारी या सरकारी कर्मचारी बनकर ठगी करने वाले अपराधियों के लिए अपनी पहचान छिपाना मुश्किल हो सकता है।
- प्राइवेसी की सुरक्षा: सरकार के नियमों के तहत ऑपरेटर्स को कड़े निर्देश हैं कि कॉल कटते ही कॉलर का नाम स्क्रीन या डेटा से हट जाना चाहिए, जिससे यूजर्स की गोपनीयता सुरक्षित रहे।
- तनाव से मुक्ति: बार-बार आने वाली स्पैम कॉल्स से अब यूजर्स को शांति मिल सकती है, क्योंकि स्क्रीन पर नाम देखकर ही फोन उठाने का फैसला लिया जा सकेगा।
CNAP लागू करने का फैसला क्यों लिया गया?
CNAP को लागू करने का निर्देश पिछले कुछ महीनों में 4G और 5G नेटवर्क पर किए गए ट्रायल्स के बाद आया है। इसके पीछे टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) की सिफारिशें भी अहम रही हैं।
ट्राई ने फरवरी 2024 में इस व्यवस्था को लेकर सिफारिशें दी थीं। इसके बाद अक्तूबर 2025 में ट्राई ने दूरसंचार विभाग (DoT) के उस प्रस्ताव पर सहमति जताई, जिसमें CNAP को डिफॉल्ट रूप से उपलब्ध कराने की बात कही गई थी।
अब सरकार ने टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को एक नवंबर 2026 से इसे अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश दिया है।