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Solar Panel: रूफटॉप सोलर लगवाना हो सकता है महंगा! सरकार के नए नियमों का आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर?
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Tue, 02 Jun 2026 06:31 PM IST
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सार
Rooftop Solar Panels: 1 जून से सरकार ने सोलर पैनल के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। अब सब्सिडी पाने के लिए पूरी तरह से भारत में बने पैनल और सेल का इस्तेमाल जरूरी होगा। सरकार ने 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने के लिए नए नियम लागू किए हैं। जानिए क्या नए नियमों से घर में सोलर पैनल लगवाने का खर्च बढ़ सकता है?
सोलर पैनल
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
भारत में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 1 जून से नए नियम लागू कर दिए हैं। इन नियमों का मकसद घरेलू सोलर मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करना और सोलर सेल के आयात के लिए, खासकर चीन पर निर्भरता कम करना है। हालांकि, इस बदलाव का असर रूफटॉप सोलर सिस्टम की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
सरकार ने उन सोलर पैनलों के लिए नियम सख्त कर दिए हैं जिन्हें सरकारी योजनाओं के लाभ के तहत बेचा जाता है। अब पीएम सूर्य घर योजना के तहत सब्सिडी और नेट मीटरिंग का फायदा पाने के लिए केवल ALMM लिस्ट-2 में शामिल कंपनियों के सोलर पैनल ही मान्य होंगे।
सिर्फ इतना ही नहीं, इन पैनलों में इस्तेमाल होने वाले सोलर सेल भी सरकार से मंजूरी प्राप्त भारतीय निर्माताओं के होने चाहिए। यह नियम सिर्फ घरों पर नहीं, बल्कि कमर्शियल और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स पर भी लागू होंगे।
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इस हिसाब से 3kW सिस्टम लगवाने पर लगभग 9,000 रुपये और 5kW सिस्टम पर करीब 15,000 रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। सरकारी मंजूरी वाले पैनलों की मांग बढ़ने पर कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना भी जताई जा रही है। वहीं सब्सिडी लेने की प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच भी पहले से अधिक सख्त हो सकती है।
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इसके अलावा कई राज्य सरकारें अतिरिक्त प्रोत्साहन भी देती हैं। योजना के तहत हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ भी उपलब्ध है।
सरकार ने उन सोलर पैनलों के लिए नियम सख्त कर दिए हैं जिन्हें सरकारी योजनाओं के लाभ के तहत बेचा जाता है। अब पीएम सूर्य घर योजना के तहत सब्सिडी और नेट मीटरिंग का फायदा पाने के लिए केवल ALMM लिस्ट-2 में शामिल कंपनियों के सोलर पैनल ही मान्य होंगे।
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सिर्फ इतना ही नहीं, इन पैनलों में इस्तेमाल होने वाले सोलर सेल भी सरकार से मंजूरी प्राप्त भारतीय निर्माताओं के होने चाहिए। यह नियम सिर्फ घरों पर नहीं, बल्कि कमर्शियल और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स पर भी लागू होंगे।
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क्या है सरकार की योजना?
भारत हर साल करीब 200 गीगावाट सोलर मॉड्यूल बनाने की क्षमता रखता है, लेकिन सोलर सेल उत्पादन अभी लगभग 30 गीगावाट तक ही सीमित है। इसका मतलब है कि देश में बनने वाले कई सोलर पैनल अभी भी आयातित सेल्स पर निर्भर हैं। सरकार इस अंतर को खत्म कर घरेलू उत्पादन बढ़ाना चाहती है।यह भी पढ़ें: Airtel लाया ₹99 का OTT प्लान, Sony LIV समेत 20 से ज्यादा एप्स का मिलेगा एक्सेस
उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?
नए नियमों के बाद रूफटॉप सोलर सिस्टम की लागत बढ़ सकती है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का अनुमान है कि प्रति किलोवाट इंस्टॉलेशन लागत में करीब 3,000 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है।इस हिसाब से 3kW सिस्टम लगवाने पर लगभग 9,000 रुपये और 5kW सिस्टम पर करीब 15,000 रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। सरकारी मंजूरी वाले पैनलों की मांग बढ़ने पर कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना भी जताई जा रही है। वहीं सब्सिडी लेने की प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच भी पहले से अधिक सख्त हो सकती है।
भारतीय सोलर पैनलों की मांग बढ़ेगी
भारत को हर साल करीब 50 गीगावाट नए सोलर पैनलों की जरूरत होती है, जबकि घरेलू आपूर्ति फिलहाल 25 से 30 गीगावाट तक ही है। ऐसे में नए नियमों के बाद भारतीय सोलर उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ सकती है। इससे इस क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, हालांकि शुरुआती दौर में सप्लाई की कमी और कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है।यह भी पढ़ें: रील्स में उलझे युवा, शॉपिंग में महिलाएं आगे! स्मार्टफोन पर सबसे ज्यादा क्या कर रहे हैं भारतीय?
सब्सिडी से राहत की उम्मीद
कीमत बढ़ने के बावजूद सरकार की सब्सिडी योजना उपभोक्ताओं को राहत देती रहेगी। पीएम सूर्य घर योजना के तहत 1kW सिस्टम पर 30,000 रुपये, 2kW पर 60,000 रुपये और 3kW या उससे अधिक क्षमता वाले सिस्टम पर 78,000 रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है।इसके अलावा कई राज्य सरकारें अतिरिक्त प्रोत्साहन भी देती हैं। योजना के तहत हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ भी उपलब्ध है।