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Search Engine: गूगल के सामने एक और सर्च इंजन ने किया सरेंडर, रातों-रात समेटा 25 साल पुराना बिजनेस
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Sun, 03 May 2026 04:21 PM IST
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सार
Ask.com Shut Down: इंटरनेट के शुरुआती सर्च इंजन में शामिल Ask.com वर्षो बाद आधिकारिक रूप से बंद कर दिया है। कभी Ask Jeeves के नाम से जाना जाने वाला यह मशहूर प्लेटफॉर्म अपने समय में काफी लोकप्रिया था। जानिए यह लोगों को इतना पसंद क्यों था? और इसके बंद हाेने की पीछे की वजह क्या है?
25 साल बाद बंद हुआ ask.com
- फोटो : amarujala.com
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विस्तार
Search Engine Pioneers: कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर जारी संदेश में पुष्टि की है कि 1 मई 2026 से उसने अपने सर्च बिजनेस को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया है। आस्क जीव्स नाम से पहचाने जाना वाला यह प्लेटफॉर्म नेचुरल लैंग्वेज सर्च के लिए मशहूर था और इसी की वजह से लोग इसे खूब पसंद भी करते थे, लेकिन धीरे-धीरे गूगल के बढ़ते दबदबे और बदलती तकनीक के बीच कंपनी ने करीब 25 साल बाद अपना सफर खत्म कर दिया।
Google से पहले था बड़ा नाम
1990 के अंत और 2000 के शुरुआती वर्षों में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले कई यूजर्स के लिए आस्क जीव्स वेब सर्च करने की पहली जगहों में से एक था। 1997 में गैरेट ग्रुएनर और डेविड वारथेन ने इस प्लेटफॉर्म को लॉन्च किया था और उस समय यह बेहद अलग भी माना जाता था। जहां बाकी सर्च इंजन सिर्फ कीवर्ड्स पर काम करते थे, वहीं ये आस्क जीव्स यूजर्स को सारे सवालों के जवाब नेचुरली भाषा (पूरे सवाल टाइप करने) में पूछने की सुविधा देता था। यानी जैसे आज के समय में एआई चैटबॉट्स हैं, ठीक वैसा उस दौर में यह प्लेटफॉर्म हुआ करता था।
Internet Search Engine History: जीव्स बना इंटरनेट आइकन
आस्क जीव्स का सबसे खास हिस्सा उसका बटलर मैसकॉट जीव्स था। यह किरदार इतना लोकप्रिया हुआ कि डॉट-कॉम बूम का पहचान चिन्ह बन गया। टीवी और विज्ञापनों में भी दिखा और इसके बाद मेसीज थैंक्सगिविंग डे परेड तक पहुंच गया, लेकिन दुर्भाग्यवश गूगल के सामने नहीं टिक पाया। जैसे-जैसे गूगल का दबदबा बढ़ा, आस्क जीव्स का क्रेज कम होता गया।
आस्क डॉट कॉम नाम किसने दिया ?
2005 में IAC ने इसे खरीद लिया और बाद में इसका नाम बदलकर आस्क डॉट कॉम कर दिया। जिसके बाद जीव्स मैसकॉट हट गया और इसे मॉडर्न बनाने की कोशिश भी की गई, लेकिन इसकी लोकप्रियता नहीं मिल सकी। इसके बाद IAC के चेयरमैन बैरी डिलर ने खुद स्वीकार किया कि वे गूगल का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर एक भावुक संदेश के साथ वेबसाइट को बदं किया। साथ ही संदेश में उन सभी इंजीनियरों और लाखों यूजर्स का आभार व्यक्त किया गया जिन्होंने दशकों तक इस सेवा का साथ दिया। कंपनी ने अपने अंतिम नोट में कहा कि जीव्स की स्पिरिट हमेशा बरकरार रहेगी।
AI युग में आया अंत
विडंबना यह है कि आस्क.कॉम उस समय बंद हुआ जब दुनिया फिर से Conversational AI (बातचीत वाली सर्च) की ओर लौट रही है। एक ऐसी शैली जिसे जीव्स ने वर्षों पहले ही पेश कर दिया था, लेकिन आज जब एआई चैटबॉट्स, नैचुरल लैंग्वेज सर्च और स्मार्ट एआई असिसटेंट इंटरनेट सर्च का नया चेहरा बन रहा है, तो इसका अंत हो चुका है।
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Google से पहले था बड़ा नाम
1990 के अंत और 2000 के शुरुआती वर्षों में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले कई यूजर्स के लिए आस्क जीव्स वेब सर्च करने की पहली जगहों में से एक था। 1997 में गैरेट ग्रुएनर और डेविड वारथेन ने इस प्लेटफॉर्म को लॉन्च किया था और उस समय यह बेहद अलग भी माना जाता था। जहां बाकी सर्च इंजन सिर्फ कीवर्ड्स पर काम करते थे, वहीं ये आस्क जीव्स यूजर्स को सारे सवालों के जवाब नेचुरली भाषा (पूरे सवाल टाइप करने) में पूछने की सुविधा देता था। यानी जैसे आज के समय में एआई चैटबॉट्स हैं, ठीक वैसा उस दौर में यह प्लेटफॉर्म हुआ करता था।
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Internet Search Engine History: जीव्स बना इंटरनेट आइकन
आस्क जीव्स का सबसे खास हिस्सा उसका बटलर मैसकॉट जीव्स था। यह किरदार इतना लोकप्रिया हुआ कि डॉट-कॉम बूम का पहचान चिन्ह बन गया। टीवी और विज्ञापनों में भी दिखा और इसके बाद मेसीज थैंक्सगिविंग डे परेड तक पहुंच गया, लेकिन दुर्भाग्यवश गूगल के सामने नहीं टिक पाया। जैसे-जैसे गूगल का दबदबा बढ़ा, आस्क जीव्स का क्रेज कम होता गया।
आस्क डॉट कॉम नाम किसने दिया ?
2005 में IAC ने इसे खरीद लिया और बाद में इसका नाम बदलकर आस्क डॉट कॉम कर दिया। जिसके बाद जीव्स मैसकॉट हट गया और इसे मॉडर्न बनाने की कोशिश भी की गई, लेकिन इसकी लोकप्रियता नहीं मिल सकी। इसके बाद IAC के चेयरमैन बैरी डिलर ने खुद स्वीकार किया कि वे गूगल का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर एक भावुक संदेश के साथ वेबसाइट को बदं किया। साथ ही संदेश में उन सभी इंजीनियरों और लाखों यूजर्स का आभार व्यक्त किया गया जिन्होंने दशकों तक इस सेवा का साथ दिया। कंपनी ने अपने अंतिम नोट में कहा कि जीव्स की स्पिरिट हमेशा बरकरार रहेगी।
AI युग में आया अंत
विडंबना यह है कि आस्क.कॉम उस समय बंद हुआ जब दुनिया फिर से Conversational AI (बातचीत वाली सर्च) की ओर लौट रही है। एक ऐसी शैली जिसे जीव्स ने वर्षों पहले ही पेश कर दिया था, लेकिन आज जब एआई चैटबॉट्स, नैचुरल लैंग्वेज सर्च और स्मार्ट एआई असिसटेंट इंटरनेट सर्च का नया चेहरा बन रहा है, तो इसका अंत हो चुका है।
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