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Digital WellBeing: जिन्होंने दुनिया को दी AI और टेक्नोलॉजी, वही अपने बच्चों को फोन से रख रहे दूर, जानिए क्यों?
Fri, 21 Aug 2026 03:27 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Fri, 21 Aug 2026 03:27 PM IST
सार
पूरी दुनिया के बच्चों को स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की लत लगाने वाले सिलिकॉन वैली के टेक दिग्गज असल जिंदगी में बिल्कुल अलग हैं। बिल गेट्स से लेकर सैम ऑल्टमैन तक, ये दिग्गज अपने बच्चों को फोन से दूर रखकर मिट्टी में खेलने और प्रकृति से जुड़ने की सीख दे रहे हैं।
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बच्चों को फोन की लत से बचा रहे टेक दिग्गज
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
आज के समय में दुनिया भर के बच्चे स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और रील्स के जाल में बुरी तरह फंस चुके हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिन लोगों ने इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और एल्गोरिदम को बनाया है, वे अपने ही बच्चों को इनसे कोसों दूर रखते हैं? जी हां, सिलिकॉन वैली (Silicon Valley) के टॉप एग्जीक्यूटिव्स अपने घरों में गैजेट्स पर सख्त पहरा लगाकर रखते हैं। वे अपने बच्चों को स्क्रीन के बजाय मिट्टी में खेलने और असल जिंदगी का अनुभव लेने की सलाह दे रहे हैं।
बिना फोन वाला 'असली बचपन'
गूगल के हेड ऑफिस से कुछ ही दूरी पर स्थित मशहूर वाल्डोर्फ स्कूल (Waldorf School) की कहानी इस बात का सबसे बड़ा सबूत है। करीब 40 लाख रुपये सालाना फीस वाले इस स्कूल में सिलिकॉन वैली के बड़े-बड़े एआई रिसर्चर और अधिकारी अपने बच्चों को पढ़ाते हैं। इस स्कूल में फोन पूरी तरह से बैन है। यहां मशीनों के बजाय इंसानी सोच और रचनात्मकता को निखारने पर जोर दिया जाता है, ताकि बच्चे बिना किसी भटकाव के अपना असली बचपन जी सकें।
टेक दिग्गजों के घर के सख्त नियम
मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने अपनी दूसरी बेटी के जन्म पर जो खुला खत लिखा था, उसमें डिजिटल दुनिया का नामोनिशान तक नहीं था। उन्होंने अपनी बेटी को बाहर खेलने, फूलों की महक महसूस करने और पत्ते बटोरने को कहा था। इसी तरह, फेसबुक के शुरुआती निवेशक पीटर थील अपने बच्चों को हफ्ते में सिर्फ डेढ़ घंटे ही स्क्रीन देखने देते हैं।
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स्नैपचैट के सीईओ इवान स्पीगल अपने दो साल के बेटे को बिल्कुल भी स्क्रीन टाइम नहीं देते। उनके बड़े बच्चों के लिए भी हफ्ते में सिर्फ 90 मिनट तय हैं। उनका मानना है कि बचपन में टीवी से दूर रहने के कारण ही वे रचनात्मक सोच विकसित कर पाए।
फोन को लेकर दिग्गजों की 'नो-एंट्री' पॉलिसी
दिग्गज टेक कंपनी Microsoft के को-फाउंडर बिल गेट्स (बिल गेट्स) ने अपने बच्चों को 14 साल की उम्र तक मोबाइल नहीं दिया था। Google के सीईओ सुंदर पिचाई (सुंदर पिचाई) के बेटे को भी 11 साल तक फोन छूने की इजाजत नहीं थी। Apple के बॉस टिम कुक (टिम कुक) भी बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने की वकालत करते हैं। वहीं, Microsoft के सीईओ सत्य नडेला (सत्य नडेला) ने भी अपने घर में बच्चों के कंप्यूटर इस्तेमाल करने और स्क्रीन टाइम की सख्त सीमाएं तय की हुई हैं।
AI से भी दूर रखने की तैयारी
भले ही आज पूरी दुनिया AI की दीवानी हो रही है, लेकिन OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन की सोच इससे बिल्कुल अलग है। वह अपने बच्चे को जल्द एआई से नहीं जोड़ना चाहते। उनका मानना है कि बच्चों को मिट्टी में खेलना चाहिए और बोरियत महसूस करनी चाहिए, क्योंकि इसी से इंसान के अंदर रचनात्मकता पैदा होती है। यूट्यूब के को-फाउंडर स्टीव चेन भी मानते हैं कि शॉर्ट वीडियो के कारण बच्चों का फोकस कम हो रहा है।
खतरे को पहचान चुके हैं निर्माता
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के जाने-माने मनोवैज्ञानिक जोनाथन हाइड का कहना है कि स्मार्टफोन ने बचपन की पूरी परिभाषा ही बदल दी है। खेल-कूद वाले बचपन की जगह अब फोन वाले बचपन ने ले ली है। इसके कारण बच्चों में डिप्रेशन और एंग्जायटी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सिलिकॉन वैली के ये तमाम दिग्गज इस कड़वी सच्चाई को अच्छी तरह जानते हैं। इसलिए, वे दुनिया को डिजिटल नशा बांटने के बावजूद अपने बच्चों को इस खतरनाक भंवर से सुरक्षित रख रहे हैं।
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बिना फोन वाला 'असली बचपन'
गूगल के हेड ऑफिस से कुछ ही दूरी पर स्थित मशहूर वाल्डोर्फ स्कूल (Waldorf School) की कहानी इस बात का सबसे बड़ा सबूत है। करीब 40 लाख रुपये सालाना फीस वाले इस स्कूल में सिलिकॉन वैली के बड़े-बड़े एआई रिसर्चर और अधिकारी अपने बच्चों को पढ़ाते हैं। इस स्कूल में फोन पूरी तरह से बैन है। यहां मशीनों के बजाय इंसानी सोच और रचनात्मकता को निखारने पर जोर दिया जाता है, ताकि बच्चे बिना किसी भटकाव के अपना असली बचपन जी सकें।
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टेक दिग्गजों के घर के सख्त नियम
मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने अपनी दूसरी बेटी के जन्म पर जो खुला खत लिखा था, उसमें डिजिटल दुनिया का नामोनिशान तक नहीं था। उन्होंने अपनी बेटी को बाहर खेलने, फूलों की महक महसूस करने और पत्ते बटोरने को कहा था। इसी तरह, फेसबुक के शुरुआती निवेशक पीटर थील अपने बच्चों को हफ्ते में सिर्फ डेढ़ घंटे ही स्क्रीन देखने देते हैं।
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स्नैपचैट के सीईओ इवान स्पीगल अपने दो साल के बेटे को बिल्कुल भी स्क्रीन टाइम नहीं देते। उनके बड़े बच्चों के लिए भी हफ्ते में सिर्फ 90 मिनट तय हैं। उनका मानना है कि बचपन में टीवी से दूर रहने के कारण ही वे रचनात्मक सोच विकसित कर पाए।
फोन को लेकर दिग्गजों की 'नो-एंट्री' पॉलिसी
दिग्गज टेक कंपनी Microsoft के को-फाउंडर बिल गेट्स (बिल गेट्स) ने अपने बच्चों को 14 साल की उम्र तक मोबाइल नहीं दिया था। Google के सीईओ सुंदर पिचाई (सुंदर पिचाई) के बेटे को भी 11 साल तक फोन छूने की इजाजत नहीं थी। Apple के बॉस टिम कुक (टिम कुक) भी बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने की वकालत करते हैं। वहीं, Microsoft के सीईओ सत्य नडेला (सत्य नडेला) ने भी अपने घर में बच्चों के कंप्यूटर इस्तेमाल करने और स्क्रीन टाइम की सख्त सीमाएं तय की हुई हैं।
AI से भी दूर रखने की तैयारी
भले ही आज पूरी दुनिया AI की दीवानी हो रही है, लेकिन OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन की सोच इससे बिल्कुल अलग है। वह अपने बच्चे को जल्द एआई से नहीं जोड़ना चाहते। उनका मानना है कि बच्चों को मिट्टी में खेलना चाहिए और बोरियत महसूस करनी चाहिए, क्योंकि इसी से इंसान के अंदर रचनात्मकता पैदा होती है। यूट्यूब के को-फाउंडर स्टीव चेन भी मानते हैं कि शॉर्ट वीडियो के कारण बच्चों का फोकस कम हो रहा है।
खतरे को पहचान चुके हैं निर्माता
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के जाने-माने मनोवैज्ञानिक जोनाथन हाइड का कहना है कि स्मार्टफोन ने बचपन की पूरी परिभाषा ही बदल दी है। खेल-कूद वाले बचपन की जगह अब फोन वाले बचपन ने ले ली है। इसके कारण बच्चों में डिप्रेशन और एंग्जायटी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सिलिकॉन वैली के ये तमाम दिग्गज इस कड़वी सच्चाई को अच्छी तरह जानते हैं। इसलिए, वे दुनिया को डिजिटल नशा बांटने के बावजूद अपने बच्चों को इस खतरनाक भंवर से सुरक्षित रख रहे हैं।