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दक्षिण कोरिया में एआई कानून लागू: सख्त फ्रेमवर्क का होगा पालन, स्टार्टअप्स को क्यों सता रही चिंता?
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Sun, 25 Jan 2026 03:57 PM IST
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सार
South Korea AI Law: दक्षिण कोरिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला लिया गया है। सरकार इसे भविष्य की जरूरत बता रही है, जबकि स्टार्टअप जगत इससे जुड़ी चिंताओं को खुलकर सामने रख रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस
- फोटो : AI
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विस्तार
दक्षिण कोरिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला लिया गया है। इस फैसले ने न सिर्फ तकनीक की दुनिया का ध्यान खींचा है, बल्कि इससे जुड़े नियमों और उनके असर को लेकर नई बहस भी शुरू हो गई है। सरकार इसे भविष्य की जरूरत बता रही है, जबकि स्टार्टअप जगत इससे जुड़ी चिंताओं को खुलकर सामने रख रहा है।
क्या है नया फैसला और क्यों है चर्चा में
दक्षिण कोरिया की सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। सरकार का दावा है कि यह दुनिया का पहला ऐसा पूर्ण AI नियामक सिस्टम है, जो तकनीक में भरोसा बढ़ाने और उसके सुरक्षित इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह पहल AI के तेजी से बढ़ते प्रभाव और उससे जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखते हुए की गई है।
कुछ सिस्टम्स पर रहेगी इंसानी निगरानी
नए AI कानून के तहत उन सिस्टम्स पर इंसानों का सीधा नियंत्रण जरूरी होगा, जिन्हें “हाई-इंपैक्ट सिस्टम” माना गया है। इसमें न्यूक्लियर सुरक्षा, पीने के पानी का उत्पादन, परिवहन व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं और वित्तीय क्षेत्र जैसे क्रेडिट स्कोरिंग शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में AI की एक छोटी सी गलती भी बड़े खतरे पैदा कर सकती है, इसलिए अंतिम फैसले में इंसानी दखल जरूरी है।
AI कंटेंट पर लेबलिंग होगी अनिवार्य
कानून के अनुसार, कंपनियों को यह साफ तौर पर बताना होगा कि वे हाई-रिस्क या जेनरेटिव AI का इस्तेमाल कर रही हैं। अगर AI द्वारा बनाया गया कंटेंट असली जानकारी या इंसानी कंटेंट से अलग पहचानना मुश्किल है, तो उस पर स्पष्ट लेबल लगाना जरूरी होगा। लेबलिंग नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 30 मिलियन वॉन तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसका मकसद फर्जी या भ्रम पैदा करने वाले AI कंटेंट से लोगों को बचाना है।
दक्षिण कोरिया के विज्ञान और आईसीटी मंत्रालय का कहना है कि यह कानून AI के विकास को रोकने के लिए नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए लाया गया है। सरकार ने कंपनियों को राहत देते हुए यह भी घोषणा की है कि नियमों के उल्लंघन पर सजा लागू होने से पहले कम से कम एक साल की मोहलत दी जाएगी, ताकि व्यवसाय नए नियमों के अनुसार खुद को ढाल सकें।
स्टार्टअप्स को क्यों है चिंता?
हालांकि स्टार्टअप समुदाय इस कानून को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि कानून की कुछ धाराएं स्पष्ट नहीं हैं, जिससे कंपनियां जोखिम से बचने के लिए कम नवाचारी और ज्यादा सुरक्षित विकल्प चुनने को मजबूर हो सकती हैं। उनका डर है कि इससे नई तकनीकों और प्रयोगों की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
किन देशों में लागू है एआई के लिए कानून?
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क्या है नया फैसला और क्यों है चर्चा में
दक्षिण कोरिया की सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। सरकार का दावा है कि यह दुनिया का पहला ऐसा पूर्ण AI नियामक सिस्टम है, जो तकनीक में भरोसा बढ़ाने और उसके सुरक्षित इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह पहल AI के तेजी से बढ़ते प्रभाव और उससे जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखते हुए की गई है।
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कुछ सिस्टम्स पर रहेगी इंसानी निगरानी
नए AI कानून के तहत उन सिस्टम्स पर इंसानों का सीधा नियंत्रण जरूरी होगा, जिन्हें “हाई-इंपैक्ट सिस्टम” माना गया है। इसमें न्यूक्लियर सुरक्षा, पीने के पानी का उत्पादन, परिवहन व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं और वित्तीय क्षेत्र जैसे क्रेडिट स्कोरिंग शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में AI की एक छोटी सी गलती भी बड़े खतरे पैदा कर सकती है, इसलिए अंतिम फैसले में इंसानी दखल जरूरी है।
AI कंटेंट पर लेबलिंग होगी अनिवार्य
कानून के अनुसार, कंपनियों को यह साफ तौर पर बताना होगा कि वे हाई-रिस्क या जेनरेटिव AI का इस्तेमाल कर रही हैं। अगर AI द्वारा बनाया गया कंटेंट असली जानकारी या इंसानी कंटेंट से अलग पहचानना मुश्किल है, तो उस पर स्पष्ट लेबल लगाना जरूरी होगा। लेबलिंग नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 30 मिलियन वॉन तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसका मकसद फर्जी या भ्रम पैदा करने वाले AI कंटेंट से लोगों को बचाना है।
दक्षिण कोरिया के विज्ञान और आईसीटी मंत्रालय का कहना है कि यह कानून AI के विकास को रोकने के लिए नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए लाया गया है। सरकार ने कंपनियों को राहत देते हुए यह भी घोषणा की है कि नियमों के उल्लंघन पर सजा लागू होने से पहले कम से कम एक साल की मोहलत दी जाएगी, ताकि व्यवसाय नए नियमों के अनुसार खुद को ढाल सकें।
स्टार्टअप्स को क्यों है चिंता?
हालांकि स्टार्टअप समुदाय इस कानून को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि कानून की कुछ धाराएं स्पष्ट नहीं हैं, जिससे कंपनियां जोखिम से बचने के लिए कम नवाचारी और ज्यादा सुरक्षित विकल्प चुनने को मजबूर हो सकती हैं। उनका डर है कि इससे नई तकनीकों और प्रयोगों की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
किन देशों में लागू है एआई के लिए कानून?
- एआई को लेकर कानून बनाने में कई देश सामने आ रहे हैं। यूरोपियन यूनियन ने साल 2024 में एआई एक्ट को लाने का प्रस्ताव रखा था, जिसके तहत 2027 तक एआई कानून को तागू कर दिया जाएगा। कानून के तहत हाई-रिस्क एआई मॉडलों पर कड़ी निगरानी रखने और गैर-स्वीकृत एआई पर बैन लगाने तक का नियम बनाया गया है।
- चीन में भी एआई को लेकर कई कानूनों को सख्ती से लागू किया गया है, जिसके तहत जेनरेटिव एआई (जैसे फोटो/वीडियो बनाने वाले एआई) के लिए नियम बनाए हैं। इनमें एआई कंटेंट पर 'लेबलिंग' जैसे नियमों को लागू किया गया है।
- वहीं, अमेरिका में एआई को रेगुलेट करने के लिए अभी तक कोई खास कानून पास नहीं किया गया है। हालांकि, वाइट हाउस के आदेश से सख्त नियम लागू किए गए हैं, जिनमें सरकारी एजेंसियो द्वारा एआई मॉडल की टेस्टिंग के बाद ही उन्हें नागरिकों के उपयोग के लिए रिलीज किया जाता है।
- भारत में भी एआई रेगुलेशन को लेकर कोई खास कानून नहीं लाया गया है, लेकिन डिजिटल इंडिया एक्ट के तहत इस पर काम चल रहा है। भारत में एआई को मौजूदा आईटी एक्ट के तहत रेगुलेट किया जा रहा है।