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एपल: कॉम्पैक की ऐशो-आराम वाली नौकरी छोड़ आखिर क्यों एपल में आए थे टिम कुक, आखिर उस मीटिंग में क्या हुआ था?
Tue, 01 Sep 2026 02:12 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Tue, 01 Sep 2026 02:12 PM IST
सार
Tim Cook Farewell: टिम कुक ने एपल के सीईओ पद से विदाई ले ली है। लेकिन एपल ज्वाइन करने से पहले कुक लैपटॉप कंपनी कॉम्पैक (Compaq) में अपनी नौकरी से बेहद खुश थे। स्टीव जॉब्स के साथ हुई सिर्फ एक मुलाकात ने कैसे उनकी जिंदगी और एपल का भविष्य बदल दिया, आइए जानते हैं।
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कुक को एपल का सीईओ बनाने में स्टीव जॉब्स की अहम है भूमिका।
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
टिम कुक ने सोमवार को एपल के सीईओ के तौर पर अपना आखिरी दिन पूरा किया। करीब तीन दशक तक कंपनी से जुड़े रहने और 2011 से सीईओ की जिम्मेदारी संभालने के बाद अब उन्होंने नेतृत्व की कमान जॉन टर्नस को सौंप दी है।
कुक के एपल तक पहुंचने की कहानी काफी दिलचस्प है। आज दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल एपल को चुनने का उनका फैसला उस समय बिल्कुल आसान या तर्कसंगत नहीं था। वर्ष 1998 में कुक कॉम्पैक में काम कर रहे थे और वहां अपने करियर से खुश थे। उस समय कॉम्पैक का कारोबार और बाजार मूल्य एपल से काफी बड़ा था।
लेकिन फिर उनकी मुलाकात स्टीव जॉब्स से हुई। यह मुलाकात इतनी प्रभावशाली रही कि कुक ने अपने करियर की दिशा ही बदल दी।
स्टीव जॉब्स का फोन पहले कई बार ठुकराया
कुक को एपल की टीम में शामिल कराने के मकसद से 1998 में जॉब्स ने उन्हें कई बार संपर्क किया था। में उनसे संपर्क किया गया था। उस समय कुक कॉम्पैक में काम कर रहे थे और उन्हें लगता था कि वह वहां अच्छी स्थिति में हैं। इसलिए एपल से आने वाले प्रस्ताव को उन्होंने शुरू में गंभीरता से नहीं लिया।
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यह भी पढ़ें: टिम कुक ने छोड़ी एपल सीईओ की कुर्सी: 15 साल में कंपनी को 4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाया, एक्स पर किया भावुक पोस्ट
हालांकि, एपल की तरफ से लगातार संपर्क किए जाने के बाद कुक ने आखिरकार जॉब्स से मिलने का फैसला किया। उनका कहना था कि वह जॉब्स से सिर्फ इसलिए मिलना चाहते थे क्योंकि उन्होंने जिस इंडस्ट्री में कुक काम कर रहे थे, उसकी दिशा बदलने में बड़ी भूमिका निभाई थी। कुक को उस समय अंदाजा भी नहीं था कि यह मुलाकात उनके पूरे करियर को बदलने वाली थी।
एक मुलाकात में बदल गया पूरा नजरिया
पत्रकार चार्ली रोज को 2014 में दिए एक इंटरव्यू में कुक ने इस मुलाकात का जिक्र किया था। उनके मुताबिक, शुरुआत में वह सिर्फ जॉब्स से मिलने गए थे, लेकिन बातचीत आगे बढ़ते ही उन्हें एपल की रणनीति और जॉब्स का विजन बेहद दिलचस्प लगने लगा।
जॉब्स उस समय एपल को पूरी तरह कंज्यूमर टेक्नोलॉजी की दिशा में ले जाने की योजना पर काम कर रहे थे। इंडस्ट्री की कई कंपनियां कंज्यूमर टेक्नोलॉजी को लेकर बहुत उत्साहित नहीं थीं, लेकिन जॉब्स की सोच इससे बिल्कुल अलग थी। उन्होंने कुक के सामने डिजाइन और एक ऐसे प्रोडक्ट की अवधारणा रखी, जो बाद में iMac के रूप में सामने आया।
जॉब्स की सोच ने कुक को किया प्रभावित
कुक के मुताबिक, जॉब्स जिस तरह अपनी रणनीति और भविष्य की योजना समझा रहे थे, उससे वह काफी प्रभावित हुए। दोनों के बीच हुई बातचीत में उन्हें लगा कि वह जॉब्स के साथ काम कर सकते हैं। यह सिर्फ एपल के प्रोडक्ट या कारोबार की बात नहीं थी। कुक को जॉब्स की सोच, उनकी ऊर्जा और कंपनी को एक नई दिशा देने का तरीका पसंद आया। यही वह क्षण था जब कुक को लगा कि एपल की समस्याओं के बीच वह कंपनी के लिए कुछ महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
दिल की आवाज सुनकर लिया फैसला
दिलचस्प बात यह है कि कुक खुद मानते थे कि एपल में जाने का फैसला पूरी तरह व्यावहारिक नहीं था। अगर उस समय वह सिर्फ आंकड़ों और कारोबारी स्थिति को देखते, तो शायद कॉम्पैक छोड़ने का फैसला नहीं करते।
यह भी पढ़ें: दुनिया में सबसे ज्यादा बिका ये आईफोन, सैमसंग के 5 फोन भी टॉप-10 में शामिल, देखें पूरी लिस्ट
एपल उस वक्त कॉम्पैक से काफी कमजोर स्थिति में था। इसके बावजूद कुक को अंदर से लगा कि उन्हें यह मौका स्वीकार करना चाहिए। कुक ने बाद में बताया कि उन्होंने एपल की समस्याओं को देखा और उन्हें लगा कि वह वहां वास्तविक योगदान दे सकते हैं। इसके साथ ही जॉब्स के साथ काम करने का अवसर उनके लिए बेहद खास था।
उन्होंने कहा कि उस समय उनके पास कई व्यावहारिक सवाल थे, लेकिन उनका मन लगातार उन्हें एपल जाने के लिए कह रहा था। आखिरकार उन्होंने उसी आवाज पर भरोसा किया।
1998 में एपल जॉइन किया, फिर संभाली कंपनी की कमान
स्टीव जॉब्स ने 1998 में टिम कुक को एपल में शामिल किया। कुक ने कंपनी में संचालन और सप्लाई चेन से जुड़े कामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आगे चलकर 2005 में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर बने। 2011 में स्टीव जॉब्स के सीईओ पद से हटने के बाद कुक ने एपल की कमान संभाली। जॉब्स के निधन के बाद भी कुक ने कंपनी का नेतृत्व जारी रखा।
उनके नेतृत्व में एपल ने जबरदस्त कारोबारी विस्तार किया और दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में अपनी स्थिति मजबूत की। सोमवार को कुक के सीईओ पद छोड़ने के समय कंपनी का बाजार मूल्य 4.5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक था।
अब जॉन टर्नस के हाथ में एपल की कमान
टिम कुक के सीईओ पद से हटने के बाद अब जॉन टर्नस एपल के नए सीईओ बन गए हैं। टर्नस लंबे समय से कंपनी के हार्डवेयर कारोबार से जुड़े रहे हैं और कई प्रमुख एपल उत्पादों के विकास में उनकी भूमिका रही है।
कुक अब एपल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं, टर्नस के सामने कंपनी को एआई, नए हार्डवेयर और बदलते टेक्नोलॉजी बाजार में आगे ले जाने की चुनौती होगी।
टिम कुक का एपल तक पहुंचने का सफर इस बात का उदाहरण है कि कभी-कभी करियर का सबसे बड़ा फैसला कंपनी के कारोबारी आंकड़ों से नहीं, बल्कि किसी एक मुलाकात और अपने भीतर की आवाज से तय होता है।
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कुक के एपल तक पहुंचने की कहानी काफी दिलचस्प है। आज दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल एपल को चुनने का उनका फैसला उस समय बिल्कुल आसान या तर्कसंगत नहीं था। वर्ष 1998 में कुक कॉम्पैक में काम कर रहे थे और वहां अपने करियर से खुश थे। उस समय कॉम्पैक का कारोबार और बाजार मूल्य एपल से काफी बड़ा था।
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लेकिन फिर उनकी मुलाकात स्टीव जॉब्स से हुई। यह मुलाकात इतनी प्रभावशाली रही कि कुक ने अपने करियर की दिशा ही बदल दी।
स्टीव जॉब्स का फोन पहले कई बार ठुकराया
कुक को एपल की टीम में शामिल कराने के मकसद से 1998 में जॉब्स ने उन्हें कई बार संपर्क किया था। में उनसे संपर्क किया गया था। उस समय कुक कॉम्पैक में काम कर रहे थे और उन्हें लगता था कि वह वहां अच्छी स्थिति में हैं। इसलिए एपल से आने वाले प्रस्ताव को उन्होंने शुरू में गंभीरता से नहीं लिया।
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हालांकि, एपल की तरफ से लगातार संपर्क किए जाने के बाद कुक ने आखिरकार जॉब्स से मिलने का फैसला किया। उनका कहना था कि वह जॉब्स से सिर्फ इसलिए मिलना चाहते थे क्योंकि उन्होंने जिस इंडस्ट्री में कुक काम कर रहे थे, उसकी दिशा बदलने में बड़ी भूमिका निभाई थी। कुक को उस समय अंदाजा भी नहीं था कि यह मुलाकात उनके पूरे करियर को बदलने वाली थी।
एक मुलाकात में बदल गया पूरा नजरिया
पत्रकार चार्ली रोज को 2014 में दिए एक इंटरव्यू में कुक ने इस मुलाकात का जिक्र किया था। उनके मुताबिक, शुरुआत में वह सिर्फ जॉब्स से मिलने गए थे, लेकिन बातचीत आगे बढ़ते ही उन्हें एपल की रणनीति और जॉब्स का विजन बेहद दिलचस्प लगने लगा।
जॉब्स उस समय एपल को पूरी तरह कंज्यूमर टेक्नोलॉजी की दिशा में ले जाने की योजना पर काम कर रहे थे। इंडस्ट्री की कई कंपनियां कंज्यूमर टेक्नोलॉजी को लेकर बहुत उत्साहित नहीं थीं, लेकिन जॉब्स की सोच इससे बिल्कुल अलग थी। उन्होंने कुक के सामने डिजाइन और एक ऐसे प्रोडक्ट की अवधारणा रखी, जो बाद में iMac के रूप में सामने आया।
जॉब्स की सोच ने कुक को किया प्रभावित
कुक के मुताबिक, जॉब्स जिस तरह अपनी रणनीति और भविष्य की योजना समझा रहे थे, उससे वह काफी प्रभावित हुए। दोनों के बीच हुई बातचीत में उन्हें लगा कि वह जॉब्स के साथ काम कर सकते हैं। यह सिर्फ एपल के प्रोडक्ट या कारोबार की बात नहीं थी। कुक को जॉब्स की सोच, उनकी ऊर्जा और कंपनी को एक नई दिशा देने का तरीका पसंद आया। यही वह क्षण था जब कुक को लगा कि एपल की समस्याओं के बीच वह कंपनी के लिए कुछ महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
दिल की आवाज सुनकर लिया फैसला
दिलचस्प बात यह है कि कुक खुद मानते थे कि एपल में जाने का फैसला पूरी तरह व्यावहारिक नहीं था। अगर उस समय वह सिर्फ आंकड़ों और कारोबारी स्थिति को देखते, तो शायद कॉम्पैक छोड़ने का फैसला नहीं करते।
यह भी पढ़ें: दुनिया में सबसे ज्यादा बिका ये आईफोन, सैमसंग के 5 फोन भी टॉप-10 में शामिल, देखें पूरी लिस्ट
एपल उस वक्त कॉम्पैक से काफी कमजोर स्थिति में था। इसके बावजूद कुक को अंदर से लगा कि उन्हें यह मौका स्वीकार करना चाहिए। कुक ने बाद में बताया कि उन्होंने एपल की समस्याओं को देखा और उन्हें लगा कि वह वहां वास्तविक योगदान दे सकते हैं। इसके साथ ही जॉब्स के साथ काम करने का अवसर उनके लिए बेहद खास था।
उन्होंने कहा कि उस समय उनके पास कई व्यावहारिक सवाल थे, लेकिन उनका मन लगातार उन्हें एपल जाने के लिए कह रहा था। आखिरकार उन्होंने उसी आवाज पर भरोसा किया।
1998 में एपल जॉइन किया, फिर संभाली कंपनी की कमान
स्टीव जॉब्स ने 1998 में टिम कुक को एपल में शामिल किया। कुक ने कंपनी में संचालन और सप्लाई चेन से जुड़े कामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आगे चलकर 2005 में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर बने। 2011 में स्टीव जॉब्स के सीईओ पद से हटने के बाद कुक ने एपल की कमान संभाली। जॉब्स के निधन के बाद भी कुक ने कंपनी का नेतृत्व जारी रखा।
उनके नेतृत्व में एपल ने जबरदस्त कारोबारी विस्तार किया और दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में अपनी स्थिति मजबूत की। सोमवार को कुक के सीईओ पद छोड़ने के समय कंपनी का बाजार मूल्य 4.5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक था।
अब जॉन टर्नस के हाथ में एपल की कमान
टिम कुक के सीईओ पद से हटने के बाद अब जॉन टर्नस एपल के नए सीईओ बन गए हैं। टर्नस लंबे समय से कंपनी के हार्डवेयर कारोबार से जुड़े रहे हैं और कई प्रमुख एपल उत्पादों के विकास में उनकी भूमिका रही है।
कुक अब एपल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं, टर्नस के सामने कंपनी को एआई, नए हार्डवेयर और बदलते टेक्नोलॉजी बाजार में आगे ले जाने की चुनौती होगी।
टिम कुक का एपल तक पहुंचने का सफर इस बात का उदाहरण है कि कभी-कभी करियर का सबसे बड़ा फैसला कंपनी के कारोबारी आंकड़ों से नहीं, बल्कि किसी एक मुलाकात और अपने भीतर की आवाज से तय होता है।