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रिपोर्ट: इंटरनेट चलाने में उस्ताद, साइबर सुरक्षा में फिसड्डी; 90% भारतीय जेन-जी युवाओं ने झेला साइबर फ्रॉड
Tue, 01 Sep 2026 03:40 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Tue, 01 Sep 2026 03:40 PM IST
सार
Kaspersky Report: डिजिटल दुनिया में पली-बढ़ी भारत की युवा पीढ़ी (Gen Z) इंटरनेट चलाने में खुद को बेहद आत्मविश्वासी मानती है, लेकिन साइबर सुरक्षा के मामले में काफी कमजोर साबित हो रही है। साइबर सुरक्षा फर्म कैस्परस्की की रिपोर्ट के अनुसार, 90% युवा किसी न किसी ऑनलाइन फ्रॉड या हैकिंग का शिकार बन चुके हैं।
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90% जेन-जी साइब फ्रॉड का शिकार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
स्मार्टफोन और हाई-स्पीड इंटरनेट के दौर में पली-बढ़ी 'जेन-जी' (1997 से 2012 के बीच जन्मे युवा) को तकनीकी रूप से सबसे ज्यादा सक्षम माना जाता है। खाना ऑर्डर करने से लेकर सोशल मीडिया रील्स बनाने तक, यह पीढ़ी हर डिजिटल काम चुटकियों में कर लेती है। लेकिन क्या ऑनलाइन दुनिया में इनकी यह महारत इन्हें सुरक्षित भी रख पा रही है? वैश्विक साइबर सुरक्षा कंपनी कैस्परस्की की एक ताजा रिसर्च रिपोर्ट ने इस धारणा को पूरी तरह उलट दिया है।
डिजिटल दुनिया में आत्मविश्वास, पर सुरक्षा की समझ आधी-अधूरी
कैस्परस्की की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 67 फीसदी जेन-जी युवा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने में खुद को पूरी तरह सक्षम और आत्मविश्वासी महसूस करते हैं। इस मामले में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में इंडोनेशिया (77%) और वियतनाम (71%) के बाद भारत का स्थान है। हालांकि, जब बात साइबर खतरों को पहचानने और उनसे बचने की आती है, तो स्थिति चिंताजनक दिखाई देती है।
डिजिटल सुरक्षा की एडवांस समझ सिर्फ 35% युवाओं में
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सिर्फ 26 फीसदी जेन-जी ने माना कि उन्हें डिजिटल खतरों और ऑनलाइन सुरक्षा उपायों की एडवांस जानकारी है। भारत में यह आंकड़ा दूसरे कई देशों से बेहतर है। यहां 35 फीसदी जेन-जी को डिजिटल सुरक्षा की एडवांस समझ होने की बात सामने आई।
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दूसरी ओर, इंडोनेशिया और मलेशिया में यह आंकड़ा 28 फीसदी, वियतनाम में 24 फीसदी, थाईलैंड में 23 फीसदी और चीन में सिर्फ 10 फीसदी रहा। यानी इंटरनेट और स्मार्टफोन के इस्तेमाल में युवा काफी आगे हैं, लेकिन ऑनलाइन सुरक्षा के मामले में अभी काफी सुधार की जरूरत है।
पासवर्ड बदलने में सुस्ती और एंटीवायरस से परहेज
अध्ययन में सामने आया है कि युवा पीढ़ी अपने स्मार्टफोन्स में एंटीवायरस एप्स का इस्तेमाल सबसे कम करती है। जहां पुरानी पीढ़ियां जैसे बूमर्स (43%) और मिलेनियल्स (31%) सुरक्षा सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं, वहीं जेन-जी में सिर्फ 22 फीसदी लोग ही फोन में एंटीवायरस रखते हैं। इसके अलावा, नियमित रूप से पासवर्ड बदलने के मामले में भी यह पीढ़ी पीछे है। केवल 35% युवा समय-समय पर पासवर्ड बदलते हैं, जबकि पुरानी पीढ़ी में यह आंकड़ा 50% से अधिक है।
90% युवा झेल चुके हैं साइबर अटैक का झटका
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 90 फीसदी जेन-जी युवा पिछले एक साल में किसी न किसी साइबर हमले या फ्रॉड का शिकार बन चुके हैं। इनमें सोशल मीडिया अकाउंट हैक होना, निजी फोटो और डेटा लीक होना, ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट स्कैम और गेमिंग अकाउंट्स की चोरी जैसे मामले शामिल हैं। चिंता की बात यह है कि युवा अपने फोन में बैंक क्रेडेंशियल्स, पासवर्ड और निजी तस्वीरें जैसी बेहद संवेदनशील जानकारियां रखते हैं, जो सुरक्षा में थोड़ी सी चूक होने पर साइबर अपराधियों के हाथ लग जाती हैं।
आत्मविश्वास के साथ सुरक्षा की समझ भी जरूरी
कैस्परस्की के एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रबंध निदेशक एड्रियन हिया का कहना है कि डिजिटल दुनिया में लगातार एक्टिव रहने के कारण युवा साइबर अपराधियों का सबसे आसान निशाना बन रहे हैं। वहीं, कंपनी की वाइस प्रेसिडेंट इरीना एर्मिलोवा का मानना है कि सिर्फ ऐप्स और सोशल मीडिया को तेजी से चला लेना साइबर सुरक्षा की गारंटी नहीं है। युवाओं को अब सोशल मीडिया और गेमिंग की तरह ही मजबूत पासवर्ड रखने और एंटीवायरस टूल्स का इस्तेमाल करने जैसी 'डिजिटल आदतों' को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना होगा।
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डिजिटल दुनिया में आत्मविश्वास, पर सुरक्षा की समझ आधी-अधूरी
कैस्परस्की की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 67 फीसदी जेन-जी युवा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने में खुद को पूरी तरह सक्षम और आत्मविश्वासी महसूस करते हैं। इस मामले में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में इंडोनेशिया (77%) और वियतनाम (71%) के बाद भारत का स्थान है। हालांकि, जब बात साइबर खतरों को पहचानने और उनसे बचने की आती है, तो स्थिति चिंताजनक दिखाई देती है।
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डिजिटल सुरक्षा की एडवांस समझ सिर्फ 35% युवाओं में
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सिर्फ 26 फीसदी जेन-जी ने माना कि उन्हें डिजिटल खतरों और ऑनलाइन सुरक्षा उपायों की एडवांस जानकारी है। भारत में यह आंकड़ा दूसरे कई देशों से बेहतर है। यहां 35 फीसदी जेन-जी को डिजिटल सुरक्षा की एडवांस समझ होने की बात सामने आई।
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दूसरी ओर, इंडोनेशिया और मलेशिया में यह आंकड़ा 28 फीसदी, वियतनाम में 24 फीसदी, थाईलैंड में 23 फीसदी और चीन में सिर्फ 10 फीसदी रहा। यानी इंटरनेट और स्मार्टफोन के इस्तेमाल में युवा काफी आगे हैं, लेकिन ऑनलाइन सुरक्षा के मामले में अभी काफी सुधार की जरूरत है।
पासवर्ड बदलने में सुस्ती और एंटीवायरस से परहेज
अध्ययन में सामने आया है कि युवा पीढ़ी अपने स्मार्टफोन्स में एंटीवायरस एप्स का इस्तेमाल सबसे कम करती है। जहां पुरानी पीढ़ियां जैसे बूमर्स (43%) और मिलेनियल्स (31%) सुरक्षा सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं, वहीं जेन-जी में सिर्फ 22 फीसदी लोग ही फोन में एंटीवायरस रखते हैं। इसके अलावा, नियमित रूप से पासवर्ड बदलने के मामले में भी यह पीढ़ी पीछे है। केवल 35% युवा समय-समय पर पासवर्ड बदलते हैं, जबकि पुरानी पीढ़ी में यह आंकड़ा 50% से अधिक है।
90% युवा झेल चुके हैं साइबर अटैक का झटका
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 90 फीसदी जेन-जी युवा पिछले एक साल में किसी न किसी साइबर हमले या फ्रॉड का शिकार बन चुके हैं। इनमें सोशल मीडिया अकाउंट हैक होना, निजी फोटो और डेटा लीक होना, ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट स्कैम और गेमिंग अकाउंट्स की चोरी जैसे मामले शामिल हैं। चिंता की बात यह है कि युवा अपने फोन में बैंक क्रेडेंशियल्स, पासवर्ड और निजी तस्वीरें जैसी बेहद संवेदनशील जानकारियां रखते हैं, जो सुरक्षा में थोड़ी सी चूक होने पर साइबर अपराधियों के हाथ लग जाती हैं।
आत्मविश्वास के साथ सुरक्षा की समझ भी जरूरी
कैस्परस्की के एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रबंध निदेशक एड्रियन हिया का कहना है कि डिजिटल दुनिया में लगातार एक्टिव रहने के कारण युवा साइबर अपराधियों का सबसे आसान निशाना बन रहे हैं। वहीं, कंपनी की वाइस प्रेसिडेंट इरीना एर्मिलोवा का मानना है कि सिर्फ ऐप्स और सोशल मीडिया को तेजी से चला लेना साइबर सुरक्षा की गारंटी नहीं है। युवाओं को अब सोशल मीडिया और गेमिंग की तरह ही मजबूत पासवर्ड रखने और एंटीवायरस टूल्स का इस्तेमाल करने जैसी 'डिजिटल आदतों' को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना होगा।