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टिम कुक ने छोड़ी एपल सीईओ की कुर्सी: 15 साल में कंपनी को 4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाया, एक्स पर किया भावुक पोस्ट

Tue, 01 Sep 2026 11:29 AM IST
नीतीश कुमार टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Tue, 01 Sep 2026 11:29 AM IST
सार

Tim Cook Farewell: 15 साल तक एपल की कमान संभालने के बाद टिम कुक ने सीईओ पद छोड़ दिया है। अब वह एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे, जबकि जॉन टर्नस नए सीईओ बन गए हैं। कुक के कार्यकाल में एपल की वैल्यू 350 अरब डॉलर से 4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई। आइए जानते हैं एपल सीईओ के तौर पर कैसा कर उनका सफर...

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tim cook farewell as apple ceo 4 trillion dollar john ternus takes over from September 1
टिम कुक ने एक्स पर साझा किया भावुक पोस्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आज यानी 1 सितंबर 2026 से जॉन टर्नस एपल के नए सीईओ बन गए हैं। इससे पहले टर्नस एपल में सीनियर हार्डवेयर एग्जीक्यूटिव के पद पर काम कर रहे थे। टिम कुक ने 15 साल तक एपल को अपनी सेवाएं दीं, अब वे कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे। कुक ने 2011 में स्टीव जॉब्स के बाद एपल की कमान संभाली थी।
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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 9 सितंबर को आईफोन 18 समेत एपल के नए प्रोडक्ट्स लॉन्च होंगे। जॉन टर्नस के लिए यह उनका पहला लॉन्च इवेंट होगा।

टिम कुक ने किया भावुक पोस्ट
टिम कुक ने 31 अगस्त की रात एक्स (X) पर अपना फेयरवेल पोस्ट किया। इसमें उन्होंने एपल कम्यूनिटी को संबोधित करते हुए एक भावुक पोस्ट में लिखा, "सीईओ के रूप में मेरे आखिरी दिन पर एपल समुदाय को बहुत सारा प्यार। कल मेरा पद बदल जाएगा, लेकिन आप लोगों के लिए मेरा प्यार कभी नहीं बदलेगा। प्रेरणा का निरंतर स्रोत बने रहने के लिए आपका धन्यवाद। मेरा आभार अनंत है, और मैं अगले अध्याय के लिए बेहद उत्साहित हूं!"
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टिम कुक - फोटो : एआई जनरेटेड
कैसा रहा टिम कुक का सफर
टिम कुक ने 1998 में एपल जॉइन किया था और अगस्त 2011 में स्टीव जॉब्स के बाद सीईओ बने थे। वे कंपनी के कारोबार को नई ऊंचाइयों पर ले गए जिससे एपल की मार्केट वैल्यू में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। उनके सीईओ बनने के समय एपल की मार्केट वैल्यू करीब 350 अरब डॉलर थी, जो इस साल तक बढ़कर लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई। 

इतना ही नहीं, कंपनी का सालाना रेवेन्यू भी 108 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 416 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया। कुक के कार्यकाल में एपल ने आईफोन के अलावा कई नए प्रोडक्ट और सर्विस पेश किए। इनमें एपल वॉच, एयरपॉड्स, विजन प्रो, एयरटैग और एपल म्यूजिक प्रमुख हैं। टिम कुक के नेतृत्व में एपल ने पर्यावरण से जुड़े लक्ष्यों पर भी काम किया है। कंपनी के अनुसार, इस दौरान उसका कार्बन फुटप्रिंट करीब 60 फीसदी कम हुआ है।

कौन हैं एपल के नए सीईओ जॉन टर्नस?
जॉन टर्नस कोई बाहरी उम्मीदवार नहीं हैं। वह करीब 25 वर्षों से एपल से जुड़े हुए हैं और कंपनी के हार्डवेयर विकास में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। टर्नस ने 2001 में एपल जॉइन किया था। बाद में वह हार्डवेयर इंजीनियरिंग टीम में आगे बढ़ते हुए 2013 में वाइस प्रेसिडेंट बने और 2021 में उन्हें हार्डवेयर इंजीनियरिंग का सीनियर वाइस प्रेसिडेंट नियुक्त किया गया। एपल ने अप्रैल 2026 में उन्हें कुक का उत्तराधिकारी घोषित किया था।

एपल से पहले वह वर्चुअल रिसर्च सिस्टम्स में मैकेनिकल इंजीनियर के तौर पर काम कर चुके थे। 51 साल के जॉन टर्नस ने यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है।

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एपल के आठवें सीईओ हैं टर्नस - फोटो : एक्स ग्रैब
एपल के इतिहास में आठवें सीईओ हैं टर्नस
जॉन टर्नस एपल के इतिहास में कंपनी के आठवें सीईओ हैं। उनसे पहले माइकल स्कॉट, माइक मार्ककुला, जॉन स्कली, माइकल स्पिंडलर, गिल एमेलियो, स्टीव जॉब्स और टिम कुक इस पद पर रह चुके हैं।

एपल के लिए यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्टीव जॉब्स के बाद कंपनी की कमान संभालने वाले कुक ने लंबे समय तक स्थिर नेतृत्व दिया। अब टर्नस को उसी बड़े इकोसिस्टम को संभालते हुए अगली पीढ़ी के प्रोडक्ट, एआई और नए बाजारों पर कंपनी की रणनीति तय करनी होगी।

स्टीव जॉब्स के साथ भी कर चुके हैं काम
टर्नस के करियर की एक खास बात यह है कि उन्होंने एपल के सह-संस्थापक और पूर्व सीईओ स्टीव जॉब्स के दौर में भी कंपनी के लिए काम किया। लंबे समय तक हार्डवेयर टीम का हिस्सा रहने के कारण उन्हें एपल के प्रोडक्ट डेवलपमेंट और इंजीनियरिंग संस्कृति की गहरी समझ है।

उन्होंने आईपैड, एयरपॉड्स, आईफोन और एपल वॉच जैसे कई प्रमुख उत्पादों के विकास में भूमिका निभाई है। इसी हार्डवेयर विशेषज्ञता को एपल के बोर्ड ने उन्हें सीईओ चुनने की बड़ी वजहों में से एक माना है।

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टर्नस को एआई से लेकर प्राइवेसी जैसे मुद्दों से निपटना होगा। - फोटो : अमर उजाला
टर्नस के सामने होंगी बड़ी चुनौतियां
जॉन टर्नस ऐसे समय सीईओ बने हैं जब स्मार्टफोन और टेक इंडस्ट्री तेजी से एआई की तरफ बढ़ रही है। तो दूसरी तरफ कंपनी को कई रेगुलेटरी और कानूनी जांचों का सामना करना पड़ रहा है। एपल के सीईओ रहते हुए टर्नस को इन चुनौतियों का सामना करना होगा:
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दबाव: टर्नस के लिए सबसे बड़ी चुनौती एपल को एआई की दौड़ में गूगल और ओपनएआई जैसी कंपनियों के बराबर खड़ा करना है। उन्हें अपनी एआई रणनीति (जैसे सीरी के लिए गूगल के जेमिनी मॉडल का लाइसेंस) को संतुलित करते हुए एपल के बड़े हार्डवेयर इकोसिस्टम को एआई युग में प्रासंगिक बनाना होगा।
  • हार्डवेयर इनोवेशन और नई ग्रोथ: कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में ठहराव के बीच कंपनी के लिए नए ग्रोथ इंजन खोजना एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए उन्हें फोल्डेबल आईफोन जैसे नए और इनोवेटिव हार्डवेयर डिवाइस पेश करने पर भारी जोर देना होगा।
  • नियामक और कानूनी जांच: एपल के सर्विसेज बिजनेस (जैसे एप स्टोर) को यूरोपीय संघ के डिजिटल मार्केट्स एक्ट और अमेरिकी एंटीट्रस्ट मुकदमों जैसी कड़ी कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। टर्नस को इन कड़े नियमों के बीच कंपनी के प्रॉफिट को बनाए रखना होगा।
  • सप्लाई चेन और भू-राजनीतिक तनाव: कलपुर्जों की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन की जटिलताओं से निपटना एक प्रमुख चुनौती होगी। इसके साथ ही, चीन पर कंपनी की निर्भरता और अमेरिकी राजनीतिक दबाव के बीच संतुलन बनाना भी उनके लिए एक मुश्किल काम है।
  • पुरानी लीडरशिप टीम का पुनर्गठन: टिम कुक के समय की पुरानी लीडरशिप टीम में बदलाव करना टर्नस के लिए एक बड़ी आंतरिक चुनौती मानी जा रही है। उन्हें आने वाले समय में हार्डवेयर, मार्केटिंग, रिटेल और ह्यूमन रिसोर्स (HR) जैसे अहम विभागों में नए और भरोसेमंद लीडर्स को नियुक्त करना होगा।

फोल्डेबल आईफोन पर भी होंगी निगाहें
नए सीईओ के तौर पर टर्नस के लिए सबसे शुरुआती चुनौती नए आईफोन की लॉन्चिंग है। एपल 9 सितंबर को अपने प्रमुख प्रोडक्ट लॉन्च इवेंट की मेजबानी करेगा। इसमें नए आईफोन मॉडल पेश किए जाने की उम्मीद है।

सबसे ज्यादा चर्चा एपल के पहले फोल्डेबल आईफोन को लेकर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह डिवाइस कंपनी के लिए प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार में नया रास्ता खोल सकता है। फोल्डेबल सेगमेंट में अभी सैमसंग जैसी कंपनियों की मजबूत मौजूदगी है, इसलिए एपल का प्रवेश इस बाजार को काफी प्रभावित कर सकता है।
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