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WIPO: वैश्विक पेटेंट रैंकिंग में जियो ने बनाया नया रिकॉर्ड, टॉप-20 में जगह बनाने वाली बनी पहली भारतीय कंपनी
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Sun, 14 Jun 2026 05:44 PM IST
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सार
Jio Platforms Patent Ranking: रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की टेक्नोलॉजी इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स ने वैश्विक पेटेंट रैंकिंग में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने WIPO की पेटेंट कोऑपरेशन ट्रीटी (PCT) रैंकिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए ग्लोबल टॉप-20 में जगह बना ली है। खास बात यह है कि इस सूची में शामिल होने वाली जियो एकमात्र भारतीय टेक कंपनी है। ऐसे में आइए जानते हैं कि जियो ने इस उपलब्धि के साथ किन कंपनियों को टक्कर दी है? साथ ही कंपनी के पास कुल कितने पेटेंट हैं और वह किन तकनीकों पर काम कर रही है? विस्तार से जानते हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
Jio Global Top 20: वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन यानी WIPO की ताजा पेटेंट कोऑपरेशन ट्रीटी (PCT) रैंकिंग में जियो प्लेटफॉर्म्स ने 2025 की प्रतिष्ठित सूची में 320 पायदान की लंबी छलांग लगाते हुए सीधे 20वें स्थान पर अपना स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि वैश्विक स्तर पर PCT फाइलिंग की वृद्धि एक प्रतिशत से भी कम रही, जबकि जियो ने रिकॉर्ड प्रगति दर्ज की। यह रैंकिंग कंपनी की रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) क्षमता और मजबूत बौद्धिक संपदा पोर्टफोलियो को वैश्विक पहचान दिलाती है।
दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों के साथ खड़ा हुआ जियो
नई रैंकिंग के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स अब उन वैश्विक टेक दिग्गजों की सूची में शामिल हो गया है, जिनमें हुआवेई, सैमसंग, क्वालकॉम, एलजी, पैनासोनिक, नोकिया, गूगल, एपल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां मौजूद हैं। यह उपलब्धि दिखाती है कि भारतीय कंपनियां अब केवल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ही नहीं कर रहीं, बल्कि नई तकनीकों के विकास में भी लगातार आगे बढ़ रही हैं।
किन तकनीकों पर फोकस कर रहा है जियो?
जियो के अनुसार कंपनी 5 जी, 5जी एडवांस्ड, 6जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी, एआई नेटिव नेटवर्क, क्लाउड-नेटिव प्लेटफॉर्म, इंटेलिजेंट ऑटोमेशन, रेडियो एक्सेस सिस्टम, कोर नेटवर्क सॉफ्टवेयर, एज इंटेलिजेंस, फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस, नेटवर्क स्लाइसिंग और डिजिटल सर्विस इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में लगातार काम कर रहा है। कंपनी का यह भी कहना है कि आने वाले समय में इन तकनीकों को डिजिटल इकोसिस्टम की रीढ़ माना जा सकता है।
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प्रधानमंत्री मोदी के विजन को किया समर्पित
पेटेंट पोर्टफोलियो भी हुआ मजबूत
31 मार्च 2026 तक जियो प्लेटफॉर्म्स कुल 6,817 पेटेंट फाइल कर चुकी है। इनमें 2,393 पेटेंट भारत में और 4,424 पेटेंट विदेशी बाजारों में शामिल हुए हैं। कंपनी के 1,009 पेटेंट को अब तक वैश्विक स्तर पर मंजूरी भी मिल चुकी है, जिनमें 538 भारत और 471 अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्वीकृत हुए हैं।
JioBrain और अगली पीढ़ी की तकनीकों पर भी काम
इतना ही नहीं, कंपनी का काम अभी भी जारी है। जियो ने साफ कहा है कि उसका इनोवेशन केवल मौजूदा नेटवर्क तक सीमित नहीं रहने वाला है। कंपनी 5G/6G रेडियो टेक्नोलॉजी, 5G/6G कोर नेटवर्क, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और एजेंटिक एआई जैसी उभरती तकनीकों पर काम कर रही है। इसके अलावा JioBrain जैसे प्रोजेक्ट भविष्य की AI-आधारित डिजिटल सेवाओं को नई दिशा दे सकते हैं।
क्या भारत के लिए महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि?
इन उपलब्धि के बाद टेक इंडस्ट्री में चर्चाएं तेज हो गई हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि यह सफलता केवल एक कंपनी की नहीं, बल्कि भारत के टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के बदलते स्वरूप की है। जाे दिखाता है कि भारतीय कंपनियां अब केवल विदेशी तकनीकों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि खुद नई तकनीक विकसित कर रही हैं और उन्हें वैश्विक स्तर पर पेटेंट भी करा रही हैं। इससे भारत का नाम दुनिया के प्रमुख इनोवेशन हब के रूप में और मजबूत हो सकता है।
दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों के साथ खड़ा हुआ जियो
नई रैंकिंग के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स अब उन वैश्विक टेक दिग्गजों की सूची में शामिल हो गया है, जिनमें हुआवेई, सैमसंग, क्वालकॉम, एलजी, पैनासोनिक, नोकिया, गूगल, एपल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां मौजूद हैं। यह उपलब्धि दिखाती है कि भारतीय कंपनियां अब केवल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ही नहीं कर रहीं, बल्कि नई तकनीकों के विकास में भी लगातार आगे बढ़ रही हैं।
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किन तकनीकों पर फोकस कर रहा है जियो?
जियो के अनुसार कंपनी 5 जी, 5जी एडवांस्ड, 6जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी, एआई नेटिव नेटवर्क, क्लाउड-नेटिव प्लेटफॉर्म, इंटेलिजेंट ऑटोमेशन, रेडियो एक्सेस सिस्टम, कोर नेटवर्क सॉफ्टवेयर, एज इंटेलिजेंस, फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस, नेटवर्क स्लाइसिंग और डिजिटल सर्विस इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में लगातार काम कर रहा है। कंपनी का यह भी कहना है कि आने वाले समय में इन तकनीकों को डिजिटल इकोसिस्टम की रीढ़ माना जा सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी के विजन को किया समर्पित
- इस जीत के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश एम अंबानी का कहना कि डब्ल्यूआईपीओ की ग्लोबल टॉप-20 सूची में शामिल होना कंपनी की कई वर्षों की मेहनत और डीप-टेक कंपनी बनने दिशा में प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि जियो में विकसित हो रही उन्नत तकनीकों और इनोवेशन की ताकत है।
- आकाश अंबानी ने इस सफलता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन को समर्पित किया। उनके अनुसार भारत अब केवल वैश्विक तकनीकों का बाजार नहीं रहना चाहता, बल्कि ऐसी तकनीकों का निर्माता, मालिक और निर्यातक बनना चाहता है जो दुनिया भर में इस्तेमाल की जाएं।
पेटेंट पोर्टफोलियो भी हुआ मजबूत
31 मार्च 2026 तक जियो प्लेटफॉर्म्स कुल 6,817 पेटेंट फाइल कर चुकी है। इनमें 2,393 पेटेंट भारत में और 4,424 पेटेंट विदेशी बाजारों में शामिल हुए हैं। कंपनी के 1,009 पेटेंट को अब तक वैश्विक स्तर पर मंजूरी भी मिल चुकी है, जिनमें 538 भारत और 471 अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्वीकृत हुए हैं।
JioBrain और अगली पीढ़ी की तकनीकों पर भी काम
इतना ही नहीं, कंपनी का काम अभी भी जारी है। जियो ने साफ कहा है कि उसका इनोवेशन केवल मौजूदा नेटवर्क तक सीमित नहीं रहने वाला है। कंपनी 5G/6G रेडियो टेक्नोलॉजी, 5G/6G कोर नेटवर्क, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और एजेंटिक एआई जैसी उभरती तकनीकों पर काम कर रही है। इसके अलावा JioBrain जैसे प्रोजेक्ट भविष्य की AI-आधारित डिजिटल सेवाओं को नई दिशा दे सकते हैं।
क्या भारत के लिए महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि?
इन उपलब्धि के बाद टेक इंडस्ट्री में चर्चाएं तेज हो गई हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि यह सफलता केवल एक कंपनी की नहीं, बल्कि भारत के टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के बदलते स्वरूप की है। जाे दिखाता है कि भारतीय कंपनियां अब केवल विदेशी तकनीकों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि खुद नई तकनीक विकसित कर रही हैं और उन्हें वैश्विक स्तर पर पेटेंट भी करा रही हैं। इससे भारत का नाम दुनिया के प्रमुख इनोवेशन हब के रूप में और मजबूत हो सकता है।