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RO Tips: पुराना वाटर प्यूरीफायर बन सकता है बीमारियों की जड़, जानें वो संकेत जो बताते हैं कि RO बदलना है जरूरी
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Sun, 01 Mar 2026 06:53 PM IST
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सार
Water Purifier Replacement Signs: क्या आप जानते हैं कि एक पुराना और खराब वाटर प्यूरीफायर सेहत सुधारने के बजाय बैक्टीरिया शरीर को बीमार बना सकता है? अगर आपके आरओ के पानी का स्वाद बदल गया है या मशीन बार-बार खराब हो रही है, तो यह समय सतर्क होने का है। जानें वे वार्निंग सिग्नल जो बताते हैं कि अब नया प्यूरीफायर खरीदने का वक्त आ गया है।
वाटर प्यूरीफायर
- फोटो : Freepik
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विस्तार
आज के दौर में वाटर प्यूरीफायर हर घर की जरूरत बन चुके हैं, लेकिन अक्सर हम इसे इंस्टॉल करने के बाद भूल जाते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक पुराने या एक्सपायर हो चुके प्यूरीफायर की इंटरनल पाइप्स और प्लास्टिक बॉडी में समय के साथ बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। अगर आपकी मशीन में भी ये बदलाव दिख रहे हैं, तो तुरंत एक्शन लें:
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1. स्वाद में बदलाव और अजीब महक
अगर गिलास भरते ही पानी से मिट्टी जैसी गंध आए या स्वाद कड़वा महसूस हो, तो समझ लें कि कार्बन फिल्टर और मेम्ब्रेन (Membrane) खराब हो चुका है। ये खराब हो चुके फिल्टर क्लोरीन और अशुद्धियों को सोखना बंद कर देते हैं, जिससे पानी पीने लायक नहीं रहता।
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2. पानी की गति कम होना
क्या पानी की बोतल भरने में अब पहले से ज्यादा वक्त लग रहा है? अगर हां, तो यह भी आपके आरओ के फिल्टर के पूरी तरह चोक होने का संकेत हो सकता है। पानी की गंदगी मेम्ब्रेन की झिल्ली में जमा होकर प्रेशर कम कर देती है। सर्विस के बाद भी सुधार न हो, तो मशीन बदलना ही बेहतर है।
3. टीडीएस लेवल का अनियंत्रित होना
स्वस्थ शरीर के लिए पानी का टीडीएस (Total Dissolved Solids) 50 से 150 के बीच होना चाहिए। इसलिए इसे डिजिटल मीटर से चेक करें, अगर फिल्टर बदलने के बाद भी टीडीएस लेवल बढ़ा आ रहा है, तो इसका मतलब है कि सिस्टम की अंदरूनी मशीनरी अब जवाब दे चुकी है।
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4. पानी का रंग और तैरते हुए कण
शुद्ध पानी कांच की तरह पारदर्शी होना चाहिए। अगर पानी हल्का पीला, मटमैला दिख रहा है या फिर इसमें बारीक कण तैरते नजर आ रहे हैं, तो इससे पेट खराब हो सकता है। इसका मतलब है कि फिल्टर अब बारीक स्तर पर पानी छानने में सक्षम नहीं हैं।
कितने दिन में बदल लेना चाहिए वाटर प्यूरीफायर?
एक अच्छे वाटर प्यूरीफायर की औसत उम्र 5 से 10 साल होती है। अगर आप हर दूसरे महीने मैकेनिक बुला रहे हैं और रिपेयरिंग का बिल नए आरओ की EMI के बराबर पहुंच रहा है, तो समझ लीजिए पुरानी मशीन को बदलने का वक्त आ गया है।
सेहत के साथ न करें समझौता
एक्सपर्ट कहते हैं कि पुराने प्यूरीफायर के अंदरूनी पाइपों में समय के साथ एक चिपचिपी परत (Biofilm) जम जाती है, जिसे साफ करना नामुमकिन होता है। इसलिए, समय पर अपग्रेड करना न केवल आपके पैसे बचाता है, बल्कि परिवार की सेहत की भी रक्षा करता है।