Side Lines on Phones: फोन के साइड में दिखने वाली ये लाइनें क्यों होती हैं? क्या ये सिर्फ डिजाइन का हिस्सा हैं
Side Line on Phones: क्या आपने कभी अपने iPhone या अन्य किसी मेटल बॉडी वाले प्रीमियम स्मार्टफोन्स के किनारों पर बनी छोटी-छोटी लाइनों पर ध्यान दिया है? ज्यादातर लोग इन्हें महज डिजाइन का हिस्सा मानते हैं, लेकिन असल में ये आपके फोन के नेटवर्क की 'लाइफलाइन' हैं। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि ये क्या होते हैं और मेटल बॉडी वाले स्मार्टफोन्स में इनका क्या रोल होता है?
विस्तार
हम सभी हर दिन स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी अपने आईफोन या किसी अन्य प्रीमियम फोन के किनारों में बनी छोटी-छोटी लाइनों पर ध्यान दिया है? कई लोगों को लगता है कि यह सिर्फ फोन के डिजाइन का एक हिस्सा है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है। यह आपके फोन के सबसे जरूरी हिस्सों में से एक है। आइए समझते हैं कि ये लाइनें क्या हैं और ये क्यों इतनी जरूरी हैं।
क्या होती हैं ये लाइनें?
इन लाइनों को एंटीना बैंड्स या एंटीना लाइन कहा जाता है। ये फोन के मेटल फ्रेम (एल्युमिनियम या स्टेनलेस स्टील) के बीच में दिए गए प्लास्टिक या कम्पोजिट मटेरियल के छोटे-छोटे गैप्स या ब्रेक होते हैं।
क्या है इसके पीछे का विज्ञान?
आजकल के ज्यादातर महंगे स्मार्टफोन्स की बॉडी मेटल की बनी होती है और विज्ञान के नियमों के मुताबिक एक पूरी तरह से बंद मेटल का डिब्बा रेडियो सिग्नल्स को अंदर या बाहर नहीं जाने देता। इसे 'फैराडे केज' प्रभाव कहा जाता है। ऐसे में, अगर फोन पूरी तरह से मेटल का बना हो और उसमें ये लाइनें न दी जाएं तो सेल्युलर नेटवर्क, वाई-फाई और ब्लूटूथ के सिग्नल फोन के अंदर मौजूद एंटीना तक पहुंच ही नहीं पाएंगे।
इससे आपका फोन पूरी तरह से नेटवर्क विहीन हो जाएगा। इसलिए, आसान शब्दों में कहें तो मेटल फ्रेम के बीच मौजूद ये प्लास्टिक की लाइनें सिग्नल्स के लिए एक 'खिड़की' की तरह काम करती हैं, जिसकी मदद से नेटवर्क बिना किसी रुकावट के फोन के अंदर-बाहर आसानी से आ-जा सकता है।
इन एंटीना लाइनों से जुड़ी कुछ खास बातें:
अगर इन एंटीना लाइनों की बनावट और जगह की बात करें तो पुराने मॉडल्स में ये आमतौर पर फोन के ऊपर और नीचे के किनारों पर साफ दिखाई देती थीं। वहीं, आईफोन 12 और उसके बाद के नए मॉडल्स में 5G mmWave की शानदार स्पीड के लिए किनारों पर एक अलग अंडाकार कटआउट भी दिया जाने लगा है।
इन लाइनों का काम सिर्फ जगह देना नहीं है, बल्कि ये फोन के मेटल फ्रेम को अलग-अलग हिस्सों में बांट देती हैं, ताकि आपका डिवाइस 4G, 5G और वाई-फाई जैसे अलग-अलग सिग्नल्स को एक साथ बेहतरीन तरीके से कैच कर सके। चूंकि ये पूरी तरह से फोन के बाहरी डिजाइन का हिस्सा होती हैं और सिग्नल खींचने का काम करती हैं, इसलिए अगर आप अपने फोन पर बहुत मोटा कवर लगाते हैं तो कई बार इसकी वजह से नेटवर्क में रुकावट या सिग्नल ड्रॉप की दिक्कत आ सकती है।
क्या ये सिर्फ आईफोन में होती हैं?
ये लाइनें जिन्हें हम एंटीना बैंड्स कहते हैं वे सिर्फ आईफोन में ही नहीं होती। बल्कि सैमसंग, गूगल पिक्सेल और अन्य कंपनियों के उन सभी स्मार्टफोन्स में होती हैं जिनमें मेटल फ्रेम का इस्तेमाल होता है। स्मार्टफोन्स के अलावा, ये मेटल वाले आईपैड और सेल्युलर एपल वॉच जैसे डिवाइस में भी आसानी से देखी जा सकती हैं।
हालांकि, यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि जिन स्मार्टफोन्स की पूरी बॉडी प्लास्टिक की बनी होती है, उनमें इन खास एंटीना लाइनों की कोई जरूरत नहीं होती, क्योंकि प्लास्टिक रेडियो सिग्नल्स के रास्ते में कोई रुकावट पैदा नहीं करता है और नेटवर्क आसानी से आर-पार जा सकता है।
स्क्रीन की लाइनों से कन्फ्यूज न हों
इस सबके बीच एक बात का खास ध्यान रखें कि इन एंटीना लाइनों को कभी भी फोन की स्क्रीन पर दिखने वाली लाइनों से कन्फ्यूज न करें। अगर आपको कभी अपने फोन की स्क्रीन के अंदर पतली, चमकीली या काली सीधी लाइनें दिखाई देती हैं तो वे एंटीना बैंड नहीं हैं।
दरअसल, स्क्रीन पर दिखने वाली ये लाइनें किसी हार्डवेयर की खराबी, सॉफ्टवेयर की दिक्कत या फिर स्क्रीन के डैमेज होने का सीधा संकेत होती हैं। हमेशा याद रखें कि एंटीना बैंड्स कभी भी स्क्रीन के अंदर नहीं होते, बल्कि वे हमेशा फोन के बाहरी मेटल फ्रेम पर ही मौजूद होते हैं।
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