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Ayodhya News: ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्ति पर, प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने की उठी मांग
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 24 May 2026 11:13 PM IST
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अयोध्या। जिले की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त होने जा रहा है। पंचायत चुनाव समय से न होने की स्थिति में गांवों में यह चर्चा तेज हो गई है कि पंचायतों का प्रशासनिक दायित्व किसे सौंपा जाएगा। इसी को लेकर रविवार को सोहावल विकासखंड की ग्राम पंचायत मुस्तफाबाद में ग्रामीणों और ग्राम प्रधानों के बीच चर्चा हुई। इसमें अधिकतर लोगों ने मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त किए जाने की मांग उठाई।
प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं और प्रधानों की मांग पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद होने की संभावना है। ऐसे में लंबे समय तक एक एडीओ पंचायत के लिए 50 से अधिक ग्राम पंचायतों का संचालन करना व्यावहारिक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानों को ही प्रशासक बनाया जाता है तो विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी। जिले की 772 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। जिले व प्रदेश के सभी प्रधानों ने कोरोना के समय इतनी मेहनत किया। अब सरकार को चाहिए कि प्रधानों को उपहार देते हुए प्रधान को गांव का प्रशासक बना देना चाहिए। प्रधान कोटडीह सैरया राजेश तिवारी ने कहा कि ग्राम प्रधान ही गांव की समस्याओं और जरूरतों को सही तरीके से समझ सकता है। यदि सरकारी अधिकारियों को प्रशासक बनाया गया तो आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी प्रशासक नियुक्त किए गए थे, लेकिन व्यवस्था प्रभावी नहीं रही।
प्रधान सारंगापुर रामचंद्र रावत ने कहा कि ग्राम प्रधान गांव की भौगोलिक स्थिति और नागरिकों की समस्याओं से भलीभांति परिचित होता है। किसी भी समस्या पर ग्रामीण सबसे पहले प्रधान के पास ही पहुंचते हैं। वहीं हाजीपुर बरसेंडी के अमन प्रताप ने कहा कि जब एक सचिव बिना प्रधान के एक ग्राम पंचायत सही ढंग से नहीं चला पा रहा है, तो एक एडीओ पंचायत 50 से अधिक ग्राम सभाओं का संचालन कैसे करेगा। प्रधान मुस्तफाबाद मो. नदीम ने कहा कि ग्राम पंचायत की समस्याओं को ग्राम प्रधान ही बेहतर ढंग से समझ सकता है।
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प्रधान प्रतिनिधि रहीमपुर बदौली शेखर सिंह ने कहा कि प्रधान गांव से भावनात्मक रूप से जुड़ा होता है और हर समय ग्रामीणों के बीच उपलब्ध रहता है। ग्रामीण मो. उजेर, रामसजीवन, कर्मचंद, विकास, डब्लू और राममिलन ने भी कहा कि गांव के विकास और जनसमस्याओं के समाधान के लिए प्रधानों को ही प्रशासक बनाया जाना चाहिए, क्योंकि उन्हें गांव की पूरी जानकारी और जनता के प्रति जवाबदेही होती है।
प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं और प्रधानों की मांग पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद होने की संभावना है। ऐसे में लंबे समय तक एक एडीओ पंचायत के लिए 50 से अधिक ग्राम पंचायतों का संचालन करना व्यावहारिक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानों को ही प्रशासक बनाया जाता है तो विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी। जिले की 772 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। जिले व प्रदेश के सभी प्रधानों ने कोरोना के समय इतनी मेहनत किया। अब सरकार को चाहिए कि प्रधानों को उपहार देते हुए प्रधान को गांव का प्रशासक बना देना चाहिए। प्रधान कोटडीह सैरया राजेश तिवारी ने कहा कि ग्राम प्रधान ही गांव की समस्याओं और जरूरतों को सही तरीके से समझ सकता है। यदि सरकारी अधिकारियों को प्रशासक बनाया गया तो आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी प्रशासक नियुक्त किए गए थे, लेकिन व्यवस्था प्रभावी नहीं रही।
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प्रधान सारंगापुर रामचंद्र रावत ने कहा कि ग्राम प्रधान गांव की भौगोलिक स्थिति और नागरिकों की समस्याओं से भलीभांति परिचित होता है। किसी भी समस्या पर ग्रामीण सबसे पहले प्रधान के पास ही पहुंचते हैं। वहीं हाजीपुर बरसेंडी के अमन प्रताप ने कहा कि जब एक सचिव बिना प्रधान के एक ग्राम पंचायत सही ढंग से नहीं चला पा रहा है, तो एक एडीओ पंचायत 50 से अधिक ग्राम सभाओं का संचालन कैसे करेगा। प्रधान मुस्तफाबाद मो. नदीम ने कहा कि ग्राम पंचायत की समस्याओं को ग्राम प्रधान ही बेहतर ढंग से समझ सकता है।
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