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अयोध्या प्रकरण: 140 पन्नों की SIT रिपोर्ट से बढ़ी हलचल, चढ़ावा चोरी मामले के विस्तृत तथ्य और साक्ष्य जोड़े गए
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Sun, 21 Jun 2026 05:09 PM IST
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सार
जांच रिपोर्ट लगभग 140 पन्नों की तैयार की गई है, जिसमें मामले से जुड़े विभिन्न तथ्यों और साक्ष्यों का विस्तृत उल्लेख किया गया है। हालांकि एसआईटी के करीब 20 सहयोगी सदस्य अभी भी राम जन्मभूमि परिसर में मौजूद हैं।
अयोध्या का राम मंदिर।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्र से जुड़े गबन प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी शनिवार देर रात अयोध्या से लखनऊ के लिए रवाना हो गई। सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट लगभग 140 पन्नों की तैयार की गई है, जिसमें मामले से जुड़े विभिन्न तथ्यों और साक्ष्यों का विस्तृत उल्लेख किया गया है। हालांकि एसआईटी के करीब 20 सहयोगी सदस्य अभी भी राम जन्मभूमि परिसर में मौजूद हैं और जांच से जुड़ी सूचनाएं एकत्र कर प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
सूत्रों के मुताबिक राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव से भी एक बार फिर पूछताछ की गई। बंद कमरे में करीब तीन घंटे तक चली इस पूछताछ की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि रिपोर्ट के आधार पर कई लोगों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है। दानपात्र मामले में लापरवाही अथवा अनियमितता पाए जाने पर कुछ सेवादारों की सेवाएं समाप्त किए जाने की भी संभावना जताई जा रही है।
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दर्ज कराई जा सकती है एफआईआर
श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में गबन के सबूत मिले हैं। इसमें गणना और बैंक कर्मियों के साथ टिन्नू यादव की भूमिका सामने आई है। इन पर जल्द एफआईआर दर्ज हो सकती है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच में ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा के अलावा निर्माण सहायक गोपाल राव की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। दोनों के खिलाफ कई गवाह सामने आए हैं और ठोस साक्ष्य भी मिले हैं।
एसआईटी की जांच में कुछ ऐसे तथ्य भी सामने आए हैं, जिनमें मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय भी सवालों के घेरे में हैं। अयोध्या से शनिवार को लखनऊ लौटी एसआईटी सोमवार को मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंप सकती है। उसके बाद दोषियों और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो सकती है। 13 जून को गठित एसआईटी जांच के लिए 15 जून को अयोध्या पहुंची थी।
इसमें शामिल लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज आईजी किरन एस व विशेष सचिव वित्त नील रतन ने छह दिन में ट्रस्ट के पदाधिकारियों, बैंक अधिकारियों, गणना कर्मियों व पकड़े गए संदिग्धों से लंबी पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावे की राशि में चोरी की पुष्टि हुई है। इसे संदिग्धों ने स्वीकारा भी है।