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राम मंदिर दान राशि में गड़बड़ी: पूरे सिस्टम की कड़ियां जोड़ रही एसआईटी, निगरानी तंत्र की भी हो रही पड़ताल

नितिन मिश्र, अमर उजाला Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Wed, 17 Jun 2026 08:57 PM IST
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सार

जांच के दौरान कई ऐसे बिंदु सामने आए हैं जिनकी अब तक सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं हुई थी। इन्हीं तथ्यों के आधार पर एसआईटी अब यह समझने का प्रयास कर रही है कि आखिर ऐसी परिस्थितियां कैसे बनीं, जिनमें अनियमितताओं को अंजाम दिया गया।

Ayodhya: SIT piecing together the entire system's links during the investigation
अयोध्या का राम मंदिर। - फोटो : amar ujala
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विस्तार

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की दान राशि में गड़बड़ी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आने की चर्चा तेज होती जा रही है। जांच के तीसरे दिन एसआईटी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उसकी पड़ताल केवल धनराशि के कथित गबन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रशासनिक, प्रबंधकीय और निगरानी तंत्र की गहन समीक्षा की जा रही है।



सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान कई ऐसे बिंदु सामने आए हैं जिनकी अब तक सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं हुई थी। इन्हीं तथ्यों के आधार पर एसआईटी अब यह समझने का प्रयास कर रही है कि आखिर ऐसी परिस्थितियां कैसे बनीं, जिनमें अनियमितताओं को अंजाम दिया गया। हालांकि वे चौंकाने वाले तथ्य क्या हैं, ये अब तक पता नहीं चल सके हैं। लेकिन सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी दान संग्रह, धनराशि की गणना, रख-रखाव, निगरानी और रिपोर्टिंग से जुड़ी पूरी प्रक्रिया की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
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सूत्रों के अनुसार, एसआईटी विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका का भी परीक्षण कर रही है। विशेष रूप से यह देखा जा रहा है कि संवेदनशील व्यवस्थाओं की निगरानी किस स्तर पर होती थी, निर्णय लेने की प्रक्रिया कितनी प्रभावी थी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की वास्तविक स्थिति क्या थी। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि किसी शिकायत, संदेह या संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर कार्रवाई की व्यवस्था कितनी मजबूत थी और उसका पालन किस हद तक किया गया। माना जा रहा है कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब दे सकती है।

कौन था जिम्मेदार, कहां हुई चूक
एसआईटी की जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जवाबदेही तय करना माना जा रहा है। जांच की दिशा से यह साफ है कि एसआईटी अब केवल यह नहीं पूछ रही कि किसने किया, बल्कि उससे बड़ा सवाल तलाश रही है-यह संभव कैसे हुआ। यही सवाल आने वाले दिनों में कई चौंकाने वाले खुलासों का आधार बन सकता है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित अनियमितताओं के पीछे किसी व्यक्ति विशेष की भूमिका अधिक थी या फिर व्यवस्थागत कमजोरियों ने इस स्थिति को जन्म दिया। इसी कारण पूरी प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था को जांच के दायरे में रखा गया है।

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