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राम मंदिर के चढ़ावे में गबन: सबसे बड़ा सवाल, आखिर अब तक क्यों नहीं दर्ज कराई एफआईआर; अब एसआईटी आगे, सब पीछे

अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: Sharukh Khan Updated Mon, 15 Jun 2026 07:01 AM IST
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सार

राम मंदिर के चढ़ावे में गबन मामले में सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर अब तक एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई गई। चंदे की राशि में हेरफेर कर गबन करने के मामले को सात दिन बीत गए हैं। संदिग्ध पकड़े गए हैं, रिकवरी हुई है लेकिन ट्रस्ट ने केस दर्ज नहीं कराया।

Embezzlement Ram Mandir donation funds: The biggest question why hasn't an FIR been filed yet
Ayodhya Ram Mandir - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

श्रीराम मंदिर के चंदा गबन करने के मामले में अब तक एफआईआर दर्ज न कराना सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है जो ट्रस्ट ने केस दर्ज नहीं कराया है। गबन के साक्ष्य मिल चुके हैं, बड़ी रकम भी बरामद हुई और संदिग्ध भी पकड़े गए, उसके भी रिपोर्ट न करना गंभीर सवाल खड़े करता है। सीधेतौर पर अब ट्रस्ट के बड़े जिम्मेदारों की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

 

प्रकरण सामने आने के बाद ट्रस्ट ने मामला दबाए रखा था। जब मीडिया में उजागर हुआ तो ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने चुप्पी साध ली। जो पदाधिकारी आएदिन तमाम बयान देते रहते थे वह अब सामने आने को तैयार नहीं हैं। इस बीच ट्रस्ट ने खुद ही संदिग्ध पकड़े। उनकी निशानदेही पर रकम बरामद की। मतलब इससे साबित हो चुका है कि चंदा राशि चोरी की गई। ऐसे में ट्रस्ट को मामले में केस दर्ज करवाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। एफआईआर अब तक क्यों नहीं दर्ज कराई जा रही है? इसकी वजह नहीं पता चल रही है। हालांकि ऐसे में कयास है कि किसी न किसी को बचाने के लिए पर्दा डाला जा रहा है।

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अब एसआईटी आगे, सब पीछे

मामले में भले ही एसआईटी गठित कर दी गई हो लेकिन मामला आपराधिक है। इसलिए केस दर्ज होना चाहिए थे। उसके साथ एसआईटी की भी जांच जारी रहती। चूंकि अब एसआईटी गठित हो चुकी है तो पूरा मामला पीछे छूट जाएगा, खासकर एफआईआर न दर्ज करवाने वाला। अब हर सवाल पर यही होगा कि एसआईटी जांच कर रही है, उसके बाद ही कुछ कार्रवाई की जाएगी।

ये किसी ट्रस्ट का काम नहीं

जिस तरह से अब तक संदिग्ध पकड़े गए और फिर नकदी बरामद की गई, ये कार्य करना किसी ट्रस्ट या निजी संस्था आदि का नहीं है। 

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विशेषज्ञों का कहना है कि चोरी हुई है तो पहले एफआईआर करवानी चाहिए। फिर पुलिस या अन्य जांच एजेंसी आगे की कार्रवाई करते हुए आरोपियों से पूछताछ, बरामदगी आदि की कार्रवाई करती।
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