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Ayodhya News: धूल फांक रहीं चार मशीनें, आईसीयू में नहीं हो रही एबीजी जांच
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 03 May 2026 10:55 PM IST
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अयोध्या। मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती रोगियों की एबीजी जांच (आर्टेरियल ब्लड गैस) कई दिन से ठप है। यह जांच गंभीर रोगियों में ऑक्सीजन, कॉर्बन डाइऑक्साइड और खून की अम्लता जानने के लिए जरूरी है। इसके लिए चार मशीनें स्थापित हैं, जो अनुबंध खत्म होने के बाद लैब में धूल फांक रही हैं।
मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में 15 बेड का आईसीयू संचालित है, जो हर समय रोगियों से फुल रहता है। यहां गंभीर मरीजों की निगरानी के लिए उनकी एबीजी जांच कराई जाती है। इसके जरिए शरीर में ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड और एसिड-बेस संतुलन की स्थिति का पता चलता है। हार्ट, फेफड़े, किडनी और ट्रॉमा के गंभीर मरीजों के लिए भी यह जांच जरूरी मानी जाती है। रेड और येलो जोन में भर्ती मरीजों के लिए यह आवश्यक है। इसके बावजूद पिछले कई दिन से ठप यह जांच सेवा बहाल नहीं हो सकी है। ऐसे में तीमारदारों को निजी केंद्र की शरण में जाना पड़ रहा है।
मेडिसिन आईसीयू और पीओसी लैब में लगी हैं मशीनें
सूत्रों के अनुसार मेडिसिन आईसीयू में दो और पीओसी लैब में दो मशीन स्थापित है। पीओसी लैब की मशीनों को चलाने के लिए अनुबंध खत्म हो गया है और मेडिसिन आईसीयू में रीजेंट्स खत्म होने का दावा किया गया है। इस तरह सिस्टम की खामियों और समन्वय न होने से मशीन होते हुए भी रोगियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
निजी केंद्र पर चुका रहे एक हजार से 1400 रुपये
आईसीयू के रोगियों की सतत निगरानी के लिए कई बार तो छह से आठ घंटे के अंतराल पर ही उनकी एबीजी जांच कराई जाती है। मेडिकल कॉलेज में यह सुविधा बंद होने से तीमारदारों को बाहर स्थित निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है, जहां उन्हें एक हजार से 1,400 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं।
नाम छपने से घबराते रहे तीमारदार
हमारी टीम ने आईसीयू में भर्ती रोगियों के तीमारदारों से संपर्क किया तो सभी ने दबी जुबान अपना दर्द बयां किया। पड़ोसी जिले के एक तीमारदार ने बताया कि एबीजी सहित कुछ अन्य जांच बाहर से कराई गई, जिसमें चार हजार रुपये लगे। गनीमत है कि आईसीयू में बेड मिल गया है, इसलिए नाम न छापिए, वरना मरीज को दिक्कत हो सकती है। इसी तरह कुछ अन्य मरीज बाहर की एक लैब की जांच रिपोर्ट लिए रहे, लेकिन नाम न छापने की मिन्नतें करते रहे।
बोले अधिकारी...
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि एबीजी जांच ठप होने की जानकारी मिली है, लेकिन इसकी वजह किसी ने नहीं बताई है। मामले की जानकारी करके व प्राचार्य से वार्ता करके जांच बहाल कराई जाएगी। वहीं, मीडिया प्रभारी डॉ. डीके सिंह ने बताया कि रीजेंट्स न होने से आईसीयू की जांच ठप है, जल्द ही रीजेंट्स पहुंचने का दावा किया गया है।
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मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में 15 बेड का आईसीयू संचालित है, जो हर समय रोगियों से फुल रहता है। यहां गंभीर मरीजों की निगरानी के लिए उनकी एबीजी जांच कराई जाती है। इसके जरिए शरीर में ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड और एसिड-बेस संतुलन की स्थिति का पता चलता है। हार्ट, फेफड़े, किडनी और ट्रॉमा के गंभीर मरीजों के लिए भी यह जांच जरूरी मानी जाती है। रेड और येलो जोन में भर्ती मरीजों के लिए यह आवश्यक है। इसके बावजूद पिछले कई दिन से ठप यह जांच सेवा बहाल नहीं हो सकी है। ऐसे में तीमारदारों को निजी केंद्र की शरण में जाना पड़ रहा है।
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मेडिसिन आईसीयू और पीओसी लैब में लगी हैं मशीनें
सूत्रों के अनुसार मेडिसिन आईसीयू में दो और पीओसी लैब में दो मशीन स्थापित है। पीओसी लैब की मशीनों को चलाने के लिए अनुबंध खत्म हो गया है और मेडिसिन आईसीयू में रीजेंट्स खत्म होने का दावा किया गया है। इस तरह सिस्टम की खामियों और समन्वय न होने से मशीन होते हुए भी रोगियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
निजी केंद्र पर चुका रहे एक हजार से 1400 रुपये
आईसीयू के रोगियों की सतत निगरानी के लिए कई बार तो छह से आठ घंटे के अंतराल पर ही उनकी एबीजी जांच कराई जाती है। मेडिकल कॉलेज में यह सुविधा बंद होने से तीमारदारों को बाहर स्थित निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है, जहां उन्हें एक हजार से 1,400 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं।
नाम छपने से घबराते रहे तीमारदार
हमारी टीम ने आईसीयू में भर्ती रोगियों के तीमारदारों से संपर्क किया तो सभी ने दबी जुबान अपना दर्द बयां किया। पड़ोसी जिले के एक तीमारदार ने बताया कि एबीजी सहित कुछ अन्य जांच बाहर से कराई गई, जिसमें चार हजार रुपये लगे। गनीमत है कि आईसीयू में बेड मिल गया है, इसलिए नाम न छापिए, वरना मरीज को दिक्कत हो सकती है। इसी तरह कुछ अन्य मरीज बाहर की एक लैब की जांच रिपोर्ट लिए रहे, लेकिन नाम न छापने की मिन्नतें करते रहे।
बोले अधिकारी...
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि एबीजी जांच ठप होने की जानकारी मिली है, लेकिन इसकी वजह किसी ने नहीं बताई है। मामले की जानकारी करके व प्राचार्य से वार्ता करके जांच बहाल कराई जाएगी। वहीं, मीडिया प्रभारी डॉ. डीके सिंह ने बताया कि रीजेंट्स न होने से आईसीयू की जांच ठप है, जल्द ही रीजेंट्स पहुंचने का दावा किया गया है।
