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Ayodhya News: नेपाल समेत देश के कई राज्यों से पहुंचे बटुक का हुआ यज्ञोपवीत संस्कार
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सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार कार्यक्रम में मौजूद बटुक।
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अयोध्या। संजीवनी परिषद गुरुकुल में बृहस्पतिवार को सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें नेपाल सहित देश के विभिन्न राज्यों और उत्तर प्रदेश के कई जिलों से 41 बटुकों ने वैदिक रीति-विधान के अनुसार उपनयन संस्कार ग्रहण किया। यह कार्यक्रम वत्साचार्य महाराज की निगरानी में संपन्न हुआ। इसमें बड़ी संख्या में अभिभावक, विद्वान आचार्य और श्रद्धालु भी शामिल हुए।
सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार का उद्देश्य नई पीढ़ी को वैदिक परंपराओं, संस्कृत भाषा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना है। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए संस्कार में बटुकों को सनातन परंपरा, अनुशासन, अध्ययन और सामाजिक उत्तरदायित्व का महत्व बताया गया। वत्साचार्य महाराज ने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में संस्कृत और वैदिक शिक्षा का संरक्षण समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति की जड़ों को मजबूत बनाने के लिए ऐसे आयोजनों की निरंतरता जरूरी है। इससे युवा पीढ़ी अपने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ी रहती है।
कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों ने भी संस्कृत शिक्षा और सनातन संस्कारों के संरक्षण को समाज की साझा जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि सामूहिक आयोजन सामाजिक समरसता को बढ़ावा देते हैं। आयोजन के दौरान वैदिक परंपरा के अनुरूप सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए।
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सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार का उद्देश्य नई पीढ़ी को वैदिक परंपराओं, संस्कृत भाषा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना है। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए संस्कार में बटुकों को सनातन परंपरा, अनुशासन, अध्ययन और सामाजिक उत्तरदायित्व का महत्व बताया गया। वत्साचार्य महाराज ने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में संस्कृत और वैदिक शिक्षा का संरक्षण समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति की जड़ों को मजबूत बनाने के लिए ऐसे आयोजनों की निरंतरता जरूरी है। इससे युवा पीढ़ी अपने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ी रहती है।
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कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों ने भी संस्कृत शिक्षा और सनातन संस्कारों के संरक्षण को समाज की साझा जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि सामूहिक आयोजन सामाजिक समरसता को बढ़ावा देते हैं। आयोजन के दौरान वैदिक परंपरा के अनुरूप सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए।
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