UP: सप्त मंडपम के लिए हो सकती दलित पुजारियों की नियुक्ति, 22 जुलाई को नए पुजारियों की भर्ती पर फैसला संभव
राम मंदिर परिसर में नए पुजारियों की भर्ती पर 22 जुलाई की बैठक में निर्णय संभव है। सूत्रों के अनुसार पहली बार दलित समुदाय के योग्य वेदपाठी पुजारियों को सप्त मंडपम के मंदिरों में सेवा का अवसर मिल सकता है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और सामाजिक समरसता को ध्यान में रखकर यह पहल की जा रही है।
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट राम मंदिर परिसर में नए पुजारियों की नियुक्ति की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार 22 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट बैठक के बाद पुजारियों की नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इस भर्ती में पहली बार दलित समुदाय से आने वाले पुजारियों को भी शामिल किए जाने की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो इसे राम मंदिर परिसर में सामाजिक समरसता के संदेश को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित नियुक्तियों में दलित समुदाय के पुजारियों को राम मंदिर परिसर स्थित सप्त मंडपम के मंदिरों में पूजन-अर्चन की जिम्मेदारी दी जा सकती है। सप्त मंडपम में महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि अगस्त्य, महर्षि विश्वामित्र, निषादराज, माता शबरी और माता अहिल्या के मंदिर स्थापित हैं। इन सभी पात्रों और ऋषियों को भारतीय परंपरा में सामाजिक समरसता और समावेश का प्रतीक माना जाता है।
पुजारियों को अवसर देने पर विचार किया जा रहा
सूत्र बताते हैं कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और मंदिर परिसर के विस्तार को देखते हुए नए पुजारियों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी आवश्यकता के साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व को भी ध्यान में रखते हुए दलित समुदाय के योग्य वेदपाठी पुजारियों को अवसर देने पर विचार किया जा रहा है।
हाल ही में ट्रस्ट ने दलित समुदाय से आने वाले डॉ. कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे में प्रस्तावित पुजारी नियुक्तियों को भी ट्रस्ट की समरसता और समावेश की सोच से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि इस संबंध में अभी तक ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। अंतिम निर्णय 22 जुलाई की बैठक में लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
राम मंदिर में अभी 35 पुजारी दे रहे हैं सेवाएं
वर्तमान में राम मंदिर परिसर में कुल 35 पुजारी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें 20 पुजारी रामलला और राम दरबार में पूजा-अर्चना करते हैं। सुबह और शाम की दो शिफ्टों में 10-10 पुजारी तैनात रहते हैं। प्रत्येक शिफ्ट में पांच पुजारी रामलला और पांच पुजारी राम दरबार में पूजन कराते हैं, जबकि आरती की जिम्मेदारी सभी पुजारियों के बीच बारी-बारी से निर्धारित होती है। शेष 15 पुजारी परकोटा और सप्त मंडपम के मंदिरों में पूजा-अर्चना का दायित्व निभाते हैं।