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UP: SIT ध्यान रखे… कहीं जांच की रिपोर्ट ही चोरी न हो जाए, राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अखिलेश का तंज

अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Sun, 21 Jun 2026 05:23 PM IST
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सार


सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर प्रकरण में एसआईटी रिपोर्ट को लेकर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि टीम सावधान रहे कहीं जांच रिपोर्ट ही चोरी न हो जाए।

UP: The SIT should be careful... lest the investigation report itself gets stolen Akhilesh's jibe
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : सपा यूट्यूब चैनल।
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विस्तार

राम मंदिर के चढ़ावे में गबन को लेकर भाजपा व राममंदिर ट्रस्ट से जुड़े हुए लोग विपक्ष के निशाने पर हैं। मामले में राज्य सरकार व केंद्र सरकार पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि एसआईअी का गठन हो गया। जांच भी हो रही है पर अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।



मामले पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को तंज कसा है। उन्होंने एक्स पर कहा कि एसआईटी ध्यान रखे… कहीं जांच की रिपोर्ट ही चोरी न हो जाए। फिर कहेंगे 15 दिन और इंतज़ार कर लो। दिन इसलिए बढ़ा रहे हैं, क्योंकि सबूत ठिकाने लगा रहे हैं।
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उल्लेखनीय है कि राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर अखिलेश यादव ने पहला ट्वीट किया था तब इसे लेकर जमकर हंगामा हुआ और खूब आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। बताया जा रहा है कि एसआईटी की टीम प्रकरण में पूछताछ कर लखनऊ लौट चुकी है और अब रिपोर्ट को अंतिम रूप दे रही है। बताया जा रहा है कि एसआईटी की टीम सोमवार को रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप सकती है।

लखनऊ पहुंची एसआईटी की टीम

गबन प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी शनिवार देर रात अयोध्या से लखनऊ के लिए रवाना हो गई। सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट लगभग 140 पन्नों की तैयार की गई है, जिसमें मामले से जुड़े विभिन्न तथ्यों और साक्ष्यों का विस्तृत उल्लेख किया गया है। हालांकि एसआईटी  के करीब 20 सहयोगी सदस्य अभी भी राम जन्मभूमि परिसर में मौजूद हैं और जांच से जुड़ी सूचनाएं एकत्र कर प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

सूत्रों के मुताबिक राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव से भी एक बार फिर पूछताछ की गई। बंद कमरे में करीब तीन घंटे तक चली इस पूछताछ की वीडियोग्राफी भी कराई गई।

जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि रिपोर्ट के आधार पर कई लोगों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है। दानपात्र मामले में लापरवाही अथवा अनियमितता पाए जाने पर कुछ सेवादारों की सेवाएं समाप्त किए जाने की भी संभावना जताई जा रही है।

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