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Ghazipur News: अधिवक्ता और दस्तावेज लेखकों का कार्य बहिष्कार, रजिस्ट्री कराने वाले हुए परेशान
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गाजीपुर। सदर उपनिबंधन कार्यालय में शुक्रवार को तीसरे दिन भी बैनामा दस्तावेज लेखक संघ और सिविल बार संघ के अधिवक्ताओं का कार्य बहिष्कार कर धरना जारी रहा।
इसकी वजह से तीसरे दिन भी कार्यालय में रजिस्ट्री का कामकाज पूरी तरह से ठप रहा, इससे भूमि की रजिस्ट्री कराने वालों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
बैनामा दस्तावेज लेखक संघ के अध्यक्ष अशोक गुप्ता ने बताया कि जिले के सभी तहसील क्षेत्र की आधे से अधिक खतौनियों में अभी तक अंश निर्धारण ही नहीं हो सका है।
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इसके बाद भी जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने पांच अगस्त को सभी उपजिलाधिकारियों और सब रजिस्ट्रारों को भूमि के बैनामे से संबंधित जांच के निर्देश दिए था। इसमें बैनामे से पहले विक्रेता के अंश का निर्धारण, सर्किल रेट के मुकाबले वास्तविक लेनदेन और भूमि पर कब्जे की स्थिति की जांच अनिवार्य की गई है। अंश निर्धारण की जांच अनिवार्य करने से रजिस्ट्री प्रक्रिया जटिल हो गई है, इससे क्रेता और विक्रेता दोनों को परेशानी उठानी पड़ेगी।
इसको लेकर एक प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को लोक निर्माण विभाग के अतिथि गृह के सभागार में प्रदेश के स्टांप व न्यायालय शुल्क व पंजीयन विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल से मुलाकात कर समस्या से अवगत कराया था, जिसपर उन्होंने तो दिया है।
पर जबतक जिलाधिकारी द्वारा लिखित रूप से इस शासनादेश को वापस नहीं लिया जाता तबतक हमारा आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कुमार तिवारी, पंकज पांडेय, कमलेश सिंह यादव, आनंद कुमार पांडेय, मोती यादव, रविंद्र यादव आदि मौजूद रहे।
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इसकी वजह से तीसरे दिन भी कार्यालय में रजिस्ट्री का कामकाज पूरी तरह से ठप रहा, इससे भूमि की रजिस्ट्री कराने वालों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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बैनामा दस्तावेज लेखक संघ के अध्यक्ष अशोक गुप्ता ने बताया कि जिले के सभी तहसील क्षेत्र की आधे से अधिक खतौनियों में अभी तक अंश निर्धारण ही नहीं हो सका है।
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इसके बाद भी जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने पांच अगस्त को सभी उपजिलाधिकारियों और सब रजिस्ट्रारों को भूमि के बैनामे से संबंधित जांच के निर्देश दिए था। इसमें बैनामे से पहले विक्रेता के अंश का निर्धारण, सर्किल रेट के मुकाबले वास्तविक लेनदेन और भूमि पर कब्जे की स्थिति की जांच अनिवार्य की गई है। अंश निर्धारण की जांच अनिवार्य करने से रजिस्ट्री प्रक्रिया जटिल हो गई है, इससे क्रेता और विक्रेता दोनों को परेशानी उठानी पड़ेगी।
इसको लेकर एक प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को लोक निर्माण विभाग के अतिथि गृह के सभागार में प्रदेश के स्टांप व न्यायालय शुल्क व पंजीयन विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल से मुलाकात कर समस्या से अवगत कराया था, जिसपर उन्होंने तो दिया है।
पर जबतक जिलाधिकारी द्वारा लिखित रूप से इस शासनादेश को वापस नहीं लिया जाता तबतक हमारा आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कुमार तिवारी, पंकज पांडेय, कमलेश सिंह यादव, आनंद कुमार पांडेय, मोती यादव, रविंद्र यादव आदि मौजूद रहे।