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Ghazipur News: बहू की हत्या में दोषी सास को उम्रकैद
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गाजीपुर। अपर सत्र न्यायाधीश/ईसी एक्ट अलख कुमार की अदालत ने बृहस्पतिवार को बहू की हत्या में सास को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। सजा सुनाने के बाद दोषी को जेल भेज दिया गया।
अभियोजन के अनुसार, मरदह थाना क्षेत्र के दुर्गखुशी कोइरी पूरा निवासी बीरेंद्र गोड़ ने 2015 में अपनी पुत्री संध्या की शादी कासिमाबाद थाना क्षेत्र के देवली गांव निवासी मनीष गोड़ से की थी। शादी के बाद संध्या ने कई बार मायके आकर बताया था कि ससुराल पक्ष द्वारा 50 हजार रुपये दहेज की मांग कर पति, सास, देवर और ननद उसे प्रताड़ित करते हैं।
घटना 6 अक्टूबर 2020 को सास बिंदु देवी, देवर सुनीत गोड़ और ननद ने संध्या को जलाकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। घटना की सूचना गांव के पूर्व प्रधान सोनू गुप्ता ने पीड़िता के मायके पक्ष को दी। परिजन मौके पर पहुंचे और संध्या को इलाज के लिए मऊ अस्पताल ले गए, जहां मजिस्ट्रेट ने उसका बयान दर्ज किया। बयान में संध्या ने स्पष्ट रूप से सास बिंदु देवी, देवर सुनीत और ननद पर जलाने का आरोप लगाया। बाद में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
पीड़ित पिता की तहरीर पर थाना कासिमाबाद में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। विचारण के दौरान देवर और ननद को किशोर अपचारी घोषित कर उनके प्रकरण की पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड को भेज दी गई, जबकि सास बिंदु देवी के विरुद्ध मुकदमे की सुनवाई जारी रही। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 10 गवाह पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने बिंदु देवी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।
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अभियोजन के अनुसार, मरदह थाना क्षेत्र के दुर्गखुशी कोइरी पूरा निवासी बीरेंद्र गोड़ ने 2015 में अपनी पुत्री संध्या की शादी कासिमाबाद थाना क्षेत्र के देवली गांव निवासी मनीष गोड़ से की थी। शादी के बाद संध्या ने कई बार मायके आकर बताया था कि ससुराल पक्ष द्वारा 50 हजार रुपये दहेज की मांग कर पति, सास, देवर और ननद उसे प्रताड़ित करते हैं।
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घटना 6 अक्टूबर 2020 को सास बिंदु देवी, देवर सुनीत गोड़ और ननद ने संध्या को जलाकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। घटना की सूचना गांव के पूर्व प्रधान सोनू गुप्ता ने पीड़िता के मायके पक्ष को दी। परिजन मौके पर पहुंचे और संध्या को इलाज के लिए मऊ अस्पताल ले गए, जहां मजिस्ट्रेट ने उसका बयान दर्ज किया। बयान में संध्या ने स्पष्ट रूप से सास बिंदु देवी, देवर सुनीत और ननद पर जलाने का आरोप लगाया। बाद में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
पीड़ित पिता की तहरीर पर थाना कासिमाबाद में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। विचारण के दौरान देवर और ननद को किशोर अपचारी घोषित कर उनके प्रकरण की पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड को भेज दी गई, जबकि सास बिंदु देवी के विरुद्ध मुकदमे की सुनवाई जारी रही। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 10 गवाह पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने बिंदु देवी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।
