Ghazipur News: बच्चेदानी निकालने में लापरवाही से हुई थी महिला की मौत, डॉक्टर पर लगा 3.5 लाख का जुर्माना
Ghazipur News: जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने वर्ष 2015 में बच्चेदानी निकालने में लापरवाही से हुई महिला की मौत के मामले में फैसला सुनाया। डॉक्टर पर 3.5 लाख का जुर्माना लगाया।
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पुरैनिया (रौजा) निवासी नान्हू सिंह यादव ने आयोग में वाद दायर कर आरोप लगाया था कि वर्ष 2015 में उनकी पत्नी सितारा देवी को बच्चेदानी से पानी गिरने की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि बिना जांच किए डॉक्टर ने बच्चेदानी निकालने का ऑपरेशन कर दिया। ऑपरेशन के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ।
परिजनों को वाराणसी समेत अन्य स्थानों पर कराई गई जांच में पेट में फ्लूड बनने और कैंसर फैलने की जानकारी मिली। बाद में मरीज को एसजीपीजीआई लखनऊ ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने कैंसर को अंतिम अवस्था में बताया। इलाज के दौरान 16 अप्रैल 2016 को सितारा देवी की मौत हो गई।
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सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि अस्पताल के अभिलेखों में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज नहीं थीं। डिस्चार्ज स्लिप पर बेड नंबर, आईएनपी नंबर और ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक का उल्लेख तक नहीं था। साथ ही अस्पताल में अधिकृत महिला रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता का भी कोई रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया गया।
आयोग की पीठ ने टिप्पणी की कि मरीज की स्थिति की पहले समुचित जांच कराई जानी चाहिए थी। यदि कैंसर के लक्षण मिलते तो उसे विशेषज्ञ अस्पताल भेजा जाना चाहिए था। बिना आवश्यक जांच के बच्चेदानी निकालना चिकित्सकीय लापरवाही को दर्शाता है।
आयोग के अध्यक्ष सुजीत कुमार श्रीवास्तव, सदस्य रणविजय मिश्र और महिला सदस्य दीपा रानी की पीठ ने विपक्षी चिकित्सक को दो महीने में क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है। आदेश का पालन न होने पर परिवादी को विधिक कार्रवाई करने की स्वतंत्रता दी गई है।
फोरम की तल्ख टिप्पणी
डॉक्टर का कर्तव्य था कि वह मरीज के शरीर से हो रहे रिसाव (फ्लूड) की पहले जांच कराता। यदि जांच में कैंसर के लक्षण मिलते, तो उसे किसी स्पेशलिस्ट कैंसर अस्पताल में रेफर किया जाना चाहिए था। केवल मोटी फीस के लालच में सीधे बच्चेदानी निकाल देना घोर चिकित्सकीय लापरवाही (मेडिकल नेग्लिजेंस) को साबित करता है।