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Ghazipur News: अफसर बने गुरु फिर भी अभ्युदय से नहीं निकला सितारा
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मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग योजना जिले में अब तक अपेक्षित परिणाम देने में नाकाम रही है। चार वर्षों में करीब 600 छात्रों ने पंजीकरण कराया। अभी तक एक भी अभ्यर्थी को यूपीएससी या यूपीपीसीएस जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता नहीं मिली है। सबसे अहम पहलू यह कि अभ्युदय कोचिंग में छात्रों को पढ़ाने की जिम्मेदारी आईएएस, आईपीएस और पीसीएस अधिकारियों को सौंपी गई है। इसके बावजूद चार साल में अभी तक अभ्युदय से कोई सितारा नहीं निकला है। जमीनी हकीकत यह भी है कि अधिकांश अफसर कक्षाओं से दूर ही रहे। योजना के अनुसार अधिकारियों को सप्ताह में कम से कम दो दिन छात्रों को पढ़ाना था। जिले में यह व्यवस्था कागजों तक ही सीमित रही। विभागीय अधिकारियाें के अनुसार, केवल मुख्य विकास अधिकारी, दिव्यांगजन अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी और समाज कल्याण विभाग के कुछ अधिकारियों ने ही कक्षाएं ली हैं।
मुख्यमंत्री ने 16 फरवरी 2021 को वसंत पंचमी के दिन इस योजना की शुरुआत की थी। जिले में वर्ष 2022 में इसका संचालन शुरू हुआ था। पहले राजकीय महिला पीजी कॉलेज में कक्षाएं चलीं। जुलाई 2023 से इसे दूसरे जगह व्यवस्थित करने के प्रयास किए गए। योजना का उद्देश्य कमजोर आय वर्ग और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों को जिला स्तर पर ही यूपीएससी, पीसीएस, नीट और जेईई जैसी परीक्षाओं की मुफ्त तैयारी कराना है।
पिछले वर्ष यूपीपीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में जिले के अभ्युदय कोचिंग में पढ़ने वाली दो छात्राओं ने हिस्सा लिया। वहीं सीटेट, बिहार शिक्षक भर्ती और अन्य परीक्षाओं में करीब 13 छात्रों को सफलता मिली है। अभी तक कोई भी विद्यार्थी अफसर नहीं बना है।
जिला समन्वयक सत्येंद्र पांडेय के मुताबिक, वर्तमान में 120 छात्र संघ लोक सेवा आयोग और 197 छात्र अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। कक्षाएं दो पालियों में संचालित हो रही हैं। पहली पाली सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर एक बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होती है।
-- रामनगीना यादव, जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि
पूर्व में अधिकारी अभ्युदय कोचिंग में क्लास लेने जाते रहे है। साथ ही वहां पढ़ने वाले विद्यार्थी सीटेट, बिहार शिक्षक भर्ती और अन्य परीक्षाओं में सफल हुए हैं।
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मुख्यमंत्री ने 16 फरवरी 2021 को वसंत पंचमी के दिन इस योजना की शुरुआत की थी। जिले में वर्ष 2022 में इसका संचालन शुरू हुआ था। पहले राजकीय महिला पीजी कॉलेज में कक्षाएं चलीं। जुलाई 2023 से इसे दूसरे जगह व्यवस्थित करने के प्रयास किए गए। योजना का उद्देश्य कमजोर आय वर्ग और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों को जिला स्तर पर ही यूपीएससी, पीसीएस, नीट और जेईई जैसी परीक्षाओं की मुफ्त तैयारी कराना है।
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पिछले वर्ष यूपीपीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में जिले के अभ्युदय कोचिंग में पढ़ने वाली दो छात्राओं ने हिस्सा लिया। वहीं सीटेट, बिहार शिक्षक भर्ती और अन्य परीक्षाओं में करीब 13 छात्रों को सफलता मिली है। अभी तक कोई भी विद्यार्थी अफसर नहीं बना है।
जिला समन्वयक सत्येंद्र पांडेय के मुताबिक, वर्तमान में 120 छात्र संघ लोक सेवा आयोग और 197 छात्र अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। कक्षाएं दो पालियों में संचालित हो रही हैं। पहली पाली सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर एक बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होती है।
पूर्व में अधिकारी अभ्युदय कोचिंग में क्लास लेने जाते रहे है। साथ ही वहां पढ़ने वाले विद्यार्थी सीटेट, बिहार शिक्षक भर्ती और अन्य परीक्षाओं में सफल हुए हैं।
