सत्ता का संग्राम: गाजीपुर सदर में क्या हैं मुद्दे? जनता ने पांच साल के कामकाज का दिया हिसाब; देखें रिपोर्ट
यूपी में अगले साल यानी 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। आगामी चुनाव को देखते हुए सभी छोटे-बड़े दल अपने समीकरण साधने में जुट गए हैं। सपा अपनी खोई हुई जमीन वापस पाना चाहती है, इसी कड़ी में अमर उजाला की टीम ने गाजीपुर जिले की गाजीपुर सदर सीट का जायजा लिया।
विस्तार
उत्तर प्रदेश में अगले साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसी बीच अमर उजाला ने जनता की राय जानने के लिए 'सत्ता का संग्राम' अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत टीम प्रदेश की सभी विधानसभाओं में लोगों से बात कर रही है। टीम यह जानने की कोशिश कर रही है कि मौजूदा विधायक के कामकाज और उत्तर प्रदेश की सरकार से जनता कितनी संतुष्ट है। इसी कड़ी में गाजीपुर जिले की गाजीपुर सदर सीट का जायजा लिया गया। जहां जनता से उनके प्रमुख मुद्दों पर बातचीत की गई। यहां से सपा के विधायक जयकिशन साहू हैं।
गाजीपुर सदर में महिला सुरक्षा पर क्या बोलीं छात्राएं
अमर उजाला के 'सत्ता का संग्राम' अभियान के तहत टीम गाजीपुर जिला पहुंची। उन्होंने गाजीपुर सदर सीट के चुनावी मुद्दों पर युवाओं से बात की। पीजी कॉलेज गाजीपुर के छात्र-छात्राओं ने महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर अपनी राय रखी। छात्रों के अनुसार, गाजीपुर में 60 से 70 फीसदी सुरक्षा है, जो पहले से काफी बेहतर है। उनका मानना है कि महिला सुरक्षा काफी हद तक आत्मरक्षा पर निर्भर करती है। छात्राओं ने कहा कि योगी सरकार द्वारा बनाए गए कानून पर्याप्त हैं। पहले शाम को निकलने में डर लगता था, अब किसी भी समय बाहर जा सकते हैं। लड़कियों में जागरूकता बढ़ी है, जिससे वे विरोध प्रदर्शनों में आगे आ रही हैं। एक छात्रा ने मोदी सरकार और योगी सरकार के कामकाज को पहले की तुलना में बहुत अच्छा बताया। उसने कहा कि अब कम से कम लोग अपनी बात रख सकते हैं। एक पहली बार मतदान करने वाली छात्रा ने योगी को वोट देने की बात कही। युवाओं ने पेपर लीक के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने सवाल उठाया कि सोशल मीडिया और इंटरनेट होने के बावजूद बच्चे क्यों नहीं पढ़ रहे हैं और घर पर भी पढ़ाई कर सकते हैं। एक सामान्य वर्ग की छात्रा ने आरक्षण नीति पर नाराजगी जताई। उसने बताया कि जहां आरक्षित वर्ग की फीस 80 रुपये है, वहीं उसकी 1000 रुपये लगती है। उसे कट ऑफ में छूट नहीं मिलती और पेपर पास करने के बाद भी मेरिट सूची से बाहर हो जाती है। छात्रा ने कहा कि उन्हें पहले आरक्षित वर्ग की सीटें देनी पड़ती हैं।
पांच साल में कितना बदला गाजीपुर सदर, स्थानीय लोगों ने बताया
गाजीपुर सदर में विकास कार्यों को लेकर लोगों में असंतोष है। सड़कों के सुधार की उम्मीद जगी है। स्थानीय विधायक और सांसद के कामकाज से जनता खुश नहीं है, जबकि योगी सरकार की कानून व्यवस्था और व्यापारी सुरक्षा की सराहना की जा रही है। निवासियों के अनुसार, पिछले 8 साल से सीवर लाइन का काम हो रहा है, जिससे नगर क्षेत्र की दुर्व्यवस्था बढ़ी है। पिछले 5 साल से कोई विकास कार्य नहीं हुआ है। शहर में वाहन खड़ा करने की जगह की कमी, संकरी सड़कें और खराब संपर्क बड़ी समस्याएं हैं। स्थानीय विधायक को 10 में से 5-6 अंक दिए गए हैं। उन्हें एक अच्छा इन्सान बताया गया, पर अच्छा विधायक नहीं। योगी सरकार की कानून व्यवस्था को बहुत बढ़िया बताया गया है। गाजीपुर में पहले माफियाओं का राज था, जो अब बिल्कुल पलायन है। व्यापारी समाज खुद को बहुत सुरक्षित महसूस कर रहा है। व्यापार मंडल के नगर महामंत्री पवन वर्मा ने भी योगी सरकार की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों में व्यापारी शाम को असुरक्षित महसूस करते थे, अब वे रात 9-10 बजे भी अपनी प्रतिष्ठान बंद कर सकते हैं।
गाजीपुर सदर में व्यापारियों ने बताया कितना हुआ विकास
गाजीपुर सदर सीट समाजवादी पार्टी का गढ़ मानी जाती है, जहां अंसारी परिवार का दबदबा रहा है। वर्तमान में यहां सपा के विधायक जयकिशन साहू हैं, जिन्होंने पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को कम वोटों से हराया था। स्थानीय व्यापारी वर्ग से सरकार के कामकाज, कानून व्यवस्था और विधायक के प्रदर्शन पर उनकी राय जानी। व्यापारियों ने योगी सरकार की कानून व्यवस्था की भरपूर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के मामले में अब गाजीपुर पहले से बहुत सही है। व्यापारी रात में भी अपनी दुकानें खोलते हैं और खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। ड्रग डीलर्स वेलफेयर सोसाइटी के महामंत्री अश्विनी कुमार ने दवाओं पर कर कम करने के लिए सरकार को धन्यवाद दिया। हालांकि, विकास के मुद्दे पर व्यापारियों में गहरा असंतोष दिखा। पिछले छह-सात साल से सीवर के काम के नाम पर खुदाई से सड़कें खराब हैं। शहर में पार्किंग और सार्वजनिक शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। व्यापारियों ने विधायक जयकिशन साहू के कामकाज को लेकर निराशा व्यक्त की। उन्होंने बताया कि विधायक उनसे मिलते नहीं और समस्याओं का समाधान नहीं करते। अश्विनी कुमार ने विधायक को 10 में से चार नंबर दिए, जबकि अन्य व्यापारियों ने पांच नंबर दिए। उनका कहना था कि विधायक स्वभाव से अच्छे हैं, पर उनका कार्य दिखाई नहीं देता। व्यापारियों ने गाजीपुर में भाजपा का कोई विधायक न होने को विकास में बाधा बताया। सराफा व्यवसायी ने बताया कि योगी सरकार से पहले रात 12-1 बजे तक एफआईआर दर्ज कराने में समय लगता था। अब व्यापारी समाज को पूरे प्रदेश में सुरक्षा मिली है, जो पहले नहीं थी। व्यापारियों ने कहा कि वे अच्छे उम्मीदवार को वोट देंगे, न कि सपा या भाजपा देखकर। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि यहां चुनाव जातिगत समीकरणों पर आधारित होते हैं। कुछ व्यापारियों ने पूर्व सांसद मनोज सिन्हा के विकास कार्यों की सराहना की, लेकिन उनकी हार को जातिवाद का परिणाम बताया।
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