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Ghazipur News: पोखरे में डूबा सातवीं का छात्र, गई जान
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पोखरे में डूबने से मौत की खबर में----मृतक सुधांशुु शर्मा की फाइल फोटो। स्रोत- परिजन
कोतवाली क्षेत्र के चक मेदनी नंबर दो गांव में रविवार को पोखरे में डूबने से 13 वर्षीय छात्र सुधांशु शर्मा की मौत हो गई। घर से करीब 500 मीटर दूर हुए हादसे की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। बेटे की मौत से मां चांदनी का हाल बेहाल है। घटना के बाद पूरे गांव में मातम छा गया।
सुधांशु के नाना महातिम शर्मा ने बताया कि उनका कोई बेटा नहीं है। उनकी इकलौती बेटी चांदनी की शादी करीब 15 वर्ष पहले बिहार के बनारपुर निवासी दीप लोक शर्मा से हुई थी। शादी के बाद से चांदनी मायके में ही रह रही थी। सुधांशु दो भाइयों में बड़ा था। उसका छोटा भाई हिमांशु है। पिता पंजाब में निजी नौकरी करते हैं और वहीं से परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सुधांशु बेटावर स्थित विद्यालय में कक्षा सात का छात्र था। बेटे की मौत से परिवार के सपने बिखर गए हैं।
हादसे की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को संरक्षण में लेकर आवश्यक पूछताछ और कागजी कार्रवाई पूरी की। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए गाजीपुर जिला अस्पताल भेज दिया गया। ग्राम प्रशासक रामानंद यादव उर्फ बबलू ने घटना पर शोक जताते हुए पीड़ित परिवार को ढांढ़स बंधाया। उन्होंने कहा कि शासन स्तर से मिलने वाली हरसंभव आर्थिक सहायता दिलाने के लिए उच्चाधिकारियों से बातचीत की जा रही है।
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प्रभारी निरीक्षक योगेंद्र सिंह ने बताया कि पोखरे में डूबने से किशोर की मौत हुई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस आवश्यक जांच और कानूनी कार्रवाई कर रही है।
अफसर बनना चाहता था सुधांशु
किताबों में सुनहरे भविष्य के सपने बुनने वाले सुधांशु की मौत से पूरा गांव स्तब्ध है। स्कूल की एक दिन की छुट्टी परिवार के लिए ऐसा असहनीय दर्द बन गई, जिसे शायद ही कभी भुलाया जा सके।
सुधांशु के नाना व चकमेदनी नंबर दो निवासी महातिम शर्मा के अनुसार, वह केवल परिवार का बेटा नहीं, बल्कि उम्मीदों का मजबूत सहारा था। कक्षा में हमेशा अव्वल रहने वाला यह होनहार छात्र बड़ा अफसर बनना चाहता था। उसका सपना था कि पढ़-लिखकर परिवार के संघर्षों को खत्म करेगा और घर में खुशियां लाएगा। लेकिन नियति के एक झटके ने परिवार के सारे सपने बिखेर दिए।
दरवाजे पर टिकी हैं आंखें
बेटे को खोने के गम में मां चांदनी का बेहाल हैं। आंखें अब भी दरवाजे की ओर टकटकी लगाए हैं, मानो उनका लाल लौटकर घर आ जाएगा। घर में पसरा सन्नाटा और परिजनों की आंखों से बहते आंसू उस दुख को बयां कर रहे हैं। घर पर मेज पर रखी सुधांशु की अधूरी कॉपियां और शांत पड़ा बस्ता उसके अधूरे सपनों की याद दिला रहे हैं। बेटे की मौत की खबर सुनकर पिता दीपलोक शर्मा पंजाब से घर के लिए रवाना हो गए है।
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सुधांशु के नाना महातिम शर्मा ने बताया कि उनका कोई बेटा नहीं है। उनकी इकलौती बेटी चांदनी की शादी करीब 15 वर्ष पहले बिहार के बनारपुर निवासी दीप लोक शर्मा से हुई थी। शादी के बाद से चांदनी मायके में ही रह रही थी। सुधांशु दो भाइयों में बड़ा था। उसका छोटा भाई हिमांशु है। पिता पंजाब में निजी नौकरी करते हैं और वहीं से परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सुधांशु बेटावर स्थित विद्यालय में कक्षा सात का छात्र था। बेटे की मौत से परिवार के सपने बिखर गए हैं।
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हादसे की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को संरक्षण में लेकर आवश्यक पूछताछ और कागजी कार्रवाई पूरी की। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए गाजीपुर जिला अस्पताल भेज दिया गया। ग्राम प्रशासक रामानंद यादव उर्फ बबलू ने घटना पर शोक जताते हुए पीड़ित परिवार को ढांढ़स बंधाया। उन्होंने कहा कि शासन स्तर से मिलने वाली हरसंभव आर्थिक सहायता दिलाने के लिए उच्चाधिकारियों से बातचीत की जा रही है।
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प्रभारी निरीक्षक योगेंद्र सिंह ने बताया कि पोखरे में डूबने से किशोर की मौत हुई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस आवश्यक जांच और कानूनी कार्रवाई कर रही है।
अफसर बनना चाहता था सुधांशु
किताबों में सुनहरे भविष्य के सपने बुनने वाले सुधांशु की मौत से पूरा गांव स्तब्ध है। स्कूल की एक दिन की छुट्टी परिवार के लिए ऐसा असहनीय दर्द बन गई, जिसे शायद ही कभी भुलाया जा सके।
सुधांशु के नाना व चकमेदनी नंबर दो निवासी महातिम शर्मा के अनुसार, वह केवल परिवार का बेटा नहीं, बल्कि उम्मीदों का मजबूत सहारा था। कक्षा में हमेशा अव्वल रहने वाला यह होनहार छात्र बड़ा अफसर बनना चाहता था। उसका सपना था कि पढ़-लिखकर परिवार के संघर्षों को खत्म करेगा और घर में खुशियां लाएगा। लेकिन नियति के एक झटके ने परिवार के सारे सपने बिखेर दिए।
दरवाजे पर टिकी हैं आंखें
बेटे को खोने के गम में मां चांदनी का बेहाल हैं। आंखें अब भी दरवाजे की ओर टकटकी लगाए हैं, मानो उनका लाल लौटकर घर आ जाएगा। घर में पसरा सन्नाटा और परिजनों की आंखों से बहते आंसू उस दुख को बयां कर रहे हैं। घर पर मेज पर रखी सुधांशु की अधूरी कॉपियां और शांत पड़ा बस्ता उसके अधूरे सपनों की याद दिला रहे हैं। बेटे की मौत की खबर सुनकर पिता दीपलोक शर्मा पंजाब से घर के लिए रवाना हो गए है।