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Ghazipur News: कहीं मां मंदिर में दीप जला रही तो कहीं पत्नी रख रही रोजा
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जफरपुर गांव में ईरानी हमले की जानकारी के बाद बेटे समुदु यादव से वीडियो कॉल पर बात करती मां लालत
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गाजीपुर। जिले के करीब 250 गांवों के लगभग 10 हजार से अधिक युवा रोज़ी-रोटी की तलाश में खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं। फरवरी में ही 150 से अधिक युवक दुबई, सऊदी अरब, कतर, बहरीन, यूएई और इस्राइल गए हैं। शनिवार को अमेरिका-ईरान-इस्राइल के बीच बढ़ते तनाव और हमलों की खबर जैसे ही गांवों तक पहुंची, यहां के घर-आंगन में बेचैनी की लकीरें खिंच गईं। कहीं मां मंदिर में दीप जला रही है, तो कहीं पत्नी रोजा रखकर सुहाग की सलामती की दुआ कर रही है। जिन घरों के बेटे, पति या पिता खाड़ी देशों में हैं, वहां दिन-रात मोबाइल पर निगाहें टिकी हैं। कोई वीडियो कॉल के जरिये हाल जान रहा है, तो कोई व्हाट्सएप पर आए छोटे-छोटे वीडियो देखकर तसल्ली कर रहा है।
पूजा और इंतजार के बीच गुजर रहे दिन
जफरपुर निवासी समुदु यादव की मां लालती देवी के दिन अब पूजा और इंतजार के बीच गुजर रहे हैं। समुदु दो माह की छुट्टी बिताकर 15 फरवरी को दुबई गए थे। कंपनी ने उनकी ड्यूटी अबू धाबी में एक अमेरिकी बेस कैंप के पास लगा दी। कुछ ही दिनों बाद क्षेत्र में तनाव की खबरें आने लगीं। लालती देवी कहती हैं कि टीवी पर खबर देखी तो दिल कांप गया। लगा जैसे मेरा बेटा वहीं खड़ा हो। तब से हर सुबह-शाम वह मंदिर में दीप जलाकर बेटे की सलामती की प्रार्थना करती हैं। रात को नींद खुल जाती है तो सबसे पहले मोबाइल देखती हैं कि कहीं कोई संदेश तो नहीं आया। समुदु रोज फोन कर कहते हैं, मां, घबराना मत। यहां सब सुरक्षित है। वह आसपास के हालात के छोटे वीडियो भी भेजते हैं, ताकि घरवालों का डर कम हो। लेकिन एक मां का दिल खबरों से ज्यादा बेटे की आवाज में सुकून ढूंढता है।
पत्नी का रोजा, नमाज और वीडियो कॉल का इंतजार
मुस्तफाबाद की रजिया खातून के पति अहमद हुसैन सऊदी अरब में अपने तीन बेटों अरमान, सलमान और सैफी के साथ काम करते हैं। हमले की खबर सुनते ही रजिया का दिल बैठ गया। वह रमजान का रोजा रख कर पति व बच्चों की सलामती की दुआ कर रही है। पत्नी ने बताया कि पति का फोन नहीं लग रहा था, तो लगा जैसे सब खत्म हो गया। कहा कि घर के एक कोने में बैठकर उन्होंने दुआ मांगी, आंखों से आंसू बहते रहे। कुछ देर बाद वीडियो कॉल आया। स्क्रीन पर पति और बेटे मुस्कुराते दिखे तो जैसे जान में जान आई। रजिया बताती हैं कि तब से वह हर नमाज में उनके लिए दुआ करती हैं। कहा कि बस खुदा से यही मांगती हूं कि सब सकुशल रहें और हालात जल्द सुधरे।
अबू धाबी में सायरन, 50 मीटर दूर अमेरिकी कैंप
गाजीपुर के जफरपुर निवासी समुदु यादव ने अबू धाबी से फोन पर जो बताया, उसने घरवालों ही नहीं, सुनने वालों की भी धड़कन बढ़ा दी। बातचीत के दौरान ही मोबाइल पर तेज सायरन की आवाज गूंज उठी। समुदु ने कहा कि मैं पोपट एरिया में काम करता हूं। यहां से करीब 50 मीटर दूरी पर अमेरिकी एयरवेज का कैंप है। रात करीब ढाई बजे अचानक जोरदार धमाके के बाद अलार्म बज उठा। पुलिस ने तुरंत सभी को शेल्टर में रहने के निर्देश दिए। बताया कि मिसाइल के टुकड़ों से उनके कुछ साथी घायल हो गए। पी बोर्ड कंपनी में भारत, पाकिस्तान और इंडोनेशिया के करीब 2000 कामगार कार्यरत हैं। बाजार और बस सेवाएं बंद हैं। हम सब कैंप के अंदर ही रुके हैं। बाहर सन्नाटा है, लेकिन डर अंदर तक बैठा है।
गांवों में पसरी खामोशी, चौपालों पर एक ही चर्चा
दुल्लहपुर, जलालाबाद, बड़ा मियाना, चानकपुर, सुल्तानपुर, विशुनपुरा, खोजवा, देवरीबारी, अतरौला, मडरिया, पाही, जसौली आदि गांवों में शायद ही कोई घर हो, जहां से कोई खाड़ी न गया हो। इन परिवारों की आजीविका उन्हीं प्रवासी युवाओं की कमाई पर टिकी है। बच्चों की फीस, घर की मरम्मत, बहन की शादी समेत हर सपना परदेस से आने वाली रकम से जुड़ा है। ऐसे में जंग की आहट यहां सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि आर्थिक चिंता भी लेकर आई है।
ढांढस और दुआओं के बीच टिकी उम्मीद
गल्फ देशों में काम करने गए युवाओं के परिजनों का कहना है कि अब तक किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है, लेकिन डर का साया बना हुआ है। गांवों में शाम ढलते ही टीवी की खबरें और मोबाइल अपडेट चर्चा का केंद्र बन जाती हैं। कई युवक फोन कर परिजनों को भरोसा दे रहे हैं कि कंपनियों ने सुरक्षा के इंतजाम मजबूत कर दिए हैं।
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पूजा और इंतजार के बीच गुजर रहे दिन
जफरपुर निवासी समुदु यादव की मां लालती देवी के दिन अब पूजा और इंतजार के बीच गुजर रहे हैं। समुदु दो माह की छुट्टी बिताकर 15 फरवरी को दुबई गए थे। कंपनी ने उनकी ड्यूटी अबू धाबी में एक अमेरिकी बेस कैंप के पास लगा दी। कुछ ही दिनों बाद क्षेत्र में तनाव की खबरें आने लगीं। लालती देवी कहती हैं कि टीवी पर खबर देखी तो दिल कांप गया। लगा जैसे मेरा बेटा वहीं खड़ा हो। तब से हर सुबह-शाम वह मंदिर में दीप जलाकर बेटे की सलामती की प्रार्थना करती हैं। रात को नींद खुल जाती है तो सबसे पहले मोबाइल देखती हैं कि कहीं कोई संदेश तो नहीं आया। समुदु रोज फोन कर कहते हैं, मां, घबराना मत। यहां सब सुरक्षित है। वह आसपास के हालात के छोटे वीडियो भी भेजते हैं, ताकि घरवालों का डर कम हो। लेकिन एक मां का दिल खबरों से ज्यादा बेटे की आवाज में सुकून ढूंढता है।
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पत्नी का रोजा, नमाज और वीडियो कॉल का इंतजार
मुस्तफाबाद की रजिया खातून के पति अहमद हुसैन सऊदी अरब में अपने तीन बेटों अरमान, सलमान और सैफी के साथ काम करते हैं। हमले की खबर सुनते ही रजिया का दिल बैठ गया। वह रमजान का रोजा रख कर पति व बच्चों की सलामती की दुआ कर रही है। पत्नी ने बताया कि पति का फोन नहीं लग रहा था, तो लगा जैसे सब खत्म हो गया। कहा कि घर के एक कोने में बैठकर उन्होंने दुआ मांगी, आंखों से आंसू बहते रहे। कुछ देर बाद वीडियो कॉल आया। स्क्रीन पर पति और बेटे मुस्कुराते दिखे तो जैसे जान में जान आई। रजिया बताती हैं कि तब से वह हर नमाज में उनके लिए दुआ करती हैं। कहा कि बस खुदा से यही मांगती हूं कि सब सकुशल रहें और हालात जल्द सुधरे।
अबू धाबी में सायरन, 50 मीटर दूर अमेरिकी कैंप
गाजीपुर के जफरपुर निवासी समुदु यादव ने अबू धाबी से फोन पर जो बताया, उसने घरवालों ही नहीं, सुनने वालों की भी धड़कन बढ़ा दी। बातचीत के दौरान ही मोबाइल पर तेज सायरन की आवाज गूंज उठी। समुदु ने कहा कि मैं पोपट एरिया में काम करता हूं। यहां से करीब 50 मीटर दूरी पर अमेरिकी एयरवेज का कैंप है। रात करीब ढाई बजे अचानक जोरदार धमाके के बाद अलार्म बज उठा। पुलिस ने तुरंत सभी को शेल्टर में रहने के निर्देश दिए। बताया कि मिसाइल के टुकड़ों से उनके कुछ साथी घायल हो गए। पी बोर्ड कंपनी में भारत, पाकिस्तान और इंडोनेशिया के करीब 2000 कामगार कार्यरत हैं। बाजार और बस सेवाएं बंद हैं। हम सब कैंप के अंदर ही रुके हैं। बाहर सन्नाटा है, लेकिन डर अंदर तक बैठा है।
गांवों में पसरी खामोशी, चौपालों पर एक ही चर्चा
दुल्लहपुर, जलालाबाद, बड़ा मियाना, चानकपुर, सुल्तानपुर, विशुनपुरा, खोजवा, देवरीबारी, अतरौला, मडरिया, पाही, जसौली आदि गांवों में शायद ही कोई घर हो, जहां से कोई खाड़ी न गया हो। इन परिवारों की आजीविका उन्हीं प्रवासी युवाओं की कमाई पर टिकी है। बच्चों की फीस, घर की मरम्मत, बहन की शादी समेत हर सपना परदेस से आने वाली रकम से जुड़ा है। ऐसे में जंग की आहट यहां सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि आर्थिक चिंता भी लेकर आई है।
ढांढस और दुआओं के बीच टिकी उम्मीद
गल्फ देशों में काम करने गए युवाओं के परिजनों का कहना है कि अब तक किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है, लेकिन डर का साया बना हुआ है। गांवों में शाम ढलते ही टीवी की खबरें और मोबाइल अपडेट चर्चा का केंद्र बन जाती हैं। कई युवक फोन कर परिजनों को भरोसा दे रहे हैं कि कंपनियों ने सुरक्षा के इंतजाम मजबूत कर दिए हैं।
