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Ghazipur News: कटान रोकने के लिए 300 मीटर तक ठोकर व पिचिंग का कराया जा रहा कार्य
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सेमरा के राजकीय नलकूप के लिए बनाया जा रहा ठोकर। संवाद
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मुहम्मदाबाद। गंगा कटान से प्रभावित सेमरा-शेरपुर के परिया नब्बे सिवान में स्थित राजकीय नलकूप को बचाने के लिए सिंचाई विभाग देवकली पंप कैनाल खंड प्रथम ने कवायद शुरु कर दी है।
कटान रोकने के लिए विभाग की ओर से 300 मीटर लंबे बोल्डर पिचिंग (ठोकर) निर्माण कार्य के तहत फिलहाल बालू भरी बोरियां डालने का काम कराया जा रहा है।
करीब तीन दशक पहले खेतों की सिंचाई के लिए यहां सरकारी नलकूप संख्या 270 वाईजी स्थापित किया गया था। उस समय गंगा नदी काफी दूर बहती थीं, लेकिन लगातार कटान के कारण अब नदी नलकूप के बिल्कुल करीब पहुंच गई हैं। आशंका जताई जा रही है कि तेज कटान होने पर नलकूप गंगा में समाहित हो सकता है।
नलकूप के अस्तित्व पर खतरा देखते हुए पिछले दिनों क्षेत्र के किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से इससे बचाव की मांग की थी। नलकूप के महत्व को देखते हुए विभाग ने प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था जिस पर 300 मीटर बोल्डर पिचिंग के लिए धन स्वीकृत हुआ। इसके बाद कार्यदायी संस्था ने निर्माण कार्य शुरू करा दिया।
निर्माण की गुणवत्ता पर उठाए सवाल
निर्माण की गुणवत्ता को लेकर किसानों ने चिंता जताई है। किसान मनोज राय ने बताया कि ठोकर निर्माण से नलकूप के साथ-साथ कटान की जद में आ रही कृषि भूमि का भी बचाव होगा लेकिन मड मशीन न होने के कारण बालू के साथ मिट्टी भी बोरियों में भरी जा रही है, जिससे संरचना कमजोर हो सकती है। किसान अशोक राय ने कहा कि मड मशीन का उपयोग कर केवल बालू से बोरियां भरी जाए, ताकि आने वाले बाढ़ के समय ठोकर मजबूत रहे और कटान को प्रभावी ढंग से रोका जा सके। एसडीएम डा. हर्षिता तिवारी ने बताया कि राजकीय नलकूप को बचाने के लिए ठोकर का निर्माण कराया जा रहा है।
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कटान रोकने के लिए विभाग की ओर से 300 मीटर लंबे बोल्डर पिचिंग (ठोकर) निर्माण कार्य के तहत फिलहाल बालू भरी बोरियां डालने का काम कराया जा रहा है।
करीब तीन दशक पहले खेतों की सिंचाई के लिए यहां सरकारी नलकूप संख्या 270 वाईजी स्थापित किया गया था। उस समय गंगा नदी काफी दूर बहती थीं, लेकिन लगातार कटान के कारण अब नदी नलकूप के बिल्कुल करीब पहुंच गई हैं। आशंका जताई जा रही है कि तेज कटान होने पर नलकूप गंगा में समाहित हो सकता है।
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नलकूप के अस्तित्व पर खतरा देखते हुए पिछले दिनों क्षेत्र के किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से इससे बचाव की मांग की थी। नलकूप के महत्व को देखते हुए विभाग ने प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था जिस पर 300 मीटर बोल्डर पिचिंग के लिए धन स्वीकृत हुआ। इसके बाद कार्यदायी संस्था ने निर्माण कार्य शुरू करा दिया।
निर्माण की गुणवत्ता पर उठाए सवाल
निर्माण की गुणवत्ता को लेकर किसानों ने चिंता जताई है। किसान मनोज राय ने बताया कि ठोकर निर्माण से नलकूप के साथ-साथ कटान की जद में आ रही कृषि भूमि का भी बचाव होगा लेकिन मड मशीन न होने के कारण बालू के साथ मिट्टी भी बोरियों में भरी जा रही है, जिससे संरचना कमजोर हो सकती है। किसान अशोक राय ने कहा कि मड मशीन का उपयोग कर केवल बालू से बोरियां भरी जाए, ताकि आने वाले बाढ़ के समय ठोकर मजबूत रहे और कटान को प्रभावी ढंग से रोका जा सके। एसडीएम डा. हर्षिता तिवारी ने बताया कि राजकीय नलकूप को बचाने के लिए ठोकर का निर्माण कराया जा रहा है।
