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Jaunpur News: 1350 रुपये की डीएपी 1800 में निजी दुकान से खरीद रहे किसान
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उर्वरक के अभाव में बंद पड़ी सहकारी समिति खुटहन। संवाद
जौनपुर। रबी फसलों की बोआई के बीच जिले में खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की हकीकत कृषि विभाग के दावों से अलग नजर आ रही है। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम शुक्रवार को जिले के आठ क्षेत्रों में खाद वितरण की हकीकत जानने पहुंची। पता चला कि कई सहकारी समितियों पर डीएपी का स्टॉक खत्म मिला तो कहीं कर्मचारियों की हड़ताल के कारण उपलब्ध खाद का वितरण नहीं हो सका। विवशता में किसानों को निजी दुकानों से 1350 रुपये की डीएपी 1800 रुपये में और 268 रुपये की यूरिया की बोरी 350 रुपये में खरीदनी पड़ रही है। खुटहन में 25 हजार किसानों के सापेक्ष समितियों को महज 2500 बोरी डीएपी मिलने की जानकारी सामने आई है। सुइथाकलां में किसान समितियों से खाली हाथ लौट रहे हैं। वहीं, तेजीबाजार और मुफ्तीगंज में कर्मचारियों की हड़ताल के कारण समितियां बंद रहीं।
केस-1
खुटहन ब्लॉक में 25 हजार किसानों के सापेक्ष सहकारी समितियों को महज 2500 बोरी डीएपी मिली है। एडीओ सहकारिता नरेंद्र प्रताप यादव के अनुसार 10 न्याय पंचायतों की समितियों पर खाद भेजी गई है। सौरैयां और निजामपुर न्याय पंचायतों में समितियों का संचालन शुरू नहीं हुआ है। डीएपी की अगली खेप दीपावली के आसपास आने की संभावना है। बोआई के समय कम आपूर्ति से किसानों को खाद के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
केस-2
बदलापुर क्षेत्र में सरसों, चना, मटर और आलू की बोआई के दौरान समितियों पर डीएपी की किल्लत है। किसानों के अनुसार निजी दुकानों पर 1350 रुपये की डीएपी 1800 रुपये और करीब 268 रुपये की यूरिया 350 रुपये प्रति बोरी बेची जा रही है। किसानों का कहना है कि बोआई के समय खाद की कमी से खेती की लागत बढ़ रही है।
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केस-3
मड़ियाहूं में एडीओ कोऑपरेटिव कांतिलाल सरोज ने बताया कि समितियों पर डीएपी और यूरिया पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने सचिवों की हड़ताल से वितरण प्रभावित होने की बात कही है। दूसरी ओर, किसान महेंद्र प्रसाद उपाध्याय और राजेश यादव ने बताया कि निजी दुकानों पर डीएपी 1600 रुपये और यूरिया 300 से 350 रुपये प्रति बोरी बेची जा रही है। ऐसे में समितियों पर उपलब्धता के दावे और किसानों को खाद मिलने की स्थिति के बीच अंतर नजर आ रहा है।
केस-4
सुइथाकलां क्षेत्र में साधन सहकारी समितियों पर खाद नहीं मिलने से किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। अर्सिया निवासी खुशी राम मिश्रा और रुधौली निवासी श्यामनारायन तिवारी ने बताया कि निजी दुकानों पर डीएपी 1700 से 1800 रुपये में खरीदनी पड़ रही है। सरायमोहिउद्दीनपुर समिति के सचिव अवधेश चंद्र पांडेय ने बताया कि कर्मचारियों के धरना-प्रदर्शन के कारण आपूर्ति और वितरण प्रभावित हुआ है।
केस-5
मछलीशहर क्षेत्र में समितियों पर खाद की कमी से किसानों को परेशानी हो रही है। रसूलपुर सहकारी समिति के सचिव राम कृपाल बिंद ने बताया कि समिति को मिली 250 बोरी डीएपी का वितरण किया जा चुका है। सचिवों की हड़ताल से भी खाद वितरण प्रभावित है। किसानों को अगली खेप के आने का इंतजार है।
केस-6
डोभी में नौ समितियों को साढ़े 12 टन खाद भेजी गई थी। डोभी क्षेत्र के किसानों का कहना है कि दलहन, सरसों और आलू की बोआई के लिए खाद की जरूरत पूरी नहीं हो रही है। निजी दुकानों पर रेट बोर्ड नहीं लगाने और मनमाने दाम वसूलने की शिकायतें भी मिली हैं। किसान आलोक दुबे और जयप्रकाश यादव के अनुसार समितियों पर डीएपी नहीं मिलने से उन्हें खुले बाजार से खाद खरीदनी पड़ रही है। एक सप्ताह बाद गेहूं की बोआई शुरू होने की संभावना से उनकी चिंता बढ़ गई है।
केस-7
तेजीबाजार में हड़ताल से बंद रही समिति तेजीबाजार क्षेत्र में सहकारी समितियों पर डीएपी नहीं मिलने से किसान निजी दुकानों का रुख कर रहे हैं। गौराकला (कपूरपुर) सहकारी समिति के सचिव रणविजय सिंह ने बताया कि समिति पर 350 बोरी यूरिया और 50 से 60 बोरी डीएपी उपलब्ध है। हालांकि, कर्मचारियों के लखनऊ में हड़ताल पर होने के कारण उस दिन समिति बंद रही और खाद का वितरण नहीं हो सका। इससे उपलब्ध स्टॉक के बावजूद किसानों को खाद नहीं मिल पाई।
केस-8
मुफ्तीगंज क्षेत्र के किसान अर्जुन विश्वकर्मा, अजीत राय का कहना है कि हर साल बोआई के सीजन में खाद की किल्लत होती है। समय पर डीएपी नहीं मिलने से खेती प्रभावित होती है। मजबूरी में बाजार से महंगे दाम पर खाद खरीदनी पड़ती है, जिससे लागत बढ़ जाती है। पेसारा सहकारी समिति के सचिव यादवेंद्र सिंह ने बताया कि प्रदेशव्यापी हड़ताल के कारण समिति बंद है। हड़ताल खत्म होने पर खाद मंगाकर वितरण किया जाएगा।
जिले में 30 हजार टन से ज्यादा यूरिया, 10 हजार टन डीएपी उपलब्ध
जिला कृषि अधिकारी विनय सिंह ने बताया कि जिले में 30,606 टन यूरिया, 10 हजार टन डीएपी और सात हजार टन एनपी खाद उपलब्ध है। जल्द ही डीएपी की दो रैक आने वाली हैं, जिनमें 1900 टन खाद होगी। फिलहाल आलू, सरसों, चना और मटर की बोआई चल रही है, जबकि गेहूं की बोआई नवंबर में होगी। उन्होंने किसानों से खाद का भंडारण नहीं करने की अपील की। कहा कि निर्धारित मूल्य से ज्यादा कीमत मांगने वाले दुकानदारों की शिकायत करें, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एक सप्ताह बाद गेहूं की बोआई शुरू होने वाली है। हर साल बोआई के सीजन में खाद की किल्लत होती है। डीएपी के लिए भटकना पड़ता है।
- आलोक दुबे, डोभी
समिति पर डीएपी नहीं मिलने के कारण सरसों की बोआई के लिए 1650 रुपये में खाद खरीदनी पड़ी। यह समस्या हर साल की है। इस बार भी सामने आ रही है। - मनीष सिंह, कठार
सहकारी समितियों पर डीएपी नहीं मिलने से दलहन और आलू की बोआई के लिए खुले बाजार से महंगे दाम पर खाद खरीदनी पड़ रही है। गेहूं की बोआई नजदीक आने से चिंता बढ़ गई है। - जयप्रकाश यादव, कानामऊ
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केस-1
खुटहन ब्लॉक में 25 हजार किसानों के सापेक्ष सहकारी समितियों को महज 2500 बोरी डीएपी मिली है। एडीओ सहकारिता नरेंद्र प्रताप यादव के अनुसार 10 न्याय पंचायतों की समितियों पर खाद भेजी गई है। सौरैयां और निजामपुर न्याय पंचायतों में समितियों का संचालन शुरू नहीं हुआ है। डीएपी की अगली खेप दीपावली के आसपास आने की संभावना है। बोआई के समय कम आपूर्ति से किसानों को खाद के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
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केस-2
बदलापुर क्षेत्र में सरसों, चना, मटर और आलू की बोआई के दौरान समितियों पर डीएपी की किल्लत है। किसानों के अनुसार निजी दुकानों पर 1350 रुपये की डीएपी 1800 रुपये और करीब 268 रुपये की यूरिया 350 रुपये प्रति बोरी बेची जा रही है। किसानों का कहना है कि बोआई के समय खाद की कमी से खेती की लागत बढ़ रही है।
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केस-3
मड़ियाहूं में एडीओ कोऑपरेटिव कांतिलाल सरोज ने बताया कि समितियों पर डीएपी और यूरिया पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने सचिवों की हड़ताल से वितरण प्रभावित होने की बात कही है। दूसरी ओर, किसान महेंद्र प्रसाद उपाध्याय और राजेश यादव ने बताया कि निजी दुकानों पर डीएपी 1600 रुपये और यूरिया 300 से 350 रुपये प्रति बोरी बेची जा रही है। ऐसे में समितियों पर उपलब्धता के दावे और किसानों को खाद मिलने की स्थिति के बीच अंतर नजर आ रहा है।
केस-4
सुइथाकलां क्षेत्र में साधन सहकारी समितियों पर खाद नहीं मिलने से किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। अर्सिया निवासी खुशी राम मिश्रा और रुधौली निवासी श्यामनारायन तिवारी ने बताया कि निजी दुकानों पर डीएपी 1700 से 1800 रुपये में खरीदनी पड़ रही है। सरायमोहिउद्दीनपुर समिति के सचिव अवधेश चंद्र पांडेय ने बताया कि कर्मचारियों के धरना-प्रदर्शन के कारण आपूर्ति और वितरण प्रभावित हुआ है।
केस-5
मछलीशहर क्षेत्र में समितियों पर खाद की कमी से किसानों को परेशानी हो रही है। रसूलपुर सहकारी समिति के सचिव राम कृपाल बिंद ने बताया कि समिति को मिली 250 बोरी डीएपी का वितरण किया जा चुका है। सचिवों की हड़ताल से भी खाद वितरण प्रभावित है। किसानों को अगली खेप के आने का इंतजार है।
केस-6
डोभी में नौ समितियों को साढ़े 12 टन खाद भेजी गई थी। डोभी क्षेत्र के किसानों का कहना है कि दलहन, सरसों और आलू की बोआई के लिए खाद की जरूरत पूरी नहीं हो रही है। निजी दुकानों पर रेट बोर्ड नहीं लगाने और मनमाने दाम वसूलने की शिकायतें भी मिली हैं। किसान आलोक दुबे और जयप्रकाश यादव के अनुसार समितियों पर डीएपी नहीं मिलने से उन्हें खुले बाजार से खाद खरीदनी पड़ रही है। एक सप्ताह बाद गेहूं की बोआई शुरू होने की संभावना से उनकी चिंता बढ़ गई है।
केस-7
तेजीबाजार में हड़ताल से बंद रही समिति तेजीबाजार क्षेत्र में सहकारी समितियों पर डीएपी नहीं मिलने से किसान निजी दुकानों का रुख कर रहे हैं। गौराकला (कपूरपुर) सहकारी समिति के सचिव रणविजय सिंह ने बताया कि समिति पर 350 बोरी यूरिया और 50 से 60 बोरी डीएपी उपलब्ध है। हालांकि, कर्मचारियों के लखनऊ में हड़ताल पर होने के कारण उस दिन समिति बंद रही और खाद का वितरण नहीं हो सका। इससे उपलब्ध स्टॉक के बावजूद किसानों को खाद नहीं मिल पाई।
केस-8
मुफ्तीगंज क्षेत्र के किसान अर्जुन विश्वकर्मा, अजीत राय का कहना है कि हर साल बोआई के सीजन में खाद की किल्लत होती है। समय पर डीएपी नहीं मिलने से खेती प्रभावित होती है। मजबूरी में बाजार से महंगे दाम पर खाद खरीदनी पड़ती है, जिससे लागत बढ़ जाती है। पेसारा सहकारी समिति के सचिव यादवेंद्र सिंह ने बताया कि प्रदेशव्यापी हड़ताल के कारण समिति बंद है। हड़ताल खत्म होने पर खाद मंगाकर वितरण किया जाएगा।
जिले में 30 हजार टन से ज्यादा यूरिया, 10 हजार टन डीएपी उपलब्ध
जिला कृषि अधिकारी विनय सिंह ने बताया कि जिले में 30,606 टन यूरिया, 10 हजार टन डीएपी और सात हजार टन एनपी खाद उपलब्ध है। जल्द ही डीएपी की दो रैक आने वाली हैं, जिनमें 1900 टन खाद होगी। फिलहाल आलू, सरसों, चना और मटर की बोआई चल रही है, जबकि गेहूं की बोआई नवंबर में होगी। उन्होंने किसानों से खाद का भंडारण नहीं करने की अपील की। कहा कि निर्धारित मूल्य से ज्यादा कीमत मांगने वाले दुकानदारों की शिकायत करें, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एक सप्ताह बाद गेहूं की बोआई शुरू होने वाली है। हर साल बोआई के सीजन में खाद की किल्लत होती है। डीएपी के लिए भटकना पड़ता है।
- आलोक दुबे, डोभी
समिति पर डीएपी नहीं मिलने के कारण सरसों की बोआई के लिए 1650 रुपये में खाद खरीदनी पड़ी। यह समस्या हर साल की है। इस बार भी सामने आ रही है। - मनीष सिंह, कठार
सहकारी समितियों पर डीएपी नहीं मिलने से दलहन और आलू की बोआई के लिए खुले बाजार से महंगे दाम पर खाद खरीदनी पड़ रही है। गेहूं की बोआई नजदीक आने से चिंता बढ़ गई है। - जयप्रकाश यादव, कानामऊ