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Jaunpur News: मेडिकल कॉलेज में अब हेपेटाइटिस और विटामिन की जांच की सुविधा

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 01 Feb 2026 12:20 AM IST
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Now, facilities for hepatitis and vitamin testing are available in the medical college.
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करंजाकला। जिले के मरीजों को अब हेपेटाइटिस बी और सी की जांच के साथ ही विटामिन की जांच के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) में इसकी जांच शुरू हो गई है। कॉलेज प्रशासन जांच का दायरा बढ़ा रहा है। मेडिकल कॉलेज में अब रैपिड टेस्ट के माध्यम से हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी की जांच शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही खून और विटामिन की जांच की सुविधा भी उपलब्ध करा दी गई है। नई जांच सेवाएं शुरू होने के बाद अस्पताल में मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से हेपेटाइटिस की रैपिड जांच के साथ-साथ इसके इंजेक्शन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। खास बात यह है कि हेपेटाइटिस बी का इंजेक्शन नवजात शिशु को जन्म के 24 घंटे के भीतर लगाया जाता है। विटामिन जांच की सुविधा शुरू होने से हड्डियों से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को भी लाभ मिलना शुरू हो गया है। अब मरीजों की सही जांच कर उपचार किया जा सकेगा। हालांकि जांच रिपोर्ट आने में कुछ समय लग रहा है, लेकिन मरीजों को पहले की तुलना में बेहतर सुविधा मिल रही है। पेडियाट्रिक विभाग के डॉक्टर अरविंद यादव ने बताया कि हेपेटाइटिस बीमारी संक्रमित रक्त, दूषित सुई के इस्तेमाल और असुरक्षित यौन संबंधों के कारण होती है। हेपेटाइटिस सी के मरीजों में लिवर कैंसर का खतरा भी बना रहता है। इससे बचाव के लिए विश्वसनीय ब्लड बैंक से ही रक्त लें, सुरक्षित संबंध बनाने और सिरिंज का एक बार ही इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है। हेपेटाइटिस से पीड़ित मरीजों में पेट दर्द, गाढ़े पीले रंग का मूत्र आना, खून की उल्टी, शरीर का पीला पड़ना, भूख न लगना और अत्यधिक थकावट जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच कराना जरूरी बताया गया है। चिकित्सकों के मुताबिक हेपेटाइटिस सी का इलाज तीन से छह महीने तक चलता है। समय पर इलाज से बीमारी पूरी तरह ठीक की जा सकती है। निजी अस्पतालों में इसके इलाज पर हर महीने छह से आठ हजार रुपये दवाओं पर खर्च होते हैं, जबकि जांच में 10 हजार रुपये से अधिक खर्च आता है। हेपेटाइटिस बी की जांच भी महंगी होती है। इसका इलाज आजीवन चलता है। निजी अस्पतालों में हेपेटाइटिस बी की दवाओं पर हर महीने तीन से पांच हजार रुपये तक खर्च आता है। हर तीन से छह महीने में जांच करानी पड़ती है। मेडिकल कॉलेज में यह सुविधा मिलने से आम मरीजों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
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