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आंकड़ों की बाजीगरी: 2.71 करोड़ पौधे रोपे, फिर भी घट गई हरियाली; एफएसआई की रिपोर्ट ने खड़े किए सवाल
Wed, 09 Sep 2026 01:13 PM IST
Dhirendra Singh
श्याम जोशी, संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
श्याम जोशी, संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 09 Sep 2026 01:13 PM IST
सार
मथुरा में 15 वर्षों में 2.71 करोड़ पौधे रोपने के दावे के बावजूद जिले का वन आवरण 6.66 वर्ग किमी घट गया है। एफएसआई की सर्वे रिपोर्ट के आंकड़े पौधरोपण के सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं, जबकि विभाग पौराणिक वनों के विकसित होने से हरियाली बढ़ने की बात कह रहा है।
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आंकड़ों की बाजीगरी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
कागजों में बढ़ रहे पाैधरोपण का दावा जमीन पर खोखला साबित हो रहा है। सरकारी आंकड़ों में जहां साल दर साल पाैधरोपण बढ़ता जा रहा है, पर वास्तव में हरियाली का दायरा घटता जा रहा है। सामने आया है कि जिले में पिछले 15 वर्ष में कुल 2.71 करोड़ पौधे रोपे गए हैं। ऐसे में हरियाली बढ़नी चाहिए थी पर कमाल यह रहा कि जिले में वन आवरण का क्षेत्र इस अवधि में 6.66 वर्ग किमी घट गया। एफएसआई की सर्वे रिपोर्ट में यह खुलासा होने से अब वन विभाग में हड़कंप की स्थिति है।
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जिले में इस वर्ष वृहद पौधरोपण अभियान में 39.42 लाख पौधे रोपने का दावा किया गया है। पिछले आठ वर्ष में ही यहां पर 2.65 करोड़ पौधे रोपे गए हैं। इससे पहले के सात वर्ष में करीब 5.5 लाख पौधे रोपे गए थे। 15 वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक कुल 2.71 करोड़ पौधों लगाए गए। अगर यह दावे कागजी नहीं होते तो लाखों पेड़ों के हरे-भरे जंगल दिखाई देते।
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भारतीय वन सर्वेक्षण देहरादून की रिपोर्ट के अनुसार यहां वर्ष 2011 से वर्ष 2023 तक 6.66 वर्ग किमी या 11.1 प्रतिशत वन आवरण घटता चला गया है। इससे वन विभाग के दावे और एफएसआई के आंकड़ों में चौंकाने वाला विरोधाभास देखने को मिल रहा है। वर्ष 2011 में जिले का वन आवरण 60 वर्ग किमी था, जो वर्ष 2023 में घटकर 53.34 वर्ग किमी रह गया। जिले के क्षेत्रफल के अनुसार हरियाली 1.80 प्रतिशत से घटकर 1.60 प्रतिशत रह गई है। वहीं वर्ष 2026 की सर्वे रिपोर्ट में भी यहां और वन आवरण कम होने की जानकारी मिली है।
डीएफओ वेंकट श्रीकर पटेल ने कहा कि एफएसआई के पुराने सर्वेक्षण के बारे में जानकारी नहीं है। यहां पौराणिक महत्व के 36 वनों के विकसित होने के बाद हरियाली बढ़ेगी। गत वर्षों में किए पौधरोपण की कार्यवृत्ति के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। इसकी जानकारी कराई जाएगी।
15 वर्ष में हुआ कुल 2.71 करोड़ पौधरोपण
15 वर्ष में हुआ कुल 2.71 करोड़ पौधरोपण
| वर्ष | पौधरोपण |
|---|---|
| 2026 | 39.42 लाख |
| 2025 | 38.49 लाख |
| 2024 | 35.30 लाख |
| 2023 | 34.90 लाख |
| 2022 | 40.40 लाख |
| 2021 | 31.20 लाख |
| 2020 | 26.00 लाख |
| 2019 | 19.75 लाख |
| 2018 | 0.90 लाख |
| 2017 | 0.84 लाख |
| 2016 | 0.78 लाख |
| 2015 | 0.88 लाख |
| 2014 | 0.72 लाख |
| 2013 | 0.76 लाख |
| 2012 | 0.66 लाख |
एफएसआई के सर्वे से हरियाली के आंकड़े
| वर्ष | वन आवरण (वर्ग किमी) | जिले के क्षेत्रफल का प्रतिशत |
|---|---|---|
| 2011 | 60.00 | 1.80% |
| 2013 | 58.00 | 1.74% |
| 2015 | 58.00 | 1.74% |
| 2017 | 60.00 | 1.80% |
| 2019 | 57.04 | 1.71% |
| 2023 | 53.34 | 1.60% |