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राधारानी ब्रज चौरासी कोस यात्रा शुरू: पहली बार संत रमेशा बाबा के बिना रवाना हुए श्रद्धालु, नम हो गईं आंखें
Sun, 25 Oct 2026 12:26 AM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sun, 25 Oct 2026 12:26 AM IST
सार
मान मंदिर सेवा संस्थान की यात्रा-सारिणी के अनुसार, पहले दिन करीब नौ किलोमीटर की यात्रा निर्धारित है। इसमें सूर्यकुंड, ढमाला, नौबीरी-चौबीसी, रत्नकुंड और श्यामशिला के दर्शन शामिल हैं।
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ब्रज चाैरासी कोस यात्रा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
मान मंदिर गोशाला में शनिवार को कन्या पूजन के साथ राधारानी ब्रज चौरासी कोस यात्रा का संकल्प लिया गया। यह यात्रा संत रमेश बाबा के गोलोकगमन के बाद पहली बार उनकी अनुपस्थिति में आगे बढ़ रही है। श्रद्धालुओं ने गरीब भक्तों को ब्रज दर्शन कराने की बाबा की परंपरा को जारी रखने का प्रण लिया।
संकल्प के समय श्रद्धालुओं की आंखें नम थीं, क्योंकि वर्षों तक उन्हें बाबा का सानिध्य मिलता रहा था। हालांकि, उनका संकल्प कमजोर नहीं पड़ा। सभी ने मिलकर इस परंपरा को रुकने नहीं देने का निश्चय किया। संकल्प के बाद श्रद्धालुओं ने बरसाना की राधा-कृष्ण लीलास्थलियों के दर्शन किए। इसके साथ ही ब्रज यात्रा की शुरुआत हुई। मान मंदिर सेवा संस्थान की यात्रा-सारिणी के अनुसार, पहले दिन करीब नौ किलोमीटर की यात्रा निर्धारित है। इसमें सूर्यकुंड, ढमाला, नौबीरी-चौबीसी, रत्नकुंड और श्यामशिला के दर्शन शामिल हैं। श्रद्धालु ब्रज की इन लीलास्थलियों से जुड़ी मान्यताओं का स्मरण करते हुए राधा-कृष्ण की लीलाओं को नमन करते हैं।
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संकल्प के समय श्रद्धालुओं की आंखें नम थीं, क्योंकि वर्षों तक उन्हें बाबा का सानिध्य मिलता रहा था। हालांकि, उनका संकल्प कमजोर नहीं पड़ा। सभी ने मिलकर इस परंपरा को रुकने नहीं देने का निश्चय किया। संकल्प के बाद श्रद्धालुओं ने बरसाना की राधा-कृष्ण लीलास्थलियों के दर्शन किए। इसके साथ ही ब्रज यात्रा की शुरुआत हुई। मान मंदिर सेवा संस्थान की यात्रा-सारिणी के अनुसार, पहले दिन करीब नौ किलोमीटर की यात्रा निर्धारित है। इसमें सूर्यकुंड, ढमाला, नौबीरी-चौबीसी, रत्नकुंड और श्यामशिला के दर्शन शामिल हैं। श्रद्धालु ब्रज की इन लीलास्थलियों से जुड़ी मान्यताओं का स्मरण करते हुए राधा-कृष्ण की लीलाओं को नमन करते हैं।
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ब्रज यात्रा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ब्रज चौरासी कोस का विस्तार
ब्रज चौरासी कोस का क्षेत्र करीब 252 किलोमीटर में फैला है। इसमें 12 प्रमुख वन और 24 उपवन शामिल हैं। सैकड़ों कुंड, सरोवर तथा लीलास्थलियां भी इस क्षेत्र का हिस्सा हैं। श्रद्धालु इन लीलास्थलियों से जुड़ी मान्यताओं का स्मरण करते हैं।
यात्रा का पहला दिन
यात्रा के पहले दिन श्रद्धालु करीब नौ किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। इस दौरान वे सूर्यकुंड, ढमाला और नौबीरी-चौबीसी के दर्शन करेंगे। रत्नकुंड और श्यामशिला भी पहले दिन की यात्रा का हिस्सा हैं। यह यात्रा मान मंदिर सेवा संस्थान की सारिणी के अनुसार निर्धारित है।
ब्रज चौरासी कोस का क्षेत्र करीब 252 किलोमीटर में फैला है। इसमें 12 प्रमुख वन और 24 उपवन शामिल हैं। सैकड़ों कुंड, सरोवर तथा लीलास्थलियां भी इस क्षेत्र का हिस्सा हैं। श्रद्धालु इन लीलास्थलियों से जुड़ी मान्यताओं का स्मरण करते हैं।
यात्रा का पहला दिन
यात्रा के पहले दिन श्रद्धालु करीब नौ किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। इस दौरान वे सूर्यकुंड, ढमाला और नौबीरी-चौबीसी के दर्शन करेंगे। रत्नकुंड और श्यामशिला भी पहले दिन की यात्रा का हिस्सा हैं। यह यात्रा मान मंदिर सेवा संस्थान की सारिणी के अनुसार निर्धारित है।