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Clubfoot: अब मासूम बच्चों के टेढ़े पैर हो सकेंगे ठीक, दौड़ने की जागी उम्मीद; बिना सर्जरी के उपचार संभव
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 10 Apr 2026 02:15 PM IST
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सार
जिला अस्पताल में पोंसेटी विधि से क्लब फुट से पीड़ित बच्चों का बिना जटिल सर्जरी के सफल इलाज किया जा रहा है। मुफ्त उपचार और समय पर देखभाल से अब सैकड़ों बच्चे सामान्य जीवन जीने की ओर बढ़ रहे हैं।
Clubfoot
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
उन मासूमों के जीवन में उम्मीद की किरण जागी है जो जन्मजात टेढ़े पैरों (क्लब फुट) की समस्या से ग्रसित हैं। आधुनिक चिकित्सा पद्धति और अनुभवी डॉक्टरों की देखरेख में ऐसे बच्चों के पैरों को बिना किसी जटिल सर्जरी के उपचार कर सीधा किया जा रहा है। इससे वे भविष्य में सामान्य बच्चों की तरह दौड़ सकेंगे।
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जिला अस्पताल की ओपीडी में हर सप्ताह 20 से 25 बच्चे आते हैं। अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम अनुष्का फाउंडेशन के सहयोग से क्लब फुट का उपचार किया जा रहा है। वर्ष 2018 से अब तक यहां 311 बच्चे ठीक हो चुके हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के टेढ़े पैरों का इलाज पोंसेटी विधि से किया जा रहा है।
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इसमें पैरों पर सिलसिलेवार तरीके से प्लास्टर चढ़ाया जाता है, जिससे हड्डियां धीरे-धीरे अपनी सही दिशा में आने लगती हैं। इसमें हर सप्ताह प्लास्टर बदलने के बाद बच्चों के पैर ठीक होने लगते हैं। इसके बाद ब्रेस लगाए जाते हैं। जिसमें दोनों पैरों के जूते लगे होते हैं। शुरुआत में ब्रेस 24 घंटे लगाए जाते हैं, धीरे-धीरे समय कम करते हुए इन्हें हटा दिया जाता है।
कुछ मामलों में एक छोटा ऑपरेशन टेनोटोमी किया जाता है। आमतौर पर निजी अस्पतालों में इस लंबे इलाज का खर्च हजारों में आता है, लेकिन जिला अस्पताल में यह पूरी तरह निशुल्क है। अस्पताल में न केवल परामर्श और प्लास्टर बल्कि इलाज के बाद पहनाए जाने वाले विशेष जूते भी शासन की ओर से मुफ्त उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि जितनी जल्दी यानी जन्म के कुछ दिनों बाद ही अगर बच्चा हमारे पास आता है, तो सुधार की संभावना उतनी ही अधिक होती है। देरी होने पर समस्या बढ़ जाती है। जिसे सही होने में समय लगता है। यदि किसी भी नवजात के पैर अंदर की ओर मुड़े हुए दिखें तो तुरंत जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग (ओपीडी) में संपर्क करें। यह कोई लाइलाज बीमारी नहीं है, बस समय पर सही इलाज की जरूरत है।