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Almora News: मुनस्यारी की प्रसिद्ध राजमा पर जलवायु परिवर्तन का असर, पैदावार पर संकट

जीवन वर्ती Published by: गायत्री जोशी Updated Mon, 12 Jan 2026 11:29 AM IST
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सार

अल्मोड़ा के मुनस्यारी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण राजमा की खेती निचली ऊंचाई से उच्च हिमालयी क्षेत्रों की ओर शिफ्ट हो गई है, जिससे इसकी पैदावार और गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

Climate change is affecting Munsiyari's famous kidney beans, putting the crop yield at risk in almora
मुनस्यारी का राजमा। - फोटो : संवाद
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अल्मोड़ा में उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र मुनस्यारी की प्रसिद्ध राजमा पर जलवायु परिवर्तन और मौसम का असर पड़ा है। एक दशक पहले तक जहां 1450-1800 मीटर की ऊंचाई पर राजमा की खेती होती थी, वहीं अब वर्तमान में 1800-2400 मीटर की ऊंचाई पर इसकी पैदावार हो रही हैं। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा, कुमाऊं विवि और गढ़वाल केंद्रीय विवि के संयुक्त शोध में इस बात का खुलासा हुआ है।

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जलवायु परिवर्तन के कारण लगातार तापमान बढ़ रहा है। इससे हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। वर्षा चक्र पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। फसलों की पैदावार भी प्रभावित हो रही है। उत्तराखंड के तीन विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों ने संयुक्त रूप से पिथौरागढ़ जिले के सीमांत मुनस्यारी और बंगापानी क्षेत्र में राजमा वाले 28 गांवों में अध्ययन किया। इस दौरान पाया कि जलवायु परिर्वतन की वजह से पिछले एक दशक से राजमा की खेती हिमालय की ओर शिफ्ट हुई है। इससे राजमा की गुणवत्ता (स्वाद और आकार) भी प्रभावित हुआ है।

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शोध के मुताबिक यह बदलाव पिछले एक दशक के भीतर हुआ है। कई गांव ऐसे भी हैं जहां वर्तमान में राजमा की पैदावार हो ही नहीं रही है। एसएसजे विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के भूगोल विभाग के प्राध्यापक डॉ. दीपक के निर्देशन में हुए शोध दल में नैनीताल स्थित कुमाऊं विवि के डॉ. डीएस परिहार, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के डॉ. महेंद्र सिंह शामिल रहे। संवाद

अब इन गांवों में नहीं होती प्रसिद्ध राजमा की खेती

एक दशक पहले 1450-1800 मीटर की ऊंचाई के बीच स्थित गांव लोदी (1454 मीटर), तल्ला बिंदी (1454), सिर्तोला(1456), जोशा (1467), जारा जिबली (1470), घांघली (1532), टांगा (1537), दारमा (1565), खर्तोली(1592), बाता धुरा (1715), तल्ला ढूनामानी (1707), उमड़ाना (1709), डोलमा (1756) और तल्ला गोल्फा (1797) में मुनस्यारी के प्रसिद्ध राजमा की खेती होती थी। अब इन गांवों में इसकी पैदावार नहीं हो रही है।

पौष्टिक गुणों से भरपूर है यह राजमा

हिमालयी क्षेत्र में उत्पादित राजमा पौष्टिक गुणों से भरपूर है। इन्हीं गुणों के चलते पूरे उत्तर भारत में इसकी मांग है। वर्तमान में पिथौरागढ़ और हल्द्वानी के बाजारों तक ही यह पहुंच पाती है। मुनस्यारी पहुंचने वाले पर्यटक राजमा के स्वाद के दीवाने रहते हैं। इसके चलते मुनस्यारी की राजमा की चर्चा देश ही नहीं विदेशों तक होती है।

अब इन गांवों में हो रही है राजमा की पैदावार

वर्तमान में राजमा 1800-2400 मीटर तक की ऊंचाई पर स्थित मल्ला ढूनामानी(1910 मीटर), लोदी धुरा (1933), चुलकोट (1983), मल्ला गोल्फा (1985), यांगचौर (2052) में हो रही है। इसके अलावा बोना (2077), गांधी नगर (2115), क्विरी जिमिया (2137), पातों (2159), बोथी (2167), पाल धुरा (2211), निर्तोली (2272), मल्ला गैंला (2332) और तोमिक (2391) गांवों में इसकी पैदावार हो रही है। संवाद

मुनस्यारी की राजमा पर जलवायु परिर्वतन का असर देखने को मिला है। अध्ययन में पता चला कि राजमा की पैदावार ग्लोबल वार्मिंग के कारण उच्च हिमालयी क्षेत्रों की ओर खिसक रही है। निचले वाले इलाकों की अपेक्षा ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में राजमा की गुणवक्ता बेहतर पाई गई है। - डॉ. दीपक, मुख्य अन्वेषक भूगोल विभाग एसएसजे विवि अल्मोड़ा

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