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Almora News: बूढ़ी और आयु सीमा पार होने के बाद भी दौड़ रही हैं केमू की बसें
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Fri, 02 Jan 2026 12:03 AM IST
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अल्मोड़ा। पहाड़ की लाइफ लाइन कुमाऊं मोटर ओनर्स यूनियन लिमिटेड (केमू) के कई बसें निर्धारित आयु सीमा पार करने के बाद भी सड़कों पर दौड़ रही हैं। कई बसें निर्धारित आयु सीमा पार करने के कगार पर हैं। हादसों के बाद भी इन बसों को बदलने पर ध्यान नहीं दिया जाता है।
केमू के बेडे में कुल 400 बसें हैं। इन बसों का संचालन अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत समेत पहाड़ के अन्य क्षेत्रों में होता है। केमू के मानकों के अनुसार बसों की समय सीमा 15 साल चलाने के बाद पूरी हो जाती है। सूत्रों के मुताबिक कई बसें ऐसी है जो आयु सीमा पूरी कर चुकी हैं, लेकिन उन्हें फिर भी सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। कभी बसों के ब्रेक डाउन हो जाते हैं तो कभी चलती बस का टायर निकल जाता है। पहाड़ के खतरनाक रास्तों पर कब हादसा हो जाए इसका अंदाजा खुद चालकों को भी नहीं रहता है। केमू पर यात्री काफी भरोसा करते हैं। पहाड़ के अधिकांश रूटों पर यात्री केमू की बसों से ही सेवा करते हैं। कई बार चालक बस की क्षमता से अधिक सवारी बैठा लेते हैं। इस कारण कई बाद हादसे भी हो चुके हैं।
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केमू की बसों में ओवरलोडिंग की भी रहती है समस्या
अल्मोड़ा। केमू की बसों में कई बार क्षमता से अधिक सवारी पाई गई। इस पर कई बसों को सीज भी किया गया। इसके बावजूद यातायात नियमों की अनदेखी कर बसें दौड़ रही है। ओवरलोडिंग के कारण भी कई बार हादसे होते हैं। खास कर पहाड़ के ग्रामीण इलाकोें में संचालित बसों में ओवरलोडिंग के मामले अधिक देखे जाते हैं।
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कई बसों में फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं
अल्मोड़ा। केमू की कई बसों में फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं है। यदि सफर के दौरान किसी यात्री की तबियत खराब हो जाए या कोई हादसा हो जाए तो प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल पाता है। ऐसे में यात्रियों को नजदीकी अस्पताल या मेडिकल स्टोर पर जाकर प्राथमिक उपचार लेना पड़ता है।
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आयु सीमा पूरी कर चुकी बसों को बदल दिया जाता है। दुर्घटनाग्रस्त हुई बस रामनगर जोन की थी। मामले में जानकारी जुटाई जा रही है। यात्रियों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
हिम्मत सिंह नयाल, अधिशासी निदेशक केमू
पहाड़ों पर चलने वाली केमू बसों की फिटनेस पर सख्ती
पहाड़ों पर चलने वाली केमू बसों की फिटनेस पर सख्ती
संभागीय निरीक्षक और एआरटीओ करेंगे जांच
हल्द्वानी व रामनगर से संचालित होती हैं करीब 300 केमू बसें
भिकियासैंण हादसे के बाद परिवहन महकमा हुआ अलर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
अल्मोड़ा। भिकियासैंण क्षेत्र में हुए केमू बस हादसे के बाद परिवहन विभाग ने पहाड़ों में संचालित केमू (कुमाऊं मोटर ओनर्स यूनियन) की बसों की फिटनेस जांच को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। अब पहाड़ी मार्गों पर चलने वाली केमू बसों की फिटनेस की जांच संभागीय निरीक्षक और संबंधित सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) स्वयं करेंगे।
हल्द्वानी और रामनगर डिपो से करीब 300 केमू बसें पर्वतीय मार्गों पर संचालित होती हैं। इन बसों की यांत्रिक स्थिति, ब्रेक, टायर, स्टीयरिंग, लाइट और अन्य सुरक्षा मानकों की गहन जांच की जाएगी, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। हाल ही में भिकियासैंण क्षेत्र में हुए बस हादसे के बाद परिवहन महकमा पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। विभागीय स्तर पर यह आशंका जताई जा रही है कि फिटनेस में लापरवाही या तकनीकी खामियां हादसों का कारण बन सकती हैं, जिसे देखते हुए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
परिवहन विभाग के अनुसार फिटनेस जांच के दौरान यदि किसी भी बस में तकनीकी खामी पाई जाती है तो संबंधित वाहन को तत्काल सड़क से हटाया जाएगा। साथ ही बस स्वामी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि पर्वतीय मार्गों की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए बसों की फिटनेस और रखरखाव बेहद अहम है। यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
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अल्मोड़ा में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आज
अल्मोड़ा। जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर आज सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता डीएम अंशुल सिंह करेंगे। बैठक में यातायात नियमों के पालन, दुर्घटना रोकथाम और पहाड़ी मार्गों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। संवाद
इनसेट कोट-
पहाड़ों पर चलने वाली केमू बसों की फिटनेस की जांच संभागीय निरीक्षक और एआरटीओ करेंगे। इसके लिए आदेश जारी कर दिए हैं। - अरविंद पांडे, आरटीओ प्रवर्तन हल्द्वानी
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केमू के बेडे में कुल 400 बसें हैं। इन बसों का संचालन अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत समेत पहाड़ के अन्य क्षेत्रों में होता है। केमू के मानकों के अनुसार बसों की समय सीमा 15 साल चलाने के बाद पूरी हो जाती है। सूत्रों के मुताबिक कई बसें ऐसी है जो आयु सीमा पूरी कर चुकी हैं, लेकिन उन्हें फिर भी सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। कभी बसों के ब्रेक डाउन हो जाते हैं तो कभी चलती बस का टायर निकल जाता है। पहाड़ के खतरनाक रास्तों पर कब हादसा हो जाए इसका अंदाजा खुद चालकों को भी नहीं रहता है। केमू पर यात्री काफी भरोसा करते हैं। पहाड़ के अधिकांश रूटों पर यात्री केमू की बसों से ही सेवा करते हैं। कई बार चालक बस की क्षमता से अधिक सवारी बैठा लेते हैं। इस कारण कई बाद हादसे भी हो चुके हैं।
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केमू की बसों में ओवरलोडिंग की भी रहती है समस्या
अल्मोड़ा। केमू की बसों में कई बार क्षमता से अधिक सवारी पाई गई। इस पर कई बसों को सीज भी किया गया। इसके बावजूद यातायात नियमों की अनदेखी कर बसें दौड़ रही है। ओवरलोडिंग के कारण भी कई बार हादसे होते हैं। खास कर पहाड़ के ग्रामीण इलाकोें में संचालित बसों में ओवरलोडिंग के मामले अधिक देखे जाते हैं।
कई बसों में फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं
अल्मोड़ा। केमू की कई बसों में फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं है। यदि सफर के दौरान किसी यात्री की तबियत खराब हो जाए या कोई हादसा हो जाए तो प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल पाता है। ऐसे में यात्रियों को नजदीकी अस्पताल या मेडिकल स्टोर पर जाकर प्राथमिक उपचार लेना पड़ता है।
आयु सीमा पूरी कर चुकी बसों को बदल दिया जाता है। दुर्घटनाग्रस्त हुई बस रामनगर जोन की थी। मामले में जानकारी जुटाई जा रही है। यात्रियों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
हिम्मत सिंह नयाल, अधिशासी निदेशक केमू
पहाड़ों पर चलने वाली केमू बसों की फिटनेस पर सख्ती
पहाड़ों पर चलने वाली केमू बसों की फिटनेस पर सख्ती
संभागीय निरीक्षक और एआरटीओ करेंगे जांच
हल्द्वानी व रामनगर से संचालित होती हैं करीब 300 केमू बसें
भिकियासैंण हादसे के बाद परिवहन महकमा हुआ अलर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
अल्मोड़ा। भिकियासैंण क्षेत्र में हुए केमू बस हादसे के बाद परिवहन विभाग ने पहाड़ों में संचालित केमू (कुमाऊं मोटर ओनर्स यूनियन) की बसों की फिटनेस जांच को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। अब पहाड़ी मार्गों पर चलने वाली केमू बसों की फिटनेस की जांच संभागीय निरीक्षक और संबंधित सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) स्वयं करेंगे।
हल्द्वानी और रामनगर डिपो से करीब 300 केमू बसें पर्वतीय मार्गों पर संचालित होती हैं। इन बसों की यांत्रिक स्थिति, ब्रेक, टायर, स्टीयरिंग, लाइट और अन्य सुरक्षा मानकों की गहन जांच की जाएगी, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। हाल ही में भिकियासैंण क्षेत्र में हुए बस हादसे के बाद परिवहन महकमा पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। विभागीय स्तर पर यह आशंका जताई जा रही है कि फिटनेस में लापरवाही या तकनीकी खामियां हादसों का कारण बन सकती हैं, जिसे देखते हुए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
परिवहन विभाग के अनुसार फिटनेस जांच के दौरान यदि किसी भी बस में तकनीकी खामी पाई जाती है तो संबंधित वाहन को तत्काल सड़क से हटाया जाएगा। साथ ही बस स्वामी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि पर्वतीय मार्गों की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए बसों की फिटनेस और रखरखाव बेहद अहम है। यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
अल्मोड़ा में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आज
अल्मोड़ा। जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर आज सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता डीएम अंशुल सिंह करेंगे। बैठक में यातायात नियमों के पालन, दुर्घटना रोकथाम और पहाड़ी मार्गों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। संवाद
इनसेट कोट-
पहाड़ों पर चलने वाली केमू बसों की फिटनेस की जांच संभागीय निरीक्षक और एआरटीओ करेंगे। इसके लिए आदेश जारी कर दिए हैं। - अरविंद पांडे, आरटीओ प्रवर्तन हल्द्वानी

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