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Uk: उम्र बढ़ाने वाले प्रोटीन पर असरदार तीन यौगिक खोजे, एसएसजे विश्वविद्यालय में हुए शोध में पुष्टि

संजय नयाल Published by: गायत्री जोशी Updated Fri, 02 Jan 2026 10:46 AM IST
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सार

बढ़ती उम्र की रफ्तार को धीमा करने की कोशिशों में जुटे वैज्ञानिकों को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने आंवला, गिलोय और गोखरू के चूर्ण में मौजूद खास यौगिकों की पहचान की है।

Three compounds that effectively target aging-related proteins have been discovered
सांकेतिक तस्वीर।
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विस्तार
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 बढ़ती उम्र की रफ्तार को धीमा करने की कोशिशों में जुटे वैज्ञानिकों को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने आंवला, गिलोय और गोखरू के चूर्ण में मौजूद खास यौगिकों की पहचान की है। ये शरीर में उम्र बढ़ाने वाले प्रोटीन के असर को कम करने में प्रभावी पाए गए हैं।

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विशेषज्ञों के मुताबिक, एकेटी-1 प्रोटीन की अधिक सक्रियता कोशिकाओं की उम्र बढ़ने, सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस की वजह बनती है। शोध में आंवला, गिलोय और गोखरू में पाए जाने वाले तीन योगिक इसके लिए सबसे प्रभावी साबित हुए। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज भविष्य में एंटी-एजिंग दवाओं और उत्पादों के विकास की दिशा में मील का पत्थर बन सकती है। अमीषा बिष्ट के इस शोध में वनस्पति विज्ञान विभाग के मुख्य अन्वेषक डॉ. सुभाष चंद्रा, अनीता नयाल, दिशा तिवारी और संजय कुमार शामिल रहे।

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अब इसका क्लिनिकल ट्रायल होना है ताकि इन यौगिकों के प्रभाव को व्यावहारिक स्तर पर परखा जा सके। यदि ट्रायल में भी सकारात्मक नतीजे मिलते हैं तो औषधीय पौधों के इन यौगिकों से एंटी-एजिंग क्रीम और दवाओं के निर्माण का रास्ता खुल जाएगा।

ऐसे हुआ शोध

शोध में आंवला (फाइलेंथस एम्बलिका), गिलोय (टिनोस्पोरा कोर्डिफोलिया) और गोखरू (ट्राइबुलस टेरेस्ट्रिस) के चूर्ण के 17 सक्रिय यौगिकों का कंप्यूटेशनल तकनीक से विश्लेषण किया गया। अध्ययन के दौरान 14 यौगिकों ने उत्साहजनक परिणाम दिए। इनमें से तीन केम्पफेरोल, एन-कैफियोलटाइरामाइन और मल्टीफिडॉल ग्लूकोसाइड एकेटी-1 की सक्रियता घटाने में सबसे प्रभावी साबित हुए।

आयुर्वेद से आधुनिक विज्ञान तक

आंवला विटामिन सी का समृद्ध स्रोत है जो प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने के साथ-साथ एंटी ऑक्सीडेंट के रूप में फ्री रेडिकल्स से सुरक्षा देता है। आयुर्वेद से लेकर आधुनिक विज्ञान तक में इसकी गुणों की पुष्टि हुई है। इससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी पड़ती है। त्वचा में निखार आता है और पाचन तंत्र सुदृढ़ होता है। गिलोय एक प्रभावी इम्यून बूस्टर के रूप में जाना जाता है जो बुखार, मलेरिया और डेंगू जैसे संक्रमणों से बचाव में सहायक है। वहींए गोखरू शक्तिवर्धक जड़ी-बूटी मानी जाती है। यह शरीर को मजबूती देने के साथ मूत्र संक्रमण और किडनी संबंधी समस्याओं से भी बचाव करती है।

आंवला, गिलोय और गोखरू के यौगिक बढ़ती उम्र को नियंत्रित कर सकते हैं। शोध के बाद तीन यौगिकों को क्लिनिकल ट्रायल के लिए चुना गया है। अगर ट्रायल में भी सफलता मिलती है तो यह एंटी एजिंग के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि होगी। -अमीषा बिष्ट, शोधकर्ता, वनस्पति विज्ञान विभाग, एसएसजे परिसर, अल्मोड़ा

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