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Almora News: बदलती जीवनशैली और खान-पान के कारण जकड़ रही है किड़नी की बीमारी
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अल्मोड़ा। बदलती जीवनशैली और खान-पान के कारण किडनी (गुर्दे) से जुड़ी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। लोग किडनी फेल्योर और डायलिसिस जैसी गंभीर समस्याओं की चपेट में आ रहे हैं। युवा मरीजों के मामलों में अनियंत्रित ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) किडनी फेल होने का मुख्य कारण बन रहा है।
मेडिकल कॉलेज के अधीन बेस अस्पताल में पैथोलॉजी और डायलिसिस के लिए रोजाना 10 से 12 मरीज आते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान और बढ़ते तनाव के कारण किडनी रोगों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। किडनी हमारे शरीर का बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो खून को फिल्टर करने के साथ-साथ शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने का काम करती है। भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और बढ़ता स्ट्रेस का युवाओं की किडनी पर भी प्रभाव पड़ रहा है।
डॉक्टरों के अनुसार 30 साल के युवा मरीजों के मामलों में अनियंत्रित ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) किडनी फेल होने का मुख्य कारण बन रहा है। खानपान में कोल्डड्रिंक और फास्ट फूड का अत्यधिक इस्तेमाल गुर्दों को खतरनाक तरीके से नुकसान पहुंचा रहा है। बेस अस्पताल के डायलिसिस यूनिट में हर महीने आठ से अधिक युवा मरीज आते हैं।
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कोल्डड्रिंक किडनी को करती है प्रभावित
कोल्डड्रिंक में भारी मात्रा में शर्करा होती है, जिससे मोटापा और यूरिक एसिड बढ़ता है। यूरिक एसिड बढ़ने पर यह जोड़ों में जमा होने लगता है और किडनी पर इसे बाहर निकालने के लिए अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे
गुर्दों में सूजन और सिकुड़न आ जाती है, जिससे उसकी कार्यक्षमता घट जाती है। गुर्दे रक्त से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ निकालने तथा मूत्र बनाने में असमर्थ हो जाते हैं। ऐसे में किडनी ट्रांसप्लांट या डायलिसिस की नौबत आ जाती है।
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किडनी को स्वस्थ बनाए रखने के लिए नियमित जांच कराएं। डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित मरीजों को साल में कम से कम एक बार किडनी फंक्शन टेस्ट और यूरिन टेस्ट कराना चाहिए। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और वजन को नियंत्रित कर किडनी से जुड़ी बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।
डॉ. अशोक कुमार, विभागाध्यक्ष मेडिसन विभाग अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज के अधीन बेस अस्पताल में पैथोलॉजी और डायलिसिस के लिए रोजाना 10 से 12 मरीज आते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान और बढ़ते तनाव के कारण किडनी रोगों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। किडनी हमारे शरीर का बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो खून को फिल्टर करने के साथ-साथ शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने का काम करती है। भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और बढ़ता स्ट्रेस का युवाओं की किडनी पर भी प्रभाव पड़ रहा है।
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डॉक्टरों के अनुसार 30 साल के युवा मरीजों के मामलों में अनियंत्रित ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) किडनी फेल होने का मुख्य कारण बन रहा है। खानपान में कोल्डड्रिंक और फास्ट फूड का अत्यधिक इस्तेमाल गुर्दों को खतरनाक तरीके से नुकसान पहुंचा रहा है। बेस अस्पताल के डायलिसिस यूनिट में हर महीने आठ से अधिक युवा मरीज आते हैं।
कोल्डड्रिंक किडनी को करती है प्रभावित
कोल्डड्रिंक में भारी मात्रा में शर्करा होती है, जिससे मोटापा और यूरिक एसिड बढ़ता है। यूरिक एसिड बढ़ने पर यह जोड़ों में जमा होने लगता है और किडनी पर इसे बाहर निकालने के लिए अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे
गुर्दों में सूजन और सिकुड़न आ जाती है, जिससे उसकी कार्यक्षमता घट जाती है। गुर्दे रक्त से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ निकालने तथा मूत्र बनाने में असमर्थ हो जाते हैं। ऐसे में किडनी ट्रांसप्लांट या डायलिसिस की नौबत आ जाती है।
किडनी को स्वस्थ बनाए रखने के लिए नियमित जांच कराएं। डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित मरीजों को साल में कम से कम एक बार किडनी फंक्शन टेस्ट और यूरिन टेस्ट कराना चाहिए। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और वजन को नियंत्रित कर किडनी से जुड़ी बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।
डॉ. अशोक कुमार, विभागाध्यक्ष मेडिसन विभाग अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज