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Almora News: अधिकारी के तबादले का बहाना, आपकी गाढ़ी कमाई पर निशाना

संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा Updated Mon, 23 Mar 2026 12:05 AM IST
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The excuse of transferring an officer is to target your hard earned money.
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नैनीताल। इन दिनों साइबर ठगों ने ठगी का एक नया तरीका निकाला है। ठग अब जिले के बड़े अधिकारियों जैसे डीएम, एडीएम की फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बना कर पुराना घरेलू सामान बेचने का झांसा दे रहे हैं। हालांकि अधिकारियों को इसकी सूचना मिलने के बाद उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी के झांसे में न आएं।
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ठगों ने अल्मोड़ा डीएम अंशुल सिंह और नैनीताल एडीएम विवेक राय सहित कई वरिष्ठ अफसरों की फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल तैयार की है। तल्लीताल निवासी युवक ने बताया कि पिछले दिनों अल्मोड़ा डीएम अंशुल सिंह की उनके पास फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। इसे एक्सेप्ट करते ही युवक के मोबाइल पर मैसेज आया कि सीआरपीएफ कैंप में तैनात मेरे (डीएम) एक दोस्त संतोष कोरमत अभी आपको कॉल करेंगे। मैंने आपका नंबर उन्हें भेज दिया है। वे सीआरपीएफ अधिकारी हैं। उनका तबादला हो गया है। वे अपना घरेलू फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक सामान सेकंड हैंड बेच रहे हैं। सभी सामान अच्छी हालत में हैं और दाम बहुत कम हैं। पसंद आए तो ले सकते हैं। ऐसा मौका न चूकें। इसी तरह नैनीताल एडीएम विवेक राय की भी फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल चल रही है। दोनों अधिकारियों ने लोगों से किसी के झांसे में न आने की अपील की है।
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सस्ते के लालच में महंगी भूल
लोग अक्सर यह सोचकर झांसे में आ जाते हैं कि बड़े अधिकारी का सामान है तो क्वालिटी अच्छी होगी और कीमत भी कम है। जैसे ही कोई व्यक्ति सामान खरीदने की इच्छा जताता है तो ठग उसे आर्मी कूरियर या सरकारी ट्रक से सामान भेजने का झांसा देकर एडवांस पेमेंट या टोकन मनी की मांग करते हैं। जैसे ही रुपये ट्रांसफर होते हैं, साहब का वह नंबर और प्रोफाइल दोनों ही बंद हो जाते हैं।
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उत्तराखंड मंडी परिषद अध्यक्ष अनिल डब्बू का व्हाट्सएप हैक
उत्तराखंड मंडी परिषद के अध्यक्ष अनिल कपूर ''''''''डब्बू'''''''' का व्हाट्सएप अकाउंट साइबर ठगों ने बीते दिन हैक कर लिया। हैकर्स ने उनके अकाउंट से परिचितों को संदेश भेज कर 48 हजार की आर्थिक सहायता की मांग की। घटना का पता चलते ही अनिल डब्बू ने लोगों से अपील की कि उनके नंबर से आने वाले किसी भी संदिग्ध संदेश या रुपये की मांग पर ध्यान न दें और कोई भी ट्रांजेक्शन न करें।

सावधानी ही बचाव है
- किसी भी अधिकारी के नाम से आने वाले सस्ते सामान के संदेश के झांसे में न आएं।
- अनजान नंबर से आने वाली फ्रेंड रिक्वेस्ट को बिना जांचे स्वीकार न करें।
- धोखाधड़ी का अहसास होते ही तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर सूचना दें।

सावधान रहें, जिला प्रशासन या कोई भी वरिष्ठ अधिकारी कभी भी सोशल मीडिया के माध्यम से रुपये या व्यक्तिगत जानकारी की मांग नहीं करता है। साइबर ठगों के झांसे में आकर किसी भी संदिग्ध लिंक या संदेश का उत्तर न दें। तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचित करें। आपकी सतर्कता ही इन फर्जी आईडी बनाने वाले अपराधियों को पकड़ने का सबसे प्रभावी तरीका है। - डॉ. जगदीश चंद्रा, एसपी, नैनीताल


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