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Almora News: डोली लायक रास्ता नहीं... संकरी पगडंडी पर जिंदगी का इम्तिहान
Thu, 20 Aug 2026 12:40 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Thu, 20 Aug 2026 12:40 AM IST
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मौलेखाल (अल्मोड़ा)। गांव में सड़क तो छोड़िए डोली ले जाने लायक रास्ता नहीं होने से सल्ट के सिंगरौं गांव में 77 वर्षीय सरस्वती देवी की जान पर बन आई। तबीयत बिगड़ी तो उन्हें सड़क तक पहुंचाना परिजनों के लिए चुनाैती बन गया। पहले तो बेटी, नातिन व परिजनों ने खुद कोशिश की और बाद में नेपाली मजदूरों की मदद ली। चार घंटे की जद्दोजहद के बाद उन्हें सड़क तक पहुंचाकर वाहन में काशीपुर भेजा गया। सल्ट विकासखंड के राजस्व ग्राम सिंगरौं में सरस्वती बोरा अपने घर में अकेली रहती हैं। उनके तीन बेटे दिनेश, पुष्कर और प्रताप रोजगार के लिए पलायन कर परिवार सहित दिल्ली में रहते हैं। एक बेटी तराड़ और दूसरी काशीपुर में रहती है। तबीयत बिगड़ने की सूचना पर उनकी बेटी हेमा अपने पति के साथ तराड़ से गांव पहुंचीं। तल्ली भ्याड़ी और काशीपुर से उनकी नातिनें भी पहुंचीं और बुजुर्ग महिला को सड़क तक पहुंचाने में जुट गईं। परिवार की महिलाओं ने रास्ते की दुश्वारियों के बीच सरस्वती को सड़क तक पहुंचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी।
सरस्वती को परिजन कंधों पर लेकर घर से निकले। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद जब आधा रास्ता भी पूरा नहीं हो सका तो परिजनों ने रास्ते में मौजूद नेपाली मजदूरों से मदद मांगी। मजदूरों ने बुजुर्ग महिला को पीठ पर उठाया और ढाई किलोमीटर का कठिन रास्ता पार कर चार घंटे की जद्दोजहद के बाद सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद परिजन निजी वाहन से उन्हें उपचार के लिए काशीपुर ले गए।
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सरस्वती को परिजन कंधों पर लेकर घर से निकले। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद जब आधा रास्ता भी पूरा नहीं हो सका तो परिजनों ने रास्ते में मौजूद नेपाली मजदूरों से मदद मांगी। मजदूरों ने बुजुर्ग महिला को पीठ पर उठाया और ढाई किलोमीटर का कठिन रास्ता पार कर चार घंटे की जद्दोजहद के बाद सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद परिजन निजी वाहन से उन्हें उपचार के लिए काशीपुर ले गए।
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