{"_id":"69dbe49ff0646b6c7a08f660","slug":"syalde-bikhauti-fair-begins-today-cultural-fervor-will-continue-for-four-days-almora-news-c-232-1-alm1019-142060-2026-04-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Almora News: स्याल्दे बिखौती मेला आज से शुरू, चार दिनों तक रहेगा सांस्कृतिक उल्लास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Almora News: स्याल्दे बिखौती मेला आज से शुरू, चार दिनों तक रहेगा सांस्कृतिक उल्लास
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Sun, 12 Apr 2026 11:59 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। पाली पछांऊ में होने वाला पौराणिक स्याल्दे बिखौती मेला सोमवार 13 अप्रैल से पूरे उत्साह के साथ शुरू हो रहा है। मेले का शुभारंभ शाम 4 बजे विभांडेश्वर मंदिर में रणां ग्रामवासियों की ओर से नगाड़ों और निशानों के साथ मंदिर परिक्रमा से किया जाएगा।
उद्घाटन अवसर पर विद्यालयों और सांस्कृतिक टीमों की तरफ से रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे जो देर रात तक जारी रहेंगे।
रात में आल, गरख और नौज्यूला धड़ों से जुड़े विभिन्न गांवों के रणबांकुरे ढोल-नगाड़ों, रणसिंघों, दुंदुभियों और बीनबाजों की गूंज के साथ मेले में पहुंचेंगे। हुड़के और चिमटे की थाप पर झोड़ा-चांचरी गायन करते हुए सभी दल मंदिर परिसर में अपने निर्धारित स्थानों पर एकत्र होंगे। सुबह श्रद्धालु सरस्वती, सुरभि और नंदिनी नदियों के संगम स्थल पर स्नान कर मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे और फिर अपने गांवों को प्रस्थान करेंगे।
सोमवार को द्वाराहाट नगर में बट पुजै मेले का आयोजन होगा। इस दौरान विद्यालयी टीमों की ओर से सांस्कृतिक जुलूस निकाला जाएगा और शाम 4 बजे नौज्यूला धड़े की ओर से ओड़ा भेंटने की पारंपरिक रस्म अदा की जाएगी। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
15 अप्रैल को मुख्य स्याल्दे मेले में गरख और आल धड़ों की तरफ से ओड़ा भेंटने की रस्म निभाई जाएगी। झोड़ा-भगनौल गायन के बाद शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
16 अप्रैल को मेले का समापन व्यापारिक मेला एवं मीना बाजार के रूप में होगा जिसमें क्षेत्रीय उत्पादों की विशेष झलक दिखेगी। यह मेला क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, लोक कला और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है।
Trending Videos
उद्घाटन अवसर पर विद्यालयों और सांस्कृतिक टीमों की तरफ से रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे जो देर रात तक जारी रहेंगे।
रात में आल, गरख और नौज्यूला धड़ों से जुड़े विभिन्न गांवों के रणबांकुरे ढोल-नगाड़ों, रणसिंघों, दुंदुभियों और बीनबाजों की गूंज के साथ मेले में पहुंचेंगे। हुड़के और चिमटे की थाप पर झोड़ा-चांचरी गायन करते हुए सभी दल मंदिर परिसर में अपने निर्धारित स्थानों पर एकत्र होंगे। सुबह श्रद्धालु सरस्वती, सुरभि और नंदिनी नदियों के संगम स्थल पर स्नान कर मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे और फिर अपने गांवों को प्रस्थान करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
सोमवार को द्वाराहाट नगर में बट पुजै मेले का आयोजन होगा। इस दौरान विद्यालयी टीमों की ओर से सांस्कृतिक जुलूस निकाला जाएगा और शाम 4 बजे नौज्यूला धड़े की ओर से ओड़ा भेंटने की पारंपरिक रस्म अदा की जाएगी। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
15 अप्रैल को मुख्य स्याल्दे मेले में गरख और आल धड़ों की तरफ से ओड़ा भेंटने की रस्म निभाई जाएगी। झोड़ा-भगनौल गायन के बाद शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
16 अप्रैल को मेले का समापन व्यापारिक मेला एवं मीना बाजार के रूप में होगा जिसमें क्षेत्रीय उत्पादों की विशेष झलक दिखेगी। यह मेला क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, लोक कला और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है।