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Almora News: मानसून की पहली बारिश भी नहीं झेल पाया 15.82 करोड़ का निर्माणाधीन पॉलीटेक्निक भवन
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मौलेखाल (अल्मोड़ा)। सल्ट विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से लगभग 15.82 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बन रहा राजकीय पॉलीटेक्निक सल्ट का अनावासीय भवन मानसून की पहली बारिश भी नहीं झेल पाया। पहली ही बरसात में निर्माण स्थल के नीचे से जमीन खिसक गई है जिससे भवन का एक हिस्सा हवा में लटक गया है। इस लटके हुए हिस्से को अस्थायी टेक (सहारे) के भरोसे टिकाया गया है जिसने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
बता दें कि इस भवन का भूमि पूजन इसी वर्ष 3 फरवरी 2026 को किया गया था लेकिन निर्माण के शुरुआती दौर में ही आई इस आपदा ने तकनीकी मानकों की पोल खोल कर रख दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून की अभी शुरुआत हुई है और आने वाले महीनों में क्षेत्र में भारी बारिश होने की संभावना है। यदि लगातार बारिश के कारण भूमि का कटाव बढ़ता है या नीचे की जमीन कमजोर साबित होती है, तो पूरे भवन की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। इससे इस भवन के निर्माण कार्य पर कई सवाल उठने लगे हैं।
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सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतने बड़े सरकारी निर्माण कार्य से पहले भू-गर्भ वैज्ञानिकों एवं तकनीकी विशेषज्ञों की ओर स्थल का परीक्षण किया गया था या नहीं? यदि परीक्षण हुआ था, तो निर्माण के शुरुआती चरण में ही जमीन खिसकने जैसी स्थिति कैसे पैदा हो गई। यदि परीक्षण नहीं कराया गया, तो इतनी बड़ी परियोजना में इस स्तर की लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि भवन निर्माण की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए तथा भू-वैज्ञानिकों से दोबारा स्थल का निरीक्षण कराया जाए।
पार्किंग परियोजना भू-वैज्ञानिक रिपोर्ट में फंसी, बजट भी लौटाना पड़ा
मौलेखाल में कुछ वर्ष पूर्व लगभग चार करोड़ की लागत से प्रस्तावित बहुमंजिला पार्किंग निर्माण योजना को भू-वैज्ञानिकों की रिपोर्ट में स्थल अनुपयुक्त पाए जाने के कारण मंजूरी नहीं मिल सकी थी। भू-वैज्ञानिक परीक्षण में जमीन को सुरक्षित निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं माना गया जिसके चलते यह महत्वाकांक्षी योजना आज तक अधर में लटकी हुई है। स्थिति यह रही कि पार्किंग निर्माण के लिए स्वीकृत बजट भी उपयोग न होने के कारण शासन को वापस लौटाना पड़ा। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि जब पार्किंग जैसी परियोजना में भू-वैज्ञानिक रिपोर्ट को इतना महत्व दिया गया था, तो 15.82 करोड़ रुपये की इस बड़ी निर्माण परियोजना में स्थल की सुरक्षा और भू-वैज्ञानिक परीक्षण को लेकर क्या मानक अपनाए गए थे।
कोट
भवन का मुख्य ढांचा पूरी तरह सुरक्षित भूमि पर स्थित है। जिस हिस्से के नीचे जमीन बैठने से खाली स्थान दिखाई दे रहा है वह मुख्य भवन का हिस्सा नहीं है। वहां रिटेनिंग वॉल बनाकर भराव का कार्य किया जाएगा। इससे मुख्य भवन की सुरक्षा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। निर्माण कार्य शुरू होने से पहले भू-वैज्ञानिकों की ओर से स्थल का परीक्षण भी कराया गया था। - नेहा रावत, जूनियर इंजीनियर, सीएनडीएस
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बता दें कि इस भवन का भूमि पूजन इसी वर्ष 3 फरवरी 2026 को किया गया था लेकिन निर्माण के शुरुआती दौर में ही आई इस आपदा ने तकनीकी मानकों की पोल खोल कर रख दी है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून की अभी शुरुआत हुई है और आने वाले महीनों में क्षेत्र में भारी बारिश होने की संभावना है। यदि लगातार बारिश के कारण भूमि का कटाव बढ़ता है या नीचे की जमीन कमजोर साबित होती है, तो पूरे भवन की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। इससे इस भवन के निर्माण कार्य पर कई सवाल उठने लगे हैं।
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सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतने बड़े सरकारी निर्माण कार्य से पहले भू-गर्भ वैज्ञानिकों एवं तकनीकी विशेषज्ञों की ओर स्थल का परीक्षण किया गया था या नहीं? यदि परीक्षण हुआ था, तो निर्माण के शुरुआती चरण में ही जमीन खिसकने जैसी स्थिति कैसे पैदा हो गई। यदि परीक्षण नहीं कराया गया, तो इतनी बड़ी परियोजना में इस स्तर की लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि भवन निर्माण की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए तथा भू-वैज्ञानिकों से दोबारा स्थल का निरीक्षण कराया जाए।
पार्किंग परियोजना भू-वैज्ञानिक रिपोर्ट में फंसी, बजट भी लौटाना पड़ा
मौलेखाल में कुछ वर्ष पूर्व लगभग चार करोड़ की लागत से प्रस्तावित बहुमंजिला पार्किंग निर्माण योजना को भू-वैज्ञानिकों की रिपोर्ट में स्थल अनुपयुक्त पाए जाने के कारण मंजूरी नहीं मिल सकी थी। भू-वैज्ञानिक परीक्षण में जमीन को सुरक्षित निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं माना गया जिसके चलते यह महत्वाकांक्षी योजना आज तक अधर में लटकी हुई है। स्थिति यह रही कि पार्किंग निर्माण के लिए स्वीकृत बजट भी उपयोग न होने के कारण शासन को वापस लौटाना पड़ा। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि जब पार्किंग जैसी परियोजना में भू-वैज्ञानिक रिपोर्ट को इतना महत्व दिया गया था, तो 15.82 करोड़ रुपये की इस बड़ी निर्माण परियोजना में स्थल की सुरक्षा और भू-वैज्ञानिक परीक्षण को लेकर क्या मानक अपनाए गए थे।
कोट
भवन का मुख्य ढांचा पूरी तरह सुरक्षित भूमि पर स्थित है। जिस हिस्से के नीचे जमीन बैठने से खाली स्थान दिखाई दे रहा है वह मुख्य भवन का हिस्सा नहीं है। वहां रिटेनिंग वॉल बनाकर भराव का कार्य किया जाएगा। इससे मुख्य भवन की सुरक्षा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। निर्माण कार्य शुरू होने से पहले भू-वैज्ञानिकों की ओर से स्थल का परीक्षण भी कराया गया था। - नेहा रावत, जूनियर इंजीनियर, सीएनडीएस