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Almora News: प्रवासियों की वापसी से गुलजार हुए पहाड़, गांवों और बाजारों में लौटी रौनक
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स्याल्दे (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में इन दिनों प्रवासियों की घर वापसी से गांवों और बाजारों में रौनक लौट आई है। जून माह में बच्चों की छुट्टियों के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी अपने पैतृक गांव पहुंचे हैं, जिससे लंबे समय से सूने पड़े घरों में फिर से चहल-पहल दिखाई देने लगी है। बंद मकानों में बच्चों की किलकारियां गूंज रही हैं और गांवों का माहौल जीवंत हो उठा है।
स्याल्दे, देघाट, सराईखेत, जौरासी, नागचूलाखाल, बल्मरा और भाकूड़ा जैसे बाजार भी इन दिनों गुलजार नजर आ रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि प्रवासियों के आने से बाजारों में रौनक बढ़ी है और कारोबार को भी गति मिली है। ग्रामीण जगदीश ध्यानी बताते हैं कि तीन दशक पहले तक रोजगार के लिए केवल पुरुष ही बाहर जाते थे, जबकि परिवार गांव में रहकर खेती-बाड़ी करता था। लेकिन समय के साथ पूरा परिवार शहरों में बस गया और कई गांव वीरान हो गए। बावजूद इसके अपने गांव, कुलदेवताओं और रिश्तेदारों से जुड़ाव आज भी लोगों को साल में एक बार पहाड़ खींच लाता है।
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धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को मिली नई ऊर्जा
लोगों का कहना है कि प्रवासियों के आगमन से धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा मिली है। लोग घर आकर देवपूजन, भागवत कथा, भंडारे, रामलीला एवं अन्य सामुदायिक आयोजनों में हिस्सा ले रहे हैं। गांवों में आपसी सहयोग और मेल-मिलाप का माहौल देखने को मिल रहा है। साथ ही प्रवासी अपने कुलदेवताओं के दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं तथा वर्षों बाद सगे-संबंधियों और मित्रों से मिलकर पुरानी यादें ताजा कर रहे हैं।
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स्याल्दे, देघाट, सराईखेत, जौरासी, नागचूलाखाल, बल्मरा और भाकूड़ा जैसे बाजार भी इन दिनों गुलजार नजर आ रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि प्रवासियों के आने से बाजारों में रौनक बढ़ी है और कारोबार को भी गति मिली है। ग्रामीण जगदीश ध्यानी बताते हैं कि तीन दशक पहले तक रोजगार के लिए केवल पुरुष ही बाहर जाते थे, जबकि परिवार गांव में रहकर खेती-बाड़ी करता था। लेकिन समय के साथ पूरा परिवार शहरों में बस गया और कई गांव वीरान हो गए। बावजूद इसके अपने गांव, कुलदेवताओं और रिश्तेदारों से जुड़ाव आज भी लोगों को साल में एक बार पहाड़ खींच लाता है।
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धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को मिली नई ऊर्जा
लोगों का कहना है कि प्रवासियों के आगमन से धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा मिली है। लोग घर आकर देवपूजन, भागवत कथा, भंडारे, रामलीला एवं अन्य सामुदायिक आयोजनों में हिस्सा ले रहे हैं। गांवों में आपसी सहयोग और मेल-मिलाप का माहौल देखने को मिल रहा है। साथ ही प्रवासी अपने कुलदेवताओं के दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं तथा वर्षों बाद सगे-संबंधियों और मित्रों से मिलकर पुरानी यादें ताजा कर रहे हैं।